6,000 करोड़ रुपये के महादेव ऑनलाईन सट्टा सिंडिकेट का मुख्य सूत्रधार सौरभ चंद्राकर 10 दिन की सीबीआई रिमांड पर, सघन पूछताछ के लिये दिल्ली मुख्यालय ले जायेगी केंद्रीय जांच एजेंसी।

रायपुर : छत्तीसगढ़ राज्य का सबसे बड़ा सटोरिया सौरभ चंद्राकर अब रायपुर पुलिस के हत्थे चढ़ चुका है, जूस के कारोबार से लेकर अंतर्राष्ट्रीय सटोरिया बनने की उसकी कहानी काफी अनोखी है, वहीँ आपको बता दें कि देश के सबसे बड़े वित्तीय घोटालों में शुमार लगभग 6,000 करोड़ रुपये के कथित महादेव ऑनलाईन सट्टेबाजी और मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क के मुख्य सरगना सौरभ चंद्राकर को बुधवार को रायपुर स्थित विशेष सीबीआई अदालत में पेश किया गया है। कड़ी सुरक्षा, कमांडो घेरे और भारी पुलिस बल की तैनाती के बीच उसे विशेष न्यायाधीश मनोज कुमार सिंह ठाकुर के न्यायालय में प्रस्तुत किया गया। जांच एजेंसी ने अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर फैले इस पूरे अवैध साम्राज्य के वित्तीय लेन-देन, शैल कंपनियों, सर्वर संचालन और विदेशी संपत्तियों की तह तक पहुंचने के लिये आरोपी की 14 दिन की कस्टोडियल रिमांड की मांग की थी। विशेष अदालत ने दोनों पक्षों के तर्कों का गहराई से परीक्षण करने के उपरांत सौरभ चंद्राकर को 10 दिन की सीबीआई रिमांड पर सौंपने का फैसला सुनाया। इसके साथ ही सीबीआई द्वारा प्रस्तुत उस आवेदन को भी न्यायालय ने औपचारिक स्वीकृति प्रदान कर दी, जिसमें आरोपी को विस्तृत तकनीकी और वित्तीय पूछताछ के लिये नई दिल्ली स्थित सीबीआई मुख्यालय ले जाने की अनुमति मांगी गई थी।

अदालत में केंद्रीय जांच एजेंसी की ओर से वरिष्ठ लोक अभियोजक चंदन सिंह ने पक्ष रखा, जबकि बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ता तुषार गिरी और शशांक मिश्रा ने पैरवी की। इस हाई-प्रोफाइल मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए न्यायालय परिसर तथा आसपास के तमाम संवेदनशील क्षेत्रों में त्रिस्तरीय सुरक्षा घेरा तैयार किया गया था। सुनवाई के दौरान प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के कई आला अधिकारी भी न्यायिक कक्ष में उपस्थित रहे।

प्रत्यर्पण की शर्तों और गिरफ्तारी की वैधता पर तीखी कानूनी रस्साकशी :

विशेष अदालत में सुनवाई आरंभ होते ही बचाव पक्ष के वकीलों ने केंद्रीय जांच एजेंसी की संपूर्ण गिरफ्तारी प्रक्रिया और कानूनी अधिकार क्षेत्र पर गंभीर सवाल उठाये। बचाव पक्ष का मुख्य तर्क था कि जांच एजेंसी ने गिरफ्तारी से संबंधित प्राथमिक और आवश्यक दस्तावेज न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत नहीं किये हैं, जिससे विधिक प्रक्रिया का स्पष्ट उल्लंघन होता है।

बचाव पक्ष के अधिवक्ताओं ने ओमान सल्तनत से हुए प्रत्यर्पण की मूल शर्तों का संदर्भ देते हुए दलील दी कि ओमान की न्यायिक सत्ता ने सौरभ चंद्राकर के प्रत्यर्पण की मंजूरी मूल रूप से प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा दर्ज प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए) के मामलों के आधार पर प्रदान की थी। ऐसी स्थिति में सीबीआई द्वारा दर्ज मुकदमों में आरोपी को सीधे हिरासत में लेकर कार्यवाही करना अंतर्राष्ट्रीय प्रत्यर्पण नियमों और ओमान सरकार के साथ तय हुई कूटनीतिक शर्तों का स्पष्ट उल्लंघन माना जायेगा।

