रायपुर में अब उपलब्ध हुआ पारदर्शी सिलेंडर, मिलेगा बड़ा लाभ, सामने आई ये जानकारी….।

रायपुर। मिडिल ईस्ट में तनाव और युद्ध के कारण एलपीजी सप्लाई पर असर पड़ा है। ऐसे में राहत भरी खबर आई है। विभिन्न राज्यों के साथ छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में 10 किलोग्राम का नया कंपोजिट एलपीजी सिलेंडर लॉन्च किया गया है। यह सिलेंडर पारंपरिक लोहे के सिलेंडर के मुकाबले काफी हल्का है, क्योंकि इसे फाइबर कंपोजिट सामग्री से बनाया गया है। 

इस सिलेंडर की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह पारदर्शी है, जिससे उपभोक्ता बाहर से ही देख सकेंगे कि सिलेंडर में कितनी गैस बची है। रायपुर में 10 किलो वाला कंपोजिट एलपीजी सिलेंडर (फाइबर बॉडी) लेने के लिए नए सिक्योरिटी डिपॉजिट लगभग 3,000 रुपए है। इसके रिफिल (गैस) की कीमत 715 से 730 के बीच है। पेट्रोलियम कंपनियों जैसे इंडेन और बीपीसीएल ने इस हल्के और पारदर्शी स्मार्ट सिलेंडर की शुरुआत सबसे पहले रायपुर शहर से की है। 

10 किलो वाले फाइबर सिलेंडर में भारतगैस
गौरतलब है कि, भारत पेट्रोलियम ने हाल ही में “भारत गैस लाइट जिप नाम से अपना 10 किलो का फाइबर सिलेंडर लॉन्च किया है, जिसमें एक्सप्रेस डिलीवरी की सुविधा दी जा रही है। इंडियन ऑयल का “इंडेन एक्स्ट्रालाइट” भी 10 किलो के वेरिएंट में उपलब्ध है। एचपीसीएल का यह सिलेंडर “एचपी गैस ओजस’ नाम से बाजार में उपलब्ध है।

कैसे ले सकते हैं सिलेंडर ?

  • आपको कनेक्शन लेना होगा, जिसे कंपनी की तरफ से फ्री-ट्रेड एलपीजी कैटेगरी में पेश किया गया है।
  • इसे सरल ऑनबोर्डिंग प्रक्रिया के तहत तुरंत गैस कनेक्शन ले सकते हैं।
  • दावा ये भी है कि बुक करने के लगभग 4 घंटे के भीतर सिलिंडर की डिलीवरी हो जाएगी।

 क्या है खासियत

  • इस सिलेंडर में 10 किलो गैस होगी और जंग नहीं लगेगी।
  • ये 10 किलो वाला गैस सिलेंडर फाइबर कंपोजिट तकनीक से बना है और ये हल्का एलपीजी सिलेंडर है।

सरकार ने 21 कंपनियों के लिए तय किए टारगेट
इधर, केंद्र सरकार ने पहली बार देश की सरकारी और प्राइवेट रिफाइनरीज व अपस्ट्रीम कंपनियों के लिए एलपीजी उत्पादन के अधिकतम टारगेट तय कर दिए हैं। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने जारी आदेश में 21 कंपनियों के लिए कुल 63,810 टन प्रतिदिन एलपीजी उत्पादन की क्षमता और टारगेट निर्धारित किया है। यह लक्ष्य वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान देश में हुए कुल घरेलू एलपीजी उत्पादन से दोगुने से भी अधिक है और यह देश की कुल रोजाना खपत का लगभग 70% कवर करता है।