बिलासपुर में मालगाड़ी के इंजन पर बच्चों ने फेंका साईकिल का टायर, 25 हजार वोल्ट की ओवरहेड लाईन में भड़की भीषण आग, मचा हड़कम्प।

बिलासपुर : छत्तीसगढ़ के बिलासपुर रेल मंडल अंतर्गत उसलापुर और घुटकू रेल्वे स्टेशन के मध्य एक दिल दहला देने वाला मामला प्रकाश में आया है, जहाँ कुछ नाबालिगों की अत्यंत गैर-जिम्मेदाराना और जानलेवा शरारत के कारण समूचे रेल्वे प्रशासन में तीव्र हड़कंप मच गया। लोखंडी समपार फाटक के समीप स्थित ओवरब्रिज से गुजर रही एक तीव्र गति मालगाड़ी पर छह नाबालिग बच्चों ने साइकिल का पुराना टायर फेंक दिया। यह टायर सीधे मालगाड़ी के इलेक्ट्रिक इंजन की छत पर जा गिरा और 25 हजार वोल्ट क्षमता वाली हाईटेंशन ओवरहेड लाईन (ओएचई) तथा पेंटोग्राफ के सीधे संपर्क में आते ही भयंकर लपटों के साथ धू-धू कर जल उठा। हाईवोल्टेज करंट के घर्षण से आसमान में तीव्र चिंगारियां उठीं और एक भयानक धमाका हुआ। इंजन के केबिन में धमाके जैसी प्रचंड आवाज सुनते ही लोको पायलट ने असाधारण सतर्कता और त्वरित सूझबूझ का परिचय दिया। चालक ने बिना एक पल गंवाये आपातकालीन ब्रेक लगाकर मालगाड़ी को तत्काल रोक दिया, जिससे एक भीषण रेल विभीषिका टल गई। इस अप्रत्याशित घटना के कारण व्यस्त हावड़ा-मुंबई और कटनी रेल खंड पर ट्रेनों की आवाजाही ठप्प हो गई, जिससे अंबिकापुर एक्सप्रेस तथा अमरकंटक एक्सप्रेस सहित कई महत्वपूर्ण गाड़ियों का आवागमन घंटों तक बाधित रहा।

इंजन के पेंटोग्राफ पर गिरा टायर, हाईटेंशन लाईन से टकराते ही हुआ जोरदार धमाका :

प्राप्त आधिकारिक विवरण के अनुसार, यह रोंगटे खड़े कर देने वाली घटना मंगलवार, 3 नवंबर की प्रातः लगभग 6 बजे घटित हुई। मध्य प्रदेश के कटनी जंक्शन की ओर से चलकर बिलासपुर की ओर आ रही एक खाली मालगाड़ी जैसे ही लोखंडी समपार फाटक के ऊपर निर्मित सड़क पुल के नीचे से गुजरी, तभी पुल पर घात लगाये खड़े बच्चों ने भारी टायर नीचे फेंक दिया। टायर सीधे इंजन के शीर्ष पर लगे पेंटोग्राफ उपकरण और 25 केवी हाईटेंशन लाईन के संवेदनशील तारों में फंस गया। विद्युत प्रवाह के संपर्क में आते ही जोरदार स्पार्क हुआ और टायर में भयावह आग लग गई।

केबिन में मौजूद लोको पायलट और सहायक लोको पायलट ने तत्परता दिखाते हुये गाड़ी को नियंत्रित कर सुरक्षित रोक लिया। चालक दल ने नीचे उतरकर स्थिति का मुआयना किया तो इंजन की छत पर टायर का सुलगता हुआ मलबा फंसा दिखाई दिया। लोको पायलट ने बिना विलंब किये वाकी-टॉकी और अन्य संचार माध्यमों से रेल्वे कंट्रोल रूम को सूचना देकर ओएचई की विद्युत आपूर्ति अस्थाई रूप से बंद करवाई, जिससे आग इंजन के अन्य तकनीकी उपकरणों में फैलने से बच गई।

सीसीटीवी फुटेज के गहन विश्लेषण से पकड़े गये छह नाबालिग, आरपीएफ ने शुरू की जांच :

घटना की विभीषिका को देखते हुये बिलासपुर रेल मंडल के वरिष्ठ संरक्षा अधिकारियों, रेल्वे सुरक्षा बल (आरपीएफ) और राजकीय रेल्वे पुलिस (जीआरपी) की संयुक्त टीम तत्काल घटनास्थल पर रवाना की गई। तकनीकी विशेषज्ञों और जांच दल ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का मुआयना किया। प्राथमिक पड़ताल में यह स्पष्ट हो गया कि टायर ब्रिज के ऊपर से ही जानबूझकर फेंका गया था।

