राजनांदगांव : यह कई बार साबित हो चुका है कि लालच देकर, बीमारी ठीक करने के नाम और डर दिखाकर हिन्दुओं का धर्मान्तरण जबरन करवाया जाता है, वहीँ राज्य में लगातार जबरिया धर्मान्तरण के मामले सामने आते ही रहते है, अब चौंकाने वाला मामला खुला है। सामने आई जानकारी के अनुसार राजनांदगांव जिले में धर्मांतरण गतिविधियों से जुड़े एक गंभीर मामले में पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। यहाँ ग्राम धर्मापुर में आश्रम/चर्च संचालन, नाबालिग बच्चों को रखने और धर्मांतरण से संबंधित शिकायत के बाद शुरू हुई पुलिस जांच में ऐसे तथ्य सामने आए हैं, जो इस प्रकरण को केवल एक व्यक्ति तक सीमित न मानकर एक संगठित और बहु-जिला नेटवर्क की ओर संकेत करते हैं। दस्तावेजी व डिजिटल साक्ष्यों, महंगे तकनीकी उपकरणों और संदिग्ध वित्तीय लेन-देन ने इस मामले को और गंभीर बना दिया है। यह बहुत बड़ा नेटवर्क है, जिसका खुलासा हुआ है।
इस मामले में राजनांदगांव पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, 08 जनवरी 2026 को थाना लालबाग अंतर्गत पुलिस चौकी सुकुलदेहन में एक लिखित शिकायत प्राप्त हुई थी। शिकायत में ग्राम धर्मापुर में एक व्यक्ति द्वारा आश्रम/चर्च संचालन, नाबालिग बच्चों को रखने तथा कथित रूप से धर्मांतरण से जुड़ी गतिविधियों की जानकारी दी गई थी। इस मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक अंकिता शर्मा के निर्देशन में एवं नगर पुलिस अधीक्षक वैशाली जैन के पर्यवेक्षण में तत्काल जांच प्रारंभ की गई। इस शिकायत के आधार पर पुलिस द्वारा आरोपी डेविड चाको के विरुद्ध छत्तीसगढ़ धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम की धारा 3, 4 एवं 5 के अंतर्गत अपराध पंजीबद्ध कर विवेचना शुरू की गई। प्रारंभिक जांच में पुलिस को कई ऐसे तथ्य मिले हैं, जिन्होंने इस प्रकरण की गंभीरता को और बढ़ा दिया है। अब इस मामले में पुलिस ने कार्यवाही का दायरा बढ़ा लिया है।
दस्तावेजों से संगठित गतिविधियों के संकेत :
मामले की विवेचना के दौरान पुलिस ने आरोपी से संबंधित कई दस्तावेज, अभिलेख, रजिस्टर एवं अन्य सामग्री जब्त की है। इनका प्रारंभिक परीक्षण किए जाने पर यह संकेत मिले हैं कि कथित गतिविधियां सुनियोजित और संगठित तरीके से संचालित की जा रही थीं। वहीँ इस मामले में पुलिस का मानना है कि इन गतिविधियों में अन्य लोगों की भूमिका भी हो सकती है, जिनकी पहचान और भूमिका की जांच की जा रही है।
कई जिलों तक फैले नेटवर्क की आशंका :
मामले की जांच में यह तथ्य भी सामने आया है कि कथित गतिविधियों से जुड़ा नेटवर्क छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों तक फैला हो सकता है। प्रारंभिक स्तर पर कई व्यक्तियों की संलिप्तता के संकेत मिले हैं। पुलिस द्वारा ऐसे सभी संदिग्ध व्यक्तियों को विधि अनुसार नोटिस जारी कर पूछताछ हेतु तलब किया जा रहा है, ताकि उनके आपसी संबंधों और गतिविधियों की विस्तृत जानकारी प्राप्त की जा सके। सभी से आवश्यक जानकारी जुटाई जा रही है।
डिजिटल साक्ष्य बने जांच की अहम कड़ी :
मामले की विवेचना के दौरान पुलिस ने बड़ी मात्रा में डिजिटल साक्ष्य भी जब्त किए हैं। इनमें लैपटॉप, टैबलेट, आई-पैड एवं मोबाइल फोन शामिल हैं। पुलिस के अनुसार, इन इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में उपलब्ध डिजिटल दस्तावेज, डेटा एवं प्रेजेंटेशन सामग्री से कई अहम जानकारियां सामने आई हैं। इन साक्ष्यों का तकनीकी विश्लेषण विशेषज्ञों द्वारा किया जा रहा है। जिसके बाद और बड़े खुलासे हो सकते है।
हजारों डॉलर के सोलर प्रोजेक्टर बरामद :
पुलिस ने जांच के दौरान सोलर-आधारित प्रोजेक्टर भी जब्त किए हैं, जिनकी अनुमानित कीमत हजारों डॉलर बताई जा रही है। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, इस प्रकार के उपकरण सामान्यतः उन दूरस्थ क्षेत्रों में उपयोग किए जाते हैं, जहां बिजली की सुविधा उपलब्ध नहीं होती है। इन उपकरणों की बरामदगी से जांच को एक नई और अहम दिशा मिली है, जिससे मामले को और गहराई से हल किया जा सकता है। पुलिस अब इस पूरे मामले से जुड़े वित्तीय लेन-देन और धन के स्रोतों की भी गहन पड़ताल कर रही है। यह जानने का प्रयास किया जा रहा है कि आश्रम/चर्च संचालन के लिए धन कहां से प्राप्त हो रहा था, उसके स्रोत क्या थे और क्या इसके पीछे किसी अन्य अवैध या संगठित गतिविधि का कोई संबंध है।
इस मामले में एसपी अंकिता शर्मा ने स्पष्ट किया है कि इस पूरे प्रकरण की विवेचना निष्पक्षता, पारदर्शिता एवं विधिक प्रावधानों के अनुरूप की जा रही है। जांच में जो भी तथ्य एवं साक्ष्य सामने आएंगे, उनके आधार पर कठोर एवं विधिसम्मत कार्यवाही सुनिश्चित की जायेगी। आपको बता दें कि राज में हर जगह धर्मान्तरण का कार्य चरम पर है, जिसको लेकर कई विवाद लगातार सामने आ रहे है।



