बिलासपुर : आम आदमी सेलिब्रिटी बनना चाहता है, जबकि सेलिब्रिटी अकेलेपन और सुकून की जिन्दगी चाहता है, जिसको जो मिलता है वो उसमें खुश नहीं रहता, ऐसे में कुछ बड़े वर्ग के लोग सुकून की खोज में रहते है है, ऐसे ही न्यायधानी बिलासपुर ने इस बार एक ऐसा दौरा देखा, जो बिना शोर-शराबे के गहरी छाप छोड़ गया है। यहाँ क्रिकेट के दिग्गज व भारत रत्न सचिन तेंदुलकर का परिवार गुपचुप तरीके से शहर पहुंचा और सीधे ग्रामीण अंचलों का रुख किया। उन्होंने होटल से लेकर आदिवासी गांवों और स्वास्थ्य केंद्रों तक, इस दौरे में बिल्कुल दिखावा नहीं किया। सिर्फ जमीनी हकीकत को समझने का प्रयास साफ नजर आया, जिसने इसे खास बना दिया।
वहीँ इस मामले में जानकारी मिली है कि मंगलवार सुबह करीब साढ़े पांच बजे बिलासपुर पहुंचे सचिन तेंदुलकर के परिवार ने पूरे दौरे को गोपनीय रखा था। इसमें सचिन की पत्नी डाॅ.अंजली तेंदुलकर, बेटी सारा तेंदुलकर और बहू सानिया चांडोक भी शामिल रहीं। वे शहर के मंगला स्थित कोर्टयार्ड मैरियट होटल में ठहरे। कुछ ही घंटों बाद उनका काफिला लोरमी स्थित अचानकमार क्षेत्र के छपरवा-बम्हनी गांव पहुंचा, जहां उन्होंने पैदल भ्रमण कर ग्रामीणों के बीच समय बिताया।
इस दौरान उन्होंने गांव में बच्चों के साथ खेलना, नवजात को गोद में लेना और स्थानीय लोगों से सहज संवाद किया, इस दौरे की ये खास झलक रही। वहीँ परिवार ने ग्रामीण जीवनशैली, जरूरतों और समस्याओं को करीब से समझने की कोशिश की। बुधवार सुबह उन्होंने गनियारी जनस्वास्थ्य केंद्र का दौरा कर स्वास्थ्य सेवाओं की वास्तविक स्थिति का जायजा लिया, उन्होंने गाँव घूमा।
इसके साथ ही उन्होंने डाॅक्टरों और स्टाफ से चर्चा कर उपलब्ध सुविधाओं और चुनौतियों की जानकारी ली। इस दौरान सचिन तेंदुलकर फाउंडेशन के तहत चल रहे कार्यों का निरीक्षण भी किया गया। फुलवारी केंद्र और उप स्वास्थ्य केंद्र में बच्चों के पोषण, शिक्षा और चिकित्सा व्यवस्था को करीब से समझा गया।
बच्चों के साथ बिताया स्नेह भरा समय :
गांव पहुंचते ही तेंदुलकर परिवार बच्चों के बीच घुल-मिल गया। उन्होंने बच्चों को खिलौने देना, उनके साथ खेलना और बातचीत करना इस दौरे की सबसे भावुक तस्वीर रही। वहीँ सारा तेंदुलकर का एक आदिवासी बच्चे को गोद में लेकर दुलार करना लोगों के बीच चर्चा का विषय बना रहा। इस आत्मीय जुड़ाव ने ग्रामीणों के दिलों में खास जगह बना ली। सोशल मीडिया पर अब यह फोटो खूब प्रसारित भी हो रहा है। इनके द्वारा इन छुट्टियों को बिताना काफी उत्साह भरा रहा है।
स्वास्थ्य सेवाओं की जमीनी हकीकत जानी :
गनियारी प्राइमरी हेल्थ सेंटर में परिवार ने डाॅक्टरों के साथ बैठक कर स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति पर चर्चा की। उन्होंने देखा कि ग्रामीण क्षेत्रों में कौन-कौन सी सुविधाएं उपलब्ध हैं और किन चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए जमीनी स्तर पर समझ विकसित करने की यह कोशिश अहम मानी जा रही है। इसके साथ ही सचिन तेंदुलकर फाउंडेशन के तहत संचालित गतिविधियों का भी निरीक्षण किया गया। फुलवारी केंद्र में बैगा बच्चों के पोषण और शिक्षा की स्थिति को समझा गया। जन स्वास्थ्य समिति द्वारा संचालित कार्यक्रमों की जानकारी ली गई, जो वनांचल के गांवों में निश्शुल्क स्वास्थ्य और शिक्षा सेवाएं उपलब्ध कराते हैं। यह पहल ग्रामीण विकास की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
बेहद गोपनीय रहा दौरा :
इस पूरे दौरे की सबसे खास बात इसकी गोपनीयता रही। न कोई पूर्व सूचना, न सार्वजनिक कार्यक्रम। फिर भी हर पड़ाव पर उद्देश्य स्पष्ट रहा। अचानक हुए इस दौरे ने प्रशासन और स्थानीय लोगों को भी चौंका दिया। उनके द्वारा बिना किसी औपचारिकता के किया गया यह भ्रमण जमीनी सच्चाई को समझने का सशक्त उदाहरण बनकर सामने आया। किसी को इसकी भनक तक नहीं लगी।
अचानकमार टाइगर रिजर्व प्रबंधन वैसे तो सतर्क होने का दावा करता है, लेकिन सचिन का परिवार शिवतराई, अचानकमार व छपरवा समेत चार बेरियर पार कर बम्हनी गांव पहुंचा। वहां स्थानीय ग्रामीणों से जानकारी ली गई। कुछ पल उनके साथ गुजारे और लौट आये। हैरानी की बात यह है कि इस परिवार के पहुंचने की जानकारी एटीआर प्रबंधन को नहीं हुई। इस तरह तेंदुलकर परिवार ने अपना और गाँव के लोगों का समय खुशियों के पल में बदल दिया।



