अश्लील सीडी काण्ड का भूत 9 साल बाद आया बाहर,  CBI कोर्ट ने रद्द किया निचली अदालत का फैसला।

रायपुर : जब राज्य मे अश्लील सीडी काण्ड का मामला सामने आया था, तब उस मामले में काफी बवाल हुआ था, राज्य की राजनीति में हलचल लाने वाले वर्ष 2017 के बहुचर्चित ‘सेक्स सीडी’ मामले में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की मुश्किलें फिर से बढ़ती हुई नजर आ रही हैं। रायपुर स्थित विशेष सीबीआई अदालत ने शनिवार को फैसला सुनाते हुए निचली अदालत के उस आदेश को रद कर दिया है, जिसमें बघेल को इस मामले से दोषमुक्त (डिस्चार्ज) कर दिया गया था। सेशन कोर्ट ने सीबीआई की रिव्यू याचिका मंजूर की है। पूर्व मुख्यमंत्री बघेल सहित सभी आरोपियों के खिलाफ मुकद्दमा चलेगा। उस समय उस वायरल हुई सीडी को कुछ लोगों ने असली बताया था तो कुछ लोगों ने नकली, हालाँकि वह सीडी असली थी या नकली यह सच कभी सामने नहीं आ पायेगा।

वहीँ अब मामला है विशेष सीबीआई न्यायाधीश ने 24 जनवरी 2026 को दिए अपने आदेश में स्पष्ट किया कि मजिस्ट्रेट कोर्ट द्वारा वर्ष 2024 में बघेल को डिस्चार्ज करने का निर्णय कानून सम्मत नहीं था। इस फैसले के साथ ही अब पूर्व मुख्यमंत्री के खिलाफ इस मामले में फिर से न्यायिक प्रक्रिया शुरू होगा। साथ ही, कोर्ट ने मामले के अन्य आरोपियों में कैलाश मुरारका, विनोद वर्मा और विजय भाटिया द्वारा आरोप तय किए जाने के खिलाफ दायर अपीलों को भी खारिज कर दिया गया है। इन सभी की मुश्किलें बढ़ सकती है। आपको बता दें कि सीडी काण्ड के पहले कैलाश मुरारका भाजपा नेता था और इस काण्ड के बाद जब सत्ता बदल बदल गई तब राजनैतिक कारणों से वह कांग्रेस में आ गया।

क्या है पूरा मामला?

यह विवाद अक्टूबर 2017 का है, जब तत्कालीन भाजपा सरकार में लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) मंत्री राजेश मूणत की एक कथित आपत्तिजनक सीडी सार्वजनिक हुई थी। इस मामले में उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद से पत्रकार और पूर्व सीएम बघेल के मीडिया सलाहकार रहे विनोद वर्मा को गिरफ्तार किया गया था, जिनके पास से पुलिस ने सीडी की 500 प्रतियां बरामद करने का दावा किया था। आरोप था कि यह वीडियो कूटरचित था और इसे मंत्री की छवि धूमिल करने के उद्देश्य से प्रसारित किया गया था।

पूर्व मुख्यमंत्री बघेल सहित 6 आरोपी :

तत्कालीन समय में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष रहे भूपेश बघेल पर इस सीडी को बांटने और षड्यंत्र रचने के आरोप लगे थे, जिसके चलते उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भी रहना पड़ा था। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए इसकी जांच सीबीआई को सौंपी गई थी। सीबीआई ने अपनी चार्जशीट में भूपेश बघेल सहित छह लोगों को आरोपी बनाया था। लंबे समय तक चली कानूनी प्रक्रिया के बाद 2024 में एक राहत के रूप में बघेल को डिस्चार्ज मिला था, जिसे अब उच्चतर अदालत ने पलट दिया है।

अक्टूबर 2017 में हुई थी मामले की शुरुआत :

इस मामले की शुरुआत अक्टूबर 2017 में हुई थी, जब छत्तीसगढ़ में कथित सेक्स सीडी सामने आई। शिकायत के अनुसार, सीडी बनाने का काम दिल्ली में हुआ था और इसमें भूपेश बघेल के मीडिया सलाहकार विनोद वर्मा का नाम आया था। वहीँ इस मामले को लेकर भाजपा नेता प्रकाश बजाज ने 26 अक्टूबर 2017 को पंडरी थाने में FIR दर्ज कराई थी, जिसमें उन्होंने ब्लैकमेलिंग, अश्लील वीडियो का हवाला देकर पैसे की मांग का आरोप लगाया था। इसके बाद पुलिस और CBI ने दिल्ली की एक दुकान तक ट्रेस किया, जिससे वर्मा और अन्य आरोपी सामने आए। इस मामले के एक अन्य आरोपी रिंकू खनूजा ने केस सामने आने के बाद आत्महत्या कर ली थी।

सेशन कोर्ट के फैसले के बाद, भूपेश बघेल और अन्य आरोपियों के खिलाफ ट्रायल शुरू होगा। राजनीतिक और कानूनी नजरिए से यह मामला राज्य की राजनीति और चुनावी रणनीतियों पर भी असर डाल सकता है।