इसके उत्तर में सीबीआई के अभियोजक चंदन सिंह ने बचाव पक्ष की आपत्तियों को निराधार करार दिया। जांच एजेंसी ने स्पष्ट किया कि जिन आदेशों और आपत्तियों का हवाला बचाव पक्ष दे रहा है, वे अप्रासंगिक हो चुके हैं। सौरभ चंद्राकर की यह गिरफ्तारी सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी किये गये नवीन आदेशों के तहत निष्पादित की गई है, जिसमें किसी एक जांच एजेंसी तक सीमाएं निर्धारित नहीं हैं।

सीबीआई ने अदालत को अवगत कराया कि नई दिल्ली की राउज एवेन्यू अदालत में भी प्रत्यर्पण की इन्हीं शर्तों को लेकर विवाद उठाया गया था, किंतु रायपुर की विशेष अदालत द्वारा चंद्राकर के विरुद्ध पहले ही गैर-जमानती वारंट जारी किया जा चुका था। ईडी और सीबीआई द्वारा दर्ज मामले एक-दूसरे से अभिन्न रूप से जुड़े हुए हैं, क्योंकि अवैध सट्टा नेटवर्क का संचालन और उससे अर्जित काली कमाई का शोधन (मनी लॉन्ड्रिंग) एक ही आपराधिक सिंडिकेट के दो पहलू हैं। अभियोजन की समग्र वैधता का निर्धारण रायपुर की यही विशेष अदालत करने के लिये सक्षम है, जबकि दिल्ली की अदालत का क्षेत्राधिकार केवल ट्रांजिट रिमांड प्रदान करने तक सीमित था।

ओमान से दिल्ली और फिर रायपुर, 116 दिनों के कूटनीतिक व कानूनी संघर्ष का घटनाक्रम :

सौरभ चंद्राकर को विदेशी धरती से भारत की अदालत तक लाने की यात्रा अत्यधिक जटिल और अंतर्राष्ट्रीय कानूनी दांव-पेचों से भरी रही। केंद्रीय जांच एजेंसियों के अनुसार, सौरभ चंद्राकर वर्ष 2023 से दुबई में अपने सुरक्षित ठिकानों पर रहकर इस पूरे अवैध नेटवर्क को चला रहा था। उसके विरुद्ध इंटरपोल द्वारा रेड कॉर्नर नोटिस जारी किये जाने के पश्चात वह लगातार अपनी पहचान बदलता रहा। गिरफ्तारी से बचने के उद्देश्य से उसने कई देशों के फर्जी पहचान-पत्र और जाली यात्रा दस्तावेज तैयार करवाये, जिनमें ‘अजंता मेंडिस’ के नाम से बनवाया गया एक कथित फर्जी इंडोनेशियाई पासपोर्ट भी शामिल था।

फर्जी दस्तावेजों के सहारे वह संयुक्त अरब अमीरात से ओमान पहुंचा था, जहां रॉयल ओमान पुलिस ने तकनीकी इनपुट और खुफिया सूचनाओं के आधार पर 8 जुलाई 2026 को उसे हिरासत में ले लिया था। इसके पश्चात पूरे 116 दिनों तक भारत सरकार, विदेश मंत्रालय और जांच एजेंसियों ने मस्कट की अदालतों में कानूनी लड़ाई लड़ी।

इस दौरान संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) सरकार ने भी ओमान से सौरभ चंद्राकर के प्रत्यर्पण की समानांतर मांग उठाई थी। मस्कट कोर्ट ऑफ अपील के समक्ष भारत सरकार ने 12 जुलाई को औपचारिक प्रत्यर्पण याचिका प्रस्तुत की थी, जबकि यूएई का आवेदन 14 जुलाई को पहुंचा। 30 अगस्त को भारतीय दूतावास ने विधिक दस्तावेजों के माध्यम से चंद्राकर के विशुद्ध भारतीय नागरिक होने की आधिकारिक पुष्टि की। आरोपी ने कानूनी कार्यवाही से बचने के लिये प्रशांत महासागरीय द्वीप देश वानुअतु की नागरिकता हासिल करने का दावा भी किया था, जिसे ओमान की अदालत ने साक्ष्यों के अभाव में खारिज कर दिया।

भारत सरकार ने ओमान के समक्ष संप्रभु आश्वासन प्रस्तुत किये कि ओमान की पूर्वानुमति के बिना आरोपी को किसी तीसरे देश को नहीं सौंपा जायेगा, उसे निष्पक्ष न्यायिक प्रक्रिया का पूर्ण अवसर मिलेगा तथा प्रत्यर्पण पूर्व के असंबंधित पुराने मामलों में कोई दुर्भावनापूर्ण मुकद्दमा नहीं चलाया जायेगा। यूएई द्वारा ऐसे व्यापक विधिक आश्वासन न दिये जाने के कारण मस्कट कोर्ट ऑफ अपील ने 8 अक्टूबर 2026 को भारत के प्रत्यर्पण अनुरोध को प्राथमिकता देने का ऐतिहासिक निर्णय सुनाया। ओमान में फर्जी दस्तावेजों के उपयोग से जुड़े स्थानीय मुकद्दमे का विधिक निपटारा होने के पश्चात सीबीआई की विशेष टीम 1 नवंबर को उसे मस्कट से विमान द्वारा नई दिल्ली लेकर आई।

दिल्ली की राउज एवेन्यू अदालत के प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश निखिल चोपड़ा ने केंद्रीय एजेंसी को दो दिन की ट्रांजिट रिमांड स्वीकृत करते हुए निर्देशित किया था कि आरोपी को 4 नवंबर 2026 तक रायपुर की विशेष अदालत में पेश किया जाये। इस आदेश के अनुपालन में सीबीआई की टीम मंगलवार को इंडिगो की नियमित उड़ान ई6 2307 से आरोपी को लेकर रायपुर पहुंची और निर्धारित समय-सीमा के भीतर विशेष न्यायाधीश की अदालत में हाजिर किया।

भिलाई की गलियों से दुबई के आलीशान महलों तक, 6,000 करोड़ के साम्राज्य का विस्तार :

मूल रूप से छत्तीसगढ़ के भिलाई का निवासी सौरभ चंद्राकर कुछ वर्ष पूर्व तक स्थानीय स्तर पर एक सामान्य व्यवसाय से जुड़ा हुआ था। धीरे-धीरे उसने सट्टेबाजी के अवैध कारोबार में कदम रखा और तकनीक का सहारा लेकर ‘महादेव ऑनलाईन बुक’ नामक एक विस्तृत ऑनलाईन बेटिंग प्लेटफॉर्म खड़ा कर दिया। स्थानीय स्तर से प्रारंभ हुआ यह अवैध धंधा देखते ही देखते एक विशाल अंतर्राष्ट्रीय सिंडिकेट में परिवर्तित हो गया, जिसके तार दुबई, मलेशिया, थाईलैंड और कई यूरोपीय देशों से जुड़ गये।

इस सिंडिकेट के वित्तीय ढांचे की जांच में यह तथ्य उजागर हुआ कि देश भर से ऑनलाईन सट्टे के माध्यम से जुटाई गई अवैध धनराशि को फर्जी बैंक खातों (म्यूल एकाउंट्स), कॉर्पोरेट मुखौटा कंपनियों और हवाला ऑपरेटरों के विशाल जाल के जरिये विदेशों में भेजा जाता था। जांच एजेंसियों ने यूएई के रास अल-खैमाह में आयोजित सौरभ चंद्राकर के बहुचर्चित विवाह समारोह का भी ब्योरा संकलित किया है, जिसमें लगभग 200 करोड़ रुपये नकद खर्च किये गये थे। इस आयोजन के लिये विशेष चार्टर्ड विमानों की व्यवस्था की गई थी तथा अनेक नामी फिल्मी और संगीत कलाकारों को हवाला के माध्यम से भारी-भरकम भुगतान किया गया था।

छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य के विभिन्न थानों में दर्ज कुल 13 महत्वपूर्ण प्राथमिकियों (एफआईआर) की जांच की अनुशंसा सीबीआई को सौंपी थी। इनमें से दो प्रमुख मामलों में सीबीआई पहले ही सक्षम न्यायालय में विस्तृत आरोप-पत्र दाखिल कर चुकी है। दूसरी ओर, प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) भी इस सिंडिकेट द्वारा अर्जित अकूत अवैध संपत्ति, बेनामी रियल एस्टेट निवेश और शैल कंपनियों के विरुद्ध अभियोजन शिकायतें दर्ज कर चुका है। देश के विभिन्न राज्यों में इस गिरोह के विरुद्ध दर्जनों मुकद्दमे दर्ज हैं और अब तक तकनीक विशेषज्ञों, पैनल ऑपरेटरों और हवाला कारोबारियों सहित कई मुख्य आरोपियों की गिरफ्तारियां हो चुकी हैं।

राजनीतिक संरक्षण और हवाला नेटवर्क पर बड़ा खुलासा होने की संभावना :

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सौरभ चंद्राकर के सफल प्रत्यर्पण और उसकी गिरफ्तारी को केंद्रीय जांच एजेंसियों की एक बड़ी कूटनीतिक और कानूनी विजय निरूपित किया है। मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया है कि इस ठोस कार्यवाही के माध्यम से उस विशाल तंत्र का पर्दाफाश होगा, जो वर्षों तक इस गिरोह को राजनीतिक, प्रशासनिक और पुलिसिया संरक्षण प्रदान करता रहा।

अब जब विशेष अदालत ने सौरभ चंद्राकर को 10 दिन की पुलिस कस्टडी में भेज दिया है, सीबीआई उसे दिल्ली ले जाकर मुख्यालय के विशेष साईबर और आर्थिक अपराध विशेषज्ञों की उपस्थिति में पूछताछ की प्रक्रिया में शामिल करेगी। जांच एजेंसी का मुख्य उद्देश्य निम्नलिखित महत्वपूर्ण बिंदुओं से पर्दा उठाना है:

  • तकनीकी संरचना और सर्वर नेटवर्क : ऑनलाईन सट्टेबाजी के मुख्य डोमेन, विदेशी क्लाउड सर्वर, एन्क्रिप्टेड चैट बैकअप और एप्लीकेशन के नए एल्गोरिदम का स्रोत।
  • हवाला नेटवर्क और मनी ट्रेल : भारत से दुबई, माल्टा और अन्य कर-मुक्त देशों में भेजे गये अरबों रुपये के वित्तीय लेन-देन की कड़ियां।
  • शैल कंपनियां और विदेशी संपत्तियां : विदेशी बैंकों में जमा गुप्त पूंजी, बेनामी अचल संपत्तियों और क्रिप्टो करेंसी वॉलेट्स के गुप्त पासवर्ड्स।
  • संरक्षण सिंडिकेट : इस अवैध कारोबार को निर्बाध संचालित कराने के बदले देश के प्रभावशाली राजनेताओं, नौकरशाहों और पुलिस अधिकारियों को पहुंचाई गई ‘प्रोटेक्शन मनी’ का कच्चा-चिट्ठा।

विशेष अदालत से रिमांड आदेश जारी होने के उपरांत सीबीआई के अधिकारी सौरभ चंद्राकर को कड़ी सुरक्षा के बीच माना विमानतल लेकर रवाना हो गये, जहां से विशेष सुरक्षा व्यवस्था के अंतर्गत उसे दिल्ली ले जाया जायेगा।