मानसून आने के बावजूद हो रही है, बारिश की कमी, राज्य पर मंडराया सूखे का खतरा।

रायपुर : सबसे पहले आपको बता दें कि अल नीनो भू-मध्यरेखीय प्रशांत महा-सागर में उत्पन्न होने वाली एक जलवायु घटना है, जो समुद्र का तापमान बढ़ा देती है। इसका प्रभाव पूरी दुनिया के मौसम, कृषि और जनजीवन पर अलग-अलग तरीकों से पड़ता है। वहीँ आपको बता दें की राज्य में भी इसका काफी हद तक प्रभाव पड़ने की सम्भावना है, क्यूंकि अब भी मानसून के प्रवेश के बावजूद बारिश नहीं होने से रायपुर में उमस से लोग बेहाल हैं। मौसम विभाग की रायपुर में बारिश को लेकर पूर्वानुमान लगातार फेल साबित हो रहा है, बारिश नहीं हो रही है। छत्तीसगढ़ के सभी संभागो के कुछ क्षेत्रों में वज्रपात दर्ज की गई है। 29 जून से अगले 4 दिनों तक पूरे प्रदेश में बारिश की गतिविधि बढ़ने की संभावना जताई गई है। वहीं दक्षिण-पश्चिम मानसून अगले 3 दिनों में शेष हिस्सों तक पहुंचने के आसार हैं। वहीँ अब भी जहाँ मानसून पहुंचा है, वहां अब भी बारिश नहीं हो रही है। इससे कृषि उत्पादकता (खासकर खरीफ फसलों) पर सीधा प्रभाव पड़ता है।

प्रदेश में यहां गिरा पानी :

प्रदेश के कोहकामेटा में 7 सेंटीमीटर, कोंटा में 6, खड़गांव में 5, करपावंड, फरसगांव, मानपुर, नारायणपुर, मर्दापाल, रामचंद्रपुर, गंडई में 4-4, बकावंड, मुंगेली, दुर्ग, कटेकल्याण, औंधी में 3-3 सेंटीमीटर वर्षा दर्ज की गई. प्रदेश के अनेक जिलों में रविवार को हल्की से मध्यम बारिश दर्ज की गई. सर्वाधिक अधिकतम तापमान 40 डिग्री सेल्सियस राजनांदगांव में, जबकि सबसे कम न्यूनतम तापमान 23.6 डिग्री सेल्सियस पेंड्रा रोड में रिकॉर्ड किया गया.

सिनोप्टिक सिस्टम :

मौसमी द्रोणिका पंजाब से हरियाणा और उत्तर प्रदेश से होकर बिहार तक समुद्र तल पर बनी हुई है। एक द्रोणिका उत्तर-पूर्व मध्य प्रदेश से विदर्भ होते हुए तेलंगाना तक समुद्र तल से 0.9 किमी की ऊंचाई पर बनी हुई है, तो वहीं मध्यप्रदेश और उसके आसपास के क्षेत्रों में समुद्र तल से 3.1 से 5.8 किमी की ऊंचाई के बीच ऊपरी हवा का चक्रवाती परिसंचरण बना हुआ है। एक द्रोणिका तटीय आंध्रप्रदेश के उत्तरी हिस्सों से छत्तीसगढ़ और मराठवाड़ा होते हुए मध्य महाराष्ट्र तक समुद्र तल से 4.5 किमी की ऊंचाई पर बनी हुई है। प्रदेश में अनेक स्थानों पर हल्की से मध्यम वर्षा तथा एक-दो स्थानों पर गरज-चमक के साथ भारी वर्षा हो सकती है। वहीँ बारिश की उम्मीद अब भी कम है।