धर्म रक्षा संघ में बोलीं नाजिया इलाही खान : मुगलों ने जितने भी मंदिर तोड़ मस्जिद बनाई सभी वापस चाहिये।

मथुरा (उ.प्र.) : तीन तलाक के कानून में नाजिया इलाही खान का महत्वपूर्ण योगदान रहा है, जिसने मुस्लिम महिलाओं के जीवन स्तर में सुरक्षा भावना को मजबूत किया है। वर्तमान में नाजिया इलाही खान लगातार सुर्ख़ियों में बनी हुई है, कलकत्ता में इन पर मॉब लिंचिंग का प्रयास किया जा चुका है, इनकी उम्र लगभग 35 वर्ष है, ये लगातार मुस्लिम समुदाय के खिलाफ अपने बयान बेबाकी से रखती है और हिन्दू धर्म की प्रशंसा में महत्वपूर्ण और तथ्य आधारित पक्के तर्क रखती है, जिससे ये हमेशा मुस्लिम समुदाय के निशाने पर रहती है। वहीँ सुप्रीम कोर्ट की वकील नाजिया इलाही खान हाल ही में धर्मनगरी मथुरा पहुंचीं और उन्होंने यहां ‘धर्म रक्षा संघ’ द्वारा आयोजित एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम में भाग लिया। इस दौरान उन्होंने सनातन धर्म की रक्षा और देश में चल रहे मंदिर-मस्जिद विवाद पर बेहद तीखे और स्पष्ट बयान दिए, जिसने धार्मिक और राजनीतिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है।

इस कार्यक्रम को संबोधित करते हुए नाजिया इलाही ने संत समाज को धर्म की रक्षा की जिम्मेदारी अपने हाथ में लेने की भावुक अपील की है। उन्होंने उपस्थित साधु-संतों से मुखातिब होते हुए कहा कि सनातन की रक्षा के लिए अब उन्हें ही आगे आना होगा और इस पुण्य कार्य का नेतृत्व करना होगा। उन्होंने जोर देते हुए सवाल किया कि आखिर कब तक हिन्दू समाज सोया रहेगा?वकील इलाही ने इस मौके पर सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण बयान मंदिर वापसी को लेकर दिया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में अपनी मांग रखते हुए कहा कि हमें केवल कृष्ण जन्मस्थान ही नहीं चाहिए, बल्कि मुगलों ने जितने भी मंदिर तोड़कर मस्जिदें बनाई हैं, हमको वे सभी वापस चाहिए। उन्होंने इसे देश की सांस्कृतिक विरासत को पुनः स्थापित करने की लड़ाई बताया है।

इसके अलावा उन्होंने हाल ही में एक गौ रक्षक की गिरफ्तारी पर भी गहरा दुख और विरोध प्रकट किया और इसे धर्म-रक्षकों के खिलाफ अन्यायपूर्ण कार्यवाही करार दिया है। वहीँ नाजिया इलाही के इस दौरे और उनके तीखे बयानों ने मथुरा में एक नई बहस छेड़ दी है, जो सनातन और सांस्कृतिक विरासत की रक्षा के संकल्प पर केंद्रित है। इसके साथ ही आपको बता दें कि वह खुद को सनातनी मुस्लिम मुस्लिम कहती है, वहीँ बीते दिनों उन्होंने एक हिन्दू कलाकार पुनीत वशिष्ठ से शादी की थी जो कि चार-पांच महीनों से ज्यादा नहीं चल सकी।