रायपुर : कुत्तों के काटने के बाद एंटी रेबिज वैक्सीन लगवाने में बिल्कुल भी देर नहीं करनी चाहिये, खास कर ठंड का मौसम आते ही कुत्तों के काटने के मामले बढ़ जाते है, ऐसे में यदि किसी को कुत्ता काट ले तो तुरंत उस घाव अच्छे से धो लें और साफ़ करें, इसके साथ ही तुरंत रैबीज का इंजेक्शन लगवायें। वहीँ अब प्रदेश में कुत्तों के काटने (डॉग बाइट) के मामले थम नहीं रहे हैं, लेकिन सरकारी अस्पतालों में एंटी रैबीज वैक्सीन का टोटा लोगों की जान पर भारी पड़ रहा है। हालत यह है कि न तो सीजीएमएससी के पास स्टॉक है और न ही जिला अस्पतालों के पास डोज, ऐसे में पीड़ितों के लिये बड़ी मुसीबत खड़ी हो गई है।
राजधानी रायपुर, दुर्ग, बिलासपुर, गरियाबंद, महासमुंद, धमतरी सहित अधिकांश जिलों के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, शहरी स्वास्थ्य केंद्र और हमर अस्पतालों में एंटी रैबीज वैक्सीन का अभाव है, जो वहां के लोगों के लिये मुश्किल में डालने वाला है। मजबूरी में मरीजों को निजी मेडिकल स्टोर्स से महंगे दामों पर टीका खरीदना पड़ रहा है।
बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में कुत्तों की बढ़ रही संख्या पर अंकुश लगाने के निर्देश दिए हैं। जिससे डॉग बाइट की संख्या कम हो। इसके बावजूद स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही कम नहीं हुई है। सीएमएचओ स्थानीय खरीदी के लिए बजट न होने की बात कह रहे हैं, तो सीजीएमएससी के अधिकारी टेंडर प्रक्रिया जारी है कहकर जिम्मेदारी टाल रहे हैं।
प्रदेश में एंटी रेबिज वैक्सीन की स्थिति
| जिला | औसत दैनिक मरीज | उपलब्ध एंटी-रेबीज डोज |
|---|---|---|
| रायपुर | 50 रोज | 60 डोज |
| दुर्ग | 70 रोज | 200 डोज |
| बिलासपुर | 25 रोज | 230 डोज |
| महासमुंद | 35 रोज | 110 डोज |
| बेमेतरा | 30 रोज | 80 डोज |
| जगदलपुर | 24 रोज | 19,200 डोज |
| कांकेर | 15 रोज | 700 डोज |
रोजाना 50–60 नए डॉग बाइट के केस, वैक्सीन सिर्फ एक अस्पताल में :
रायपुर में अब भी रोज 50 से 60 नए डॉग बाइट के मरीज आ रहे हैं, लेकिन अंबेडकर अस्पताल को छोड़कर किसी भी सरकारी अस्पताल में वैक्सीन नहीं है। ऐसे में मरीजों को निजी अस्पतालों और मेडिकल दुकानों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।
दुर्ग में रोज 70 मरीज, डोज सिर्फ 200 :
दुर्ग जिले में प्रतिदिन करीब 70 मरीज पहुंच रहे हैं, जबकि जिले में केवल 200 डोज शेष हैं। स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी भी मानते हैं कि यह ऊंट के मुंह में जीरे जैसा स्टॉक है, जो कुछ ही दिनों में खत्म हो जायेगा। ऐसे में यहाँ के लोगों के लिये भी बड़ी मुसीबत खड़ी हो रही है।
जिला अस्पताल पंडरी :
जिला अस्पताल पंडरी के इंजेक्शन कक्ष में जब देखा गया तो वहां रैबीज वैक्सीन के लिए मरीजों की पूछताछ लगातार जारी थी। टीम ने जब स्टॉफ से टीका लगाने की बात कही, तो उन्होंने बताया कि पिछले कई दिनों से एंटी रैबीज वैक्सीन का स्टाक खत्म है। आपूर्ति कब होगी, इसकी उन्हें कोई जानकारी नहीं दी गई है। कई मरीज रोज लौट रहे हैं और कुछ निजी मेडिकल से महंगा टीका खरीदने मजबूर हैं।
हमर अस्पताल मठपुरैना :
हमर अस्पताल मठपुरैना में तो इंजेक्शन रूम के बाहर मरीजों की काफी भीड़ थी। वहीँ जब अस्पताल में एक व्यक्ति एंटी रैबीज का टीका लगवाने आया था, लेकिन स्टॉफ ने बताया कि अस्पताल में अब सिर्फ 20 डोज शेष हैं। उनका कहना था कि ये डोज अधिकतम दो दिन में खत्म हो जाएंगे। पिछले सप्ताह से ही अस्पताल में वैक्सीन की किल्लत बनी हुई है और मरीजों को निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ रहा है।
एक ही ब्रांड की वैक्सीन क्यों जरूरी है?
रैबीज वैक्सीन के बाजार में कई ब्रांड नाम से उपलब्ध हैं. हालांकि इनका उद्देश्य एक ही है, लेकिन हर ब्रांड की वैक्सीन की कम्पोज़िशन, मैन्युफैक्चरिंग प्रोसेस और इम्यून रिस्पॉन्स में हल्का अंतर हो सकता है। यही कारण है कि विशेषज्ञ एक ही ब्रांड की वैक्सीन का पूरा कोर्स लेने की सलाह देते हैं। जब मरीज पूरा शेड्यूल एक ही ब्रांड से पूरा करता है, तो शरीर में लगातार और स्थिर एंटीबॉडी बनती रहती हैं। अगर बीच में ब्रांड बदल दिया जाए, तो इम्यून सिस्टम को वायरस से लड़ने में दिक्कत आ सकती है और वैक्सीन का असर अधूरा रह सकता है। इससे शरीर में पर्याप्त सुरक्षा नहीं बन पाती और रैबीज जैसी खतरनाक बीमारी का जोखिम बना रहता है। इसलिए डॉक्टर आमतौर पर मिक्सिंग से बचने की सलाह देते हैं और कहते हैं कि शुरुआती डोज जिस ब्रांड से शुरू हो, उसी से पूरा कोर्स करना चाहिए। ऐसे में ज़रा सी लापरवाही जानलेवा साबित हो सकती है।



