रेत घाट को बेचने का बड़ा खुलासा, गाँव वालों ने दिया है एक करोड़ में ठेका।

रायपुर : रायपुर जिले के आरंग ब्लॉक अंतर्गत गौरभाट रेत घाट का ग्रामीणों द्वारा की गई नीलामी का सोशल मीडिया में वायरल हुआ वीडियो सही निकला है, लेकिन अफसरों का दावा झूठा है। गौरभाट के ग्रामीणों ने बैठक कर रेत घाट को नीलाम किया था।  मामला सामने आने के बाद खनिज विभाग के अफसरों ने दावा किया था कि जांच के लिए टीम मौके पर भेजी गई है। जांच के बाद कार्यवाही की जाएगी। इस मामले में गांव के बुजुर्ग सहित अन्य प्रमुख लोगों से बातचीत की तो उनके द्वारा नीलामी की पुष्टि करते हुए इस संबंध में खुलकर जानकारी दी। ग्रामीणों का मानना है कि उन्होंने घाट की नीलामी करके कोई गलती नहीं की है, क्योंकि घाट उनके गांव का है। ऐसे में घाट की नीलामी गांव के भलाई के लिए की गई है।

ग्राम छटेरा के व्यक्ति को दिया गया ठेका :

मामले में बातचीत करते हुए ग्रामीणों ने बताया कि, सरपंच सहित पूरा गांव के लोगों ने सामूहिक रूप से बैठक कर घाट की नीलामी की है। नाथुराम यादव, तिहारू निषाद, भरत निषाद, सोहनलाल पटेल सहित अन्य ग्रामीणों ने बताया कि पिछले कई वर्षों से गांव का विकास रुका हुआ है। घाट उनके गांव का है, इसलिए सरपंच सहित पूरे गांव के लोगों ने एक निर्णय लेकर 10 नवंबर रविवार को बैठक बुलाई थी। यह बैठक घाट को नीलामी के लिए बुलाई गई थी, जिसमें बोली लगाने घाट खरीददारों को भी बुलाया गया था। बैठक में घाट की बोली एक करोड़ रुपए रखी गई थी, इसलिए बैठक ज्यादातर देर तक नहीं चली। घाट के लिए अंतिम बोली 1 करोड़ 4 लाख रुपए लगाई गई थी। यह बोली ग्राम छटेरा के भोलू चंद्राकर नामक व्यक्ति ने लगाई थी, जिसे घाट का ठेका दिया गया है। इस मामले में गाँव के लोगों को कोई दिक्कत नहीं है।

6 महीने का ठेका, 50 हजार एडवांस राशि जमा कराई गई :

रेत घाट का यह ठेका 6 महीनों के लिए दिया गया है। ग्रामीणों के अनुसार जिस व्यक्ति को ठेका दिया गया है, उसके द्वारा एडवांस राशि के रूप में 50 हजार रुपए गांव के मुखिया के पास जमा कराया गया है। जिस दिन रेत खनन का काम शुरू होगा। उसी दिन सात लाख रुपए की पहली किश्त ठेकेदार को जमा करने कहा गया है। इसके बाद तीन से चार किश्तों में शेष राशि को जमा करने की शर्त रखी गई है। जिस रेत घाट की अवैध रूप से नीलामी की गई है, उसमें लबालब पानी भरा हुआ है। सौदे के अनुसार ठेकेदार घाट में भरे पानी को बाहर निकालकर या सुखा कर यहां रेत का खनन कराया जाता है जो नियम के विरुद्ध है।

इस घाट से रोजाना तकरीबन 50 से ज्यादा हाईवा रेत का खनन एवं परिवहन होने की संभावना है। बाजार में इन दिनों प्रति हाईवा रेत की न्यूनतम कीमत 22 हजार और अधिकतम 27 हजार रुपए है। ऐसे में 50 हाईवा रेत के अनुसार इसकी कीमत करीब 12 लाख रुपए होगी। महीने की औसत कमाई 3 करोड़ रुपए से ज्यादा। कहा जा रहा है कि एक करोड़ चार लाख में ठेका लेने वाला ग्रामीणों की सहमति से छह महीने तक रेत खनन कर सकता है। इससे सरकार को करोड़ों की चपत लगेगी।

गांव-विभाग के बीच सहमति नहीं बन पाने कारण पिछली बार नहीं हो पाया था टेंडर :

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विभागीय सूत्रों केअनुसार,  गौरभाट घाट पर सालभर पानी भरा रहता है। इस कारण घाट का टेंडर निकालने में भी अड़चन आई थी, हालांकि सूत्रों के अनुसार पिछले वर्ष इस घाट के लिए टेंडर की प्रक्रिया चल रही थी, लेकिन ग्रामीणों ने विभाग से गांव के विकास के लिए एक बड़ी राशि की मांग की थी, जिस पर सहमति नहीं बनने के कारण इस घाट का टेंडर नहीं हो पाया था।

प्रदेश की यह पहली घटना है, जिसमें किसी रेत घाट की नीलामी अवैध रूप से गांव द्वारा कर दी गई है। इधर इस मामले में खनिज विभाग के अफसरों से लेकर संबंधित तहसील कार्यालय के राजस्व अधिकारियों ने भी इस मामले में अब चुप्पी साध ली है। आरंग एसडीएम पुष्पेंद्र शर्मा ने बताया कि, अभी मैं उपचुनाव में व्यस्त हूं  इसलिए इस मामले में मुझे कोई जानकारी नहीं है। इस संबंध में खनिज विभाग को ही जांच कर कार्यवाही करना है। इस मामले में हमारे पास कोई लिखित शिकायत नहीं आई है। शिकायत मिलने पर जांच करेंगे। रायपुर खनिज विभाग के उपसंचालक केके गोलघाटे ने बताया कि, इस मामले में जांच करने के निर्देश दिए गए है।