रायपुर : वैसे तो हम हर बात में प्रशासन को खरी खोटी सुनाते है, लेकिन क्या कभी हमने खुद को देखा है, कि राष्ट्र के प्रति हमारे भी कुछ कर्त्तव्य होते है, कभी कोई घटना हो जाये तो हम प्रशासनिक व्यवस्था को कोसने में कोई कमी नहीं करते, लेकिन विदेशों की प्रशंसा जरुर करते है, फिर भी आपको ये जान लेना चाहिये कि जापान और इजराइल जैसे देशों के नागरिक भी अपनी जिम्मेदारी बखूबी निभाते है, ना कि अपनी व्यवस्था को दोष देते रहते है, ऐसे आपके सामने एक खूबसूरत खबर सामने आई है, राजधानी में ट्रैफिक जाम के बीच इंसानियत की एक तस्वीर सामने आई है। शारदा चौक के पास दोपहर के समय सड़क पर भारी भीड़ और वाहनों की आवाजाही के चलते जाम की स्थिति बनी हुई थी। इसी दौरान एक एम्बुलेंस भी भीड़ के बीच फंस गई। एम्बुलेंस को रास्ता नहीं मिल रहा था और वह धीरे-धीरे आगे बढ़ने की कोशिश कर रही थी।
इसी बीच भीड़ में मौजूद एक युवक आगे आया और एम्बुलेंस को रास्ता दिलाने की कोशिश शुरू कर दी, उसने काफी लम्बी दूरी तक अपने नागरिक होने की जिम्मेदारी निभाई। युवक ने लोगों और वाहनों को किनारे करवाकर एम्बुलेंस के लिए रास्ता खाली कराया। इसके बाद एम्बुलेंस वहां से निकल सकी। इस घटना का वीडियो भी सामने आया है, जिसमें युवक को भीड़ के बीच रास्ता बनाते हुए देखा जा सकता है।
सड़क चौड़ीकरण नहीं होने से बनी रहती है जाम की समस्या :
शारदा चौक क्षेत्र में सड़क पर वाहनों का दबाव अधिक रहने के कारण अक्सर जाम की स्थिति देखने को मिलती है। स्थानीय स्तर पर सड़क चौड़ीकरण का काम नहीं होने से पीक टाइम में स्थिति और भी बिगड़ जाती है। ऐसे में आम वाहन चालकों के साथ-साथ आपात स्थिति में निकलने वाली एम्बुलेंस और अन्य जरूरी वाहनों को भी परेशानी का सामना करना पड़ता है। ऐसे में कई बार खुद आगे निकलने के बजाय जरूरतमंद को आगे निकलने देना चाहिये, जबकि हमारे यहाँ एम्बुलेंस को भी लोग रास्ता नहीं देते है।
युवक की इस पहल की सराहना हो रही :
इस घटना में युवक की पहल ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि सड़क पर थोड़ी सी जिम्मेदारी और संवेदनशीलता किसी जरूरतमंद के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। अगर जाम में फंसी एम्बुलेंस को समय पर रास्ता नहीं मिलता, तो मरीज की स्थिति पर भी इसका असर पड़ सकता है। इस घटना का वीडियो सामने आने के बाद युवक की इस पहल की सराहना हो रही है। जाम के बीच एम्बुलेंस को रास्ता दिलाने की यह कोशिश बताती है कि थोड़ी सी संवेदनशीलता और जिम्मेदारी किसी जरूरतमंद के लिए कितनी अहम हो सकती है।



