रायपुर : वर्तमान ने शांत छत्तीसगढ़ की तरफ सबकी नजरें जमी हुई है, राजधानी में जहाँ एक तरफ अपराध लगातार बढ़ रहा है तो यहाँ अब अंतर्राष्ट्रीय आतंकी अपने कार्यों को अंजाम देने में लगे हुये है। मामला है राजधानी में आतंकवाद विरोधी दस्ते (एटीएस) ने अब तक की सबसे बड़ी डिजिटल आतंकी साजिश का खुलासा किया है। यह पहला मामला है जिसमें इस्लामिक स्टेट आप इराक एंड सीरिया (ISIS) का पाकिस्तान-आधारित माड्यूल प्रदेश के किशोरों को सोशल मीडिया, खासकर इंस्टाग्राम के जरिए कट्टरपंथ की ओर धकेल रहा था। वर्ष 2017 में एटीएस गठन के बाद यह पहली एफआइआर है, जो सीधे आतंकी गतिविधियों से जुड़ी हुई है। पकड़े गए दोनों नाबालिग लगभग दो वर्षों से आइएसआइएस के संपर्क में थे और त्यौहारों के दौरान हिंसा फैलाने की साजिश कर रहे थे। इस बड़े खुलासे से राजधानी के लिये चिंताजनक स्थिति खड़ी कर दी है।
जानकारी के अनुसार पाकिस्तान-आधारित आइएसआएस माड्यूल इंस्टाग्राम के माध्यम से भारतीय किशोरों को कट्टरपंथी विचारधारा की ओर धकेलने की कोशिश कर रहा था। एटीएस ने देर रात यूएपीए के तहत अपराध दर्ज कर दो किशोरों को गिरफ्तार किया है। एक आरोपी 16 वर्षीय जो कि रायपुर के संतोषी नगर क्षेत्र का रहने वाला है। उसके पिता सेंट्रल फोर्स में कार्यरत हैं। वहीं, दूसरा आरोपी 15 वर्षीय जो भिलाई का रहने वाला है। दोनों किशोर मुस्लिम समुदाय से हैं। दिल्ली में धमाके के बाद से ही लगातार सोशल मीडिया पर निगरानी रखी जा रही थी, जिसके बाद इनकी गिरफ्तारी की गई है।
जिहादी मार्ग अपनाने के लिए प्रेरित किया :
इस मामले की जांच में सामने आया है कि पाकिस्तानी हैंडलर फर्जी इंस्टाग्राम अकाउंट बनाकर भारतीय युवाओं से संपर्क स्थापित कर रहे थे। सामान्य दिखने वाले इन अकाउंट्स का उद्देश्य किशोरों को धीरे-धीरे गुप्त चैट समूहों में जोड़ना था। इन समूहों में उन्हें लगातार जिहादी वीडियो, उग्र भाषण, भारत-विरोधी संदेश और आइएसआएस समर्थित सामग्री भेजी जा रही थी। एटीएस के अनुसार यह प्रक्रिया पूरी तरह योजनाबद्ध थी, जिसका उद्देश्य किशोरों की मानसिकता को प्रभावित कर उन्हें जिहादी मार्ग अपनाने के लिए प्रेरित करना था। इस खुलासे से केन्द्रीय एजेंसियों सहित स्थानीय प्रशासन भी मुस्तैद हो गया है।
इंस्टाग्राम से फैल रहा था जिहादी जहर :
एटीएस की जांच में सामने आया है कि पाकिस्तान से संचालित आइएसआइएस माड्यूल फर्जी और छद्म नाम से इंस्टाग्राम अकाउंट चलाता था। ये अकाउंट देखने में धार्मिक या मोटिवेशनल लगे, ऐसा डिजाइन किया जाता था। जिसे विदेशी हैंडलर पहले किशोरों से सामान्य चैट करते थे, फिर उन्हें गुप्त ग्रुप चैट में जोड़ते थे। इस ग्रुप में उग्र और भड़काऊ सामग्री, जिहादी साहित्य और वीडियो, आइएसआइएस समर्थित प्रोपेगेंडा, भारत-विरोधी संदेश, धार्मिक उन्माद बढ़ाने वाली पोस्ट होते थे। एटीएस के अनुसार संपर्क बढ़ने के साथ किशोरों को धीरे-धीरे कट्टरपंथी विचारधारा की ओर मोड़ा जाता था। उन्हें यह समझाया जाता था कि जिहाद का रास्ता ही असल धार्मिक मार्ग है। जिससे धीरे – धीरे युवा इनके बहकावे में आते जा रहे थे।
