रायपुर (छ.ग.) : बुद्ध पूर्णिमा के अवसर पर साहित्यकार लेखक शिव ग्वालानी और रायपुर नगर निगम की अपील समिति सदस्य रही पूर्व पार्षद कविता ग्वालानी ने होली हाईनेस दलाई लामा से कांगड़ा के मेक्लियाड गंज( हिमाचल प्रदेश) स्थित दलाईलामा हाऊस में आत्मीयता भरी मुलाकात की।
लेखक शिव ग्वालानी ने बताया की मेक्लियाड गंज में हिज हाईनेस दलाई लामा जी से मुलाकात में उन्होंने हिज हाईनेस दलाई लामा जी को बताया की उन्होंने अपनी किताब” दास्तानें कश्मीर “में तिब्बत की प्रसिद्ध लेखिका ब्लाटवस्की के बारे में प्रचलित लोक कथा के बारे में विस्तार से लिखा है की कैसे यह धारणा प्रचलन में आई की ब्लाटवस्की *तुलकु “की अवस्था में पंहुच जाती थी और किताबें लिखती थी। ब्लाटवस्की किताबें तब लिख पाती थी जब महात्मा गौतम बुद्ध की आत्मा उसके शरीर में प्रवेश कर जाती थी और वो तुलकु बन जाती थी, तब वो किताबें लिखती थी।
लेखक शिव ग्वालानी ने अंग्रेजी भाषा की अपनी किताब” दास्तानें कश्मीर” में लिखी ईस लोक कथा को होली हाईनेस दलाई लामा जी को पढ़कर सुनाया जिसे सुनकर होली हाईनेस दलाई लामा जी भावुक हो गये।
उपन्यासकार शिव ग्वालानी ने बताया की उन्हें बताया गया था की होली हाईनेस दलाई लामा जी की उम्र 91 वर्ष है और उन्हें अंग्रेजी और हिंदी भाषा बहुत कम आती है। वे तिब्बती भाषा में ही बात करते हैं जिसे ऐक लामा और ऐक अधिकारी अनुवाद करके बताते हैं। लेखक ग्वालानी ने होली हाईनेस दलाई लामा जी को बताया की उनकी किताब दास्तानें कश्मीर अंग्रेजी भाषा में पूरी दुनियाँ में(वर्ल्ड वाईड) रिलीज़ होने वाली है जिसमें उन्होंने ब्लाटवस्की के बारे में लिखा है।
ग्वालानी ने होली हाईनेस दलाई लामा जी को बताया की उनकी पहली किताब मास्टर आफ नथिंग में लिखे कशमीरी संस्कृति के चेप्टर को पढ़कर जम्मू कश्मीर के तीन बार के मुख्यमंत्री रहे जनाब डाक्टर फारुख अब्दुल्ला जी छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर स्थित उनके घर आये थे और अब उन्होंने उस धटना क्रम को दास्तानें कश्मीर नाम से अलग से लिखा है जो अंग्रेजी और हिंदी भाषा में आने वाली है।
ऐक लामा सारी बातें अनुवाद करके होली हाईनेस दलाई लामा जी से कहता था। और उनकी तिब्बती भाषा में कही बात को अंग्रेजी भाषा में अनुवाद करके ग्वालानी दंपति को बताता था। लेखक के भविष्य में तिब्बत की राजधानी ल्हासा जाने की ईच्छा जताने पर होली हाईनेस दलाई लामा जी ने अपना आशीर्वाद दिया। ग्वालानी ने होली हाईनेस दलाई लामा जी को अपनी लिखी किताब मास्टर आफ नथिंग WD हिंदी भाषा की और दास्तान ऐ कश्मीर किताब अंग्रेजी भाषा की भेंट की जिसे होली हाईनेस दलाई लामा जी ने सहर्ष स्वीकार किया।
किताबें स्वीकार करते हुये होली हाईनेस दलाई लामा जी ने तिब्बती संस्कृति अनुसार हाथ जोड़कर सिर झुका कर लेखक दंपति का अभिवादन किया। साहित्यकार ग्वालानी दंपति ने भारतीय हिंदू संस्कृति अनुसार उनके चरण स्पर्श करके उन्हें प्रणाम किया। इस तरह से दो संस्कृतियों में भावुक मिