रायपुर : राज्य में धर्मान्तरण सिर्फ कुछ जाति और समुदायों का ही नहीं हो रहा है, बल्कि सभी समुदाय और जातियां इसकी भेंट चढ़ रही है, लेकिन गरीब भोले भले आदिवासी वर्ग और्सहू समाज का धर्मान्तरण सबसे ज्यादा हो रहा है, वहीँ छत्तीसगढ़ में धर्मांतरण को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है, खासकर आदिवासी बाहुल्य क्षेत्रों में धर्म परिवर्तन के मामलों को लेकर अक्सर विवाद की स्थिति बनती रही है। इसी बीच वरिष्ठ आदिवासी नेता नंदकुमार साय ने धर्मांतरण के मुद्दे पर बड़ा बयान दिया है, उन्होंने कहा है कि आदिवासी समाज के अलावा साहू समाज सहित कई अन्य समुदायों के लोग भी बड़ी संख्या में धर्म परिवर्तन कर रहे हैं, जिसमें अधिकांश मात्रा में साहू समाज धर्मान्तरित हो रहा है।
वहीँ नंदकुमार साय ने आरोप लगाया है कि प्रदेश में सुनियोजित तरीके से धर्मांतरण कराया जा रहा है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि जो भी धर्मांतरण कराने में शामिल होगा, उसका रास्ता रोका जायेगा। साथ ही उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य कानून के तहत कड़ी कानूनी कार्यवाही की जायेगी। आपको बता दें कि नंदकुमार साय एक हिंदूवादी विचारधारा के आदिवासी नेता है, जो बीते चुनाव के समय भाजपा छोड़कर कांग्रेस के पक्ष में थे।
धर्मांतरण को लेकर क्या कानून?
छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य कानून ऐसा कानून है, जिसका उद्देश्य किसी व्यक्ति का बल, प्रलोभन, धोखाधड़ी, दबाव, अनुचित प्रभाव या लालच देकर धर्म परिवर्तन कराने पर रोक लगाना है। छत्तीसगढ़ में यह कानून छत्तीसगढ़ धर्म स्वतंत्रता अधिनियम, 1968 के तहत लागू है। इस कानून के अनुसार कोई भी व्यक्ति किसी अन्य व्यक्ति का धर्म बलपूर्वक, कपटपूर्ण तरीके से या किसी प्रकार के प्रलोभन देकर परिवर्तित नहीं करा सकता है, यदि कोई ऐसा करता है तो उसके खिलाफ कानूनी कार्यवाही और दंड का प्रावधान है, हालांकि, कोई व्यक्ति अपनी स्वतंत्र इच्छा और स्वेच्छा से धर्म परिवर्तन करना चाहता है तो उसे कानून के तहत निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना होता है। इस कानून का मुख्य उद्देश्य धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा करना और जबरन या धोखे से होने वाले धर्मांतरण को रोकना है। वहीँ इसको लेकर राज्य सरकार भी लगातार प्रयासरत है।