मोबाईल में मिले संवेदनशील स्थानों के नक्शे :
गिरफ्तार किशोरों के मोबाईल फोन एवं लैपटाप से कई अहम जानकारी हाथ लगी है। जांच टीम को ऐसे नक्शे और लोकेशन मार्किंग मिली हैं, जिनमें देश के विभिन्न क्षेत्रों में स्थित संवेदनशील स्थान चिह्नित किये गये हैं। माना जा रहा है कि इन्हें पाकिस्तानी हैंडलरों ने भेजा था। इसके साथ ही त्यौहारों के समय धार्मिक उन्माद फैलाने के निर्देश, अपने जैसे विचार वाले युवाओं को जोड़ने का आदेश, छद्म नाम से नई आईडी बनाकर संपर्क बढ़ाने के संदेश, फिदायीन बनने के लिए उकसाने वाले वीडियो भी शामिल हैं। सूत्रों के अनुसार, आतंकी संगठन किशोरों का फिदायीन इस्तेमाल करने की तैयारी में था, जिसे समय रहते रोक लिया गया है। इस तरह से पाकिस्तानी आतंकी संगठन देश में लगातार ऐसे ही लोगों को खड़ा कर रहे है, जो उनके लिये ऐसी घटनाओं को अंजाम दे सकें।
दो साल पुराना संपर्क, ऑनलाईन कोर ग्रुप भी बनाया :
इस मामले में चौंकाने वाले खुलासे हुये है, जिनमें दोनों किशोरों को पाकिस्तान से लगातार संदेश मिलते थे, जिन्हें वे आगे अपने साथियों तक पहुंचाते थे। इस सिलसिले में एक आनलाइन कोर ग्रुप भी बनाया गया था, जिसमें देश के अन्य राज्यों के युवाओं को भी जोड़ने के प्रयास हुए। एटीएस की टीम ने करीब एक हजार से अधिक सोशल मीडिया अकाउंट की जांच की है। इसी निगरानी के दौरान दोनों किशोरों के नाम सामने आए। उनके इंस्टाग्राम चैट बैकअप, ब्राउजिंग इतिहास, वर्चुअल प्राक्सी और विदेशी अकाउंट संपर्क का विश्लेषण कर पूरी साजिश उजागर हुई है, जिससे राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा हो सकता था।
भिलाई और टिकरापारा से पकड़े गए दोनों किशोर :
एटीएस ने रविवार को कार्यवाही करते हुए एक किशोर को भिलाई और दूसरे को रायपुर के टिकरापारा क्षेत्र से पकड़ा है। दोनों के आइपी एड्रेस ट्रेस किए गए थे। पूछताछ में किशोरों ने स्वीकार किया कि वे लंबे समय से जिहादी वीडियो, संदेश और आतंकी संगठन आइएसआइएस की प्रचार सामग्री प्राप्त कर रहे थे। एटीएस ने उनके विरुद्ध यूएपीए के तहत मामला दर्ज करने के साथ-साथ काउंसलिंग भी करवाई है, ताकि उनसे जुड़े अन्य पहलुओं की जानकारी मिल सके।
आगे और गिरफ्तारियां संभव हो सकती है :
किशोरों की पूछताछ में कुछ और नाम सामने आए हैं, जिनके सोशल मीडिया अकाउंट की जांच की जा रही है। एटीएस सूत्रों के मुताबिक आने वाले दिनों में आइएसआइएस नेटवर्क से जुड़े और लोगों को भी पकड़ा जा सकता है। मामले की गंभीरता को देखते हुए संभावना है कि राष्ट्रीय जांच एजेंसी भी इस प्रकरण में शामिल हो सकती है। जानकारी के अनुसार हैंडलरों ने किशोरों को छत्तीसगढ़ में आइएसआएस का लोकल नेटवर्क खड़ा करने के लिए उकसाया था। डिजिटल साक्ष्यों में इसके प्रमाण मिले हैं। साइबर मानिटरिंग और तकनीकी विश्लेषण के बाद एटीएस ने दो नाबालिगों की पहचान की जो विदेशी हैंडलरों के संपर्क में आ चुके थे। एटीएस का कहना है कि समय रहते कार्यवाही से राज्य में बड़ा आतंकी खतरा टल गया है।



