रायपुर : भारी खर्च और जरूरी व्यवस्थाओं के अभाव के चलते राज्य में कैडेवर डोनेशन की शुरुआत के चार साल बीत जाने के बाद भी अब तक हार्ट ट्रांसप्लांट शुरू नहीं हो सका है। इस दिशा में कदम बढ़ाते हुए अब मुख्यमंत्री विशेष सहायता योजना के तहत हार्ट ट्रांसप्लांट के लिए 13.5 लाख रुपये का पैकेज जोड़ने की तैयारी की जा रही है। वर्तमान में राज्य में किडनी, लिवर, नेत्र और त्वचा के प्रत्यारोपण के जरिए कैडेवर डोनेशन की प्रक्रिया पूरी की जा रही है। समुचित सुविधा न होने की वजह से ‘राज्य अंग एवं ऊतक प्रत्यारोपण प्राधिकरण’ के पास अब तक हार्ट या लंग्स के किसी भी जरूरतमंद मरीज का पंजीयन नहीं हो पाया है।
15 अंगदाताओं से मिला नया जीवन, पर दिल और फेफड़े का प्रत्यारोपण अब भी दूर :
राज्य में पहला अंगदान नवंबर 2022 में हुआ था। इसके बाद से अब तक 15 दानदाताओं के अंगों की मदद से कई जरूरतमंदों को नया जीवन मिल चुका है। फिलहाल कैडेवर डोनेशन की प्रक्रिया किडनी, लिवर, कॉर्निया (नेत्र), त्वचा और हार्ट टिशू के उपयोग तक ही सीमित है। चार साल बीत जाने के बाद भी राज्य इस क्षेत्र में हार्ट और लंग्स के दान तथा सफल प्रत्यारोपण की दिशा में आगे नहीं बढ़ पाया है।
अस्पताल पंजीकृत, पर भारी खर्च के चलते एक भी प्रक्रिया नहीं :
जानकारों के अनुसार, हार्ट ट्रांसप्लांट का खर्च अत्यधिक होना इसकी मुख्य बाधा है। राज्य के तीन बड़े निजी अस्पतालों के पंजीकृत होने के बावजूद अब तक एक भी ट्रांसप्लांट प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाई है। इसके साथ ही, प्राधिकरण के पास अंगदान की प्रतीक्षा सूची में दिल या फेफड़े के प्रत्यारोपण के लिए एक भी मरीज दर्ज नहीं है। हालांकि, आगामी समय में इसके शुरू होने की उम्मीद बंधी है और शासन स्तर पर योजना में 13.5 लाख रुपये का पैकेज निर्धारित करने के प्रस्ताव पर विचार किया जा रहा है।
एक्मो और आईएबीपी जैसी आधुनिक सुविधाएं भी होंगी शामिल :
विशेष सहायता योजना के प्रस्तावित पैकेज में एक्मो (ECMO) और आईएबीपी (IABP) जैसी उन्नत जीवन रक्षक सुविधाएं भी शामिल की जायेंगी। एक्मो तकनीक गंभीर स्थिति वाले मरीजों के हृदय व फेफड़ों को अस्थायी रूप से बाहर से सुचारू रखने में मदद करती है, वहीं आईएबीपी सर्जरी के दौरान मरीज के रक्तचाप को नियंत्रित रखने का काम करती है।
हार्ट टिशू और स्किन बैंक से मिल रही मदद :
राज्य में पूर्ण हार्ट ट्रांसप्लांट शुरू न होने के बावजूद दानदाताओं से प्राप्त हार्ट वॉल्व टिशू का उपयोग छोटे बच्चों की दिल की सर्जरी में किया जा रहा है। इस टिशू को सुरक्षित रखने के लिए सत्य साईं संजीवनी हॉस्पिटल में बैंक स्थापित किया गया है। इसी तरह, दान में मिलने वाली त्वचा को सुरक्षित रखने के लिए डीके हॉस्पिटल में स्किन बैंक संचालित किया जा रहा है।