सड़क पुल और आसपास के क्षेत्र में संदिग्धों की पहचान सुनिश्चित करने के लिये व्यापक अभियान चलाया गया। राष्ट्रीय राजमार्ग एवं आसपास के क्षेत्र में स्थापित आधुनिक सीसीटीवी कैमरों के फुटेज खंगाले गये। इन कैमरों की रिकॉर्डिंग को पाली स्थित केंद्रीय मॉनिटरिंग सेंटर में तकनीकी विशेषज्ञों द्वारा बारीकी से देखा गया, जिसके आधार पर संदिग्ध दिख रहे छह नाबालिग लड़कों की स्पष्ट शिनाख्त हुई। पुख्ता साक्ष्य संकलित करने के उपरांत बुधवार, 4 नवंबर को आरपीएफ की विशेष टीम ने लोखंडी गांव में दबिश देकर सभी छह नाबालिगों को अपनी अभिरक्षा में ले लिया।

खाली वैगन में टायर डालकर निशाना लगाने का था उद्देश्य, खेल-खेल में हुआ बड़ा कांड :

आरपीएफ और बाल कल्याण अधिकारियों की उपस्थिति में की गई विस्तृत पूछताछ के दौरान नाबालिगों ने अपना अपराध स्वीकार कर लिया। बच्चों ने बताया कि उनका मुख्य उद्देश्य मालगाड़ी के खुले और खाली वैगन के भीतर टायर फेंककर निशाना लगाने का था। वे इसे एक सामान्य खेल समझ रहे थे, लेकिन उनका निशाना चूक गया और टायर खाली डिब्बे में गिरने के बजाय सीधे आगे चल रहे इंजन की छत और विद्युत लाईन के तारों पर जा गिरा।

विद्युत ऊर्जा के प्रचंड घर्षण से तत्काल आग भड़क उठी, जिसे देखकर सभी लड़के भयभीत होकर मौके से भाग खड़े हुये थे। पकड़े गये सभी छह बच्चे लोखंडी ग्रामीण क्षेत्र के ही निवासी बताये गये हैं। रेल्वे प्रशासन द्वारा नाबालिगों के विरुद्ध रेल्वे सुरक्षा अधिनियम की सुसंगत धाराओं के तहत कठोर विधिक कार्यवाही सुनिश्चित की जा रही है, साथ ही उनके अभिभावकों को भी तलब किया गया है।

कई महत्वपूर्ण यात्री ट्रेनों का चक्का रहा ठप्प, यात्रियों को हुई भारी परेशानी :

लोखंडी फाटक के निकट मालगाड़ी के आपात स्थिति में खड़े हो जाने के कारण अप और डाउन दोनों ट्रैकों पर सुरक्षा कारणों से यातायात पूरी तरह ठप्प कर दिया गया। इस मार्ग से गुजरने वाली प्रमुख यात्री गाड़ियों, विशेष रूप से अंबिकापुर एक्सप्रेस और अमरकंटक एक्सप्रेस को आउटर सिग्नलों और निकटवर्ती स्टेशनों पर आकस्मिक रूप से रोकना पड़ा।

रेल्वे के तकनीकी दस्ते (ओएचई मेंटेनेंस टीम) द्वारा इंजन की छत से जले हुये रबर के टुकड़ों और तारों के मलबे को सावधानीपूर्वक हटाया गया। जब तकनीकी निरीक्षकों द्वारा ट्रैक और ओवरहेड लाईन को पूर्णतः सुरक्षित घोषित कर क्लीयरेंस दी गई, तब लगभग आधे घंटे के विलंब से मालगाड़ी को आगे के लिये रवाना किया जा सका। इसके पश्चात ही दोनों यात्री रेलगाड़ियों को हरी झंडी दिखाकर गंतव्य के लिये रवाना किया गया और रेल यातायात सामान्य हो सका।

25 हजार वोल्ट की लाईन पर बाहरी वस्तु का गिरना अत्यंत घातक : सुरक्षा पर उठे सवाल

रेल्वे संरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि रेल्वे की ओवरहेड विद्युत लाईन में अत्यंत घातक और उच्च क्षमता का 25,000 वोल्ट करंट प्रवाहित होता है। ऐसे में किसी बाहरी वस्तु, विशेषकर रबर, प्लास्टिक या धातु के संपर्क में आने से न केवल पेंटोग्राफ टूट सकता है, बल्कि इंजन में भयंकर विस्फोट होने, पूरी विद्युत आपूर्ति ठप्प होने तथा तीव्र गति से चल रही ट्रेन के पटरी से उतरने (डिरेलमेंट) की प्रबल आशंका बन जाती है।

यदि उस समय लोको पायलट तनिक भी असावधानी बरतता या गति को नियंत्रित न करता, तो पीछे आ रही यात्री ट्रेनें भी इस तकनीकी व्यवधान की चपेट में आ सकती थीं। इस गंभीर घटना ने रेल्वे ओवरब्रिजों पर सुरक्षा जालियों (प्रोटेक्शन मेश) के अभाव, गश्त की कमी और ग्रामीण क्षेत्र के बच्चों में रेल्वे संपत्ति की संरक्षा के प्रति जागरूकता की भारी कमी को उजागर कर दिया है। रेल्वे अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि भविष्य में ऐसी घातक पुनरावृत्ति रोकने के लिये पटरियों के आसपास जन-जागरूकता अभियान चलाये जायेंगे और पुलों पर अतिरिक्त सुरक्षा उपाय सुनिश्चित किये जायेंगे।