बिलासपुर : छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के जस्टिस एनके व्यास ने बलौदाबाजार हिंसा केस पर सख्त टिप्पणी कर चुके है। उन्होंने कहा है कि आरोपियों ने 7-8 हजार लोगों की भीड़ को भड़काकर 13 से 14 करोड़ रुपए की सरकारी और निजी संपत्ति को नुकसान पहुंचाया था। इसके साथ ही साथ ही पुलिसकर्मियों पर जानलेवा हमला भी कराया गया था, जो अक्षम्य है। वहीँ कोर्ट ने कहा है कि समाज में शांति और कानून व्यवस्था को पूरी तरह बिगाड़ने वाले ऐसे गंभीर अपराध में आरोपियों को जमानत का लाभ नहीं दिया जा सकता।
अब इसी के साथ हाईकोर्ट ने बवाल, पथराव और कलेक्ट्रेट परिसर में आगजनी के मामले में छत्तीसगढ़ क्रांति सेना के संस्थापक अमित बघेल सहित 3 आरोपियों की जमानत याचिकायें बीते दिनों खारिज कर दी है। अब फिर से बलौदाबाजार हिंसा और आगजनी मामले में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई है। जिसमें शीर्ष अदालत ने विशेष अनुमति याचिका (SLP) पर सुनवाई के बाद छत्तीसगढ़ सरकार को नोटिस जारी कर जवाब पेश करने का निर्देश दिया है। एसएलपी पर अगली सुनवाई के लिए सुप्रीम कोर्ट ने 17 जुलाई की तिथि निर्धारित की है।
हाईकोर्ट से जमानत याचिका हो चुकी है खारिज :
बलौदाबाजार में हुए बहुचर्चित हिंसा और आगजनी मामले में आरोपी अमित बघेल,अजय यादव और दिनेश कुमार वर्मा की छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने तीनों की जमानत याचिका को खारिज कर दी थी। अजय यादव ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर जमानत की गुहार लगाई है। शीर्ष अदालत ने राज्य सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
आपको बता दें कि बलौदाबाजार के दशहरा मैदान में 10 जून 2024 को एक सामाजिक मुद्दे को लेकर विरोध प्रदर्शन आयोजित किया गया था, जिसमें हजारों की संख्या में लोग पहुंचे थे। आरोप है कि वहां छत्तीसगढ़ क्रांति सेना के पदाधिकारियों ने मंच से भड़काऊ भाषण देकर भीड़ को उग्र कर दिया। इसके बाद हिंसक हुई भीड़ ने बैरिकेड्स तोड़ते हुए कलेक्टोरेट और एसपी कार्यालय परिसर में घुसकर जमकर तोड़फोड़ की। सैकड़ों वाहनों में आग लगा दी गई और कलेक्टोरेट भवन को भी आग के हवाले कर दिया गया।
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के जस्टिस नरेंद्र कुमार व्यास के सिंगल बेंच ने 19 मई 2026 को आवेदकों की जमानत याचिकाओं को खारिज कर दिया था। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि आवेदक अमित बघेल और अजय यादव छत्तीसगढ़ क्रांति सेना के पदाधिकारी हैं, उन पर सात से आठ हजार लोगों की भीड़ को भड़काने, सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और पुलिस बल पर जानलेवा हमले का गंभीर आरोप है।
हिंसा में 13 से 15 करोड़ की सार्वजनिक संपत्ति को पहुंचा था नुकसान :
हिंसा के कारण बलौदाबाजार-भाटापारा जिला और मुख्यालय में शांति व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हुई और लगभग 13 से 15 करोड़ रुपये की सार्वजनिक संपत्ति का नुकसान हुआ। अमित बघेल के खिलाफ 17, अजय यादव के खिलाफ 13 और दिनेश कुमार वर्मा के खिलाफ एक आपराधिक मामला लंबित है। वहीँ छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देते हुए आरोपियों ने सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका SLP दायर कर जमानत की मांग की है। याचिका की सुनवाई के बाद शीर्ष अदालत ने राज्य सरकार को नोटिस जारी कर जवाब पेश करने का निर्देश दिया गया है।
15 और 16 मई 2024 की दरमियानी रात कुछ असामाजिक तत्वों ने गिरौधपुरी धाम में सतनामी समाज के धार्मिक स्थल के पूज्य जैतखाम में तोड़फोड़ की थी। मामले में कार्रवाई करते हुए पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया था। पुलिस की इस कार्यवाही से समाज के लोग असंतुष्ट थे और न्यायिक जांच की मांग कर रहे थे। जिसके बाद गृहमंत्री विजय शर्मा ने न्यायिक जांच की घोषणा की थी। वहीं 10 जून को जैतखाम में तोड़फोड़ के विरोध में हजारों लोग कलेक्ट्रेट के पास एकत्र हुए और जमकर हंगामा किया, जहां प्रदर्शन हिंसक हो गया। जिसके बाद उपद्रवियों ने तांडव मचाते हुए कलेक्टर और एसपी कार्यालय को आग के हवाले कर दिया। इस हिंसक घटना में सरकारी संपत्तियों को 12.53 करोड़ रुपये का भारी नुकसान पहुंचा था। मामले में प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए 43 मामलों में 187 लोगों को गिरफ्तार किया गया था।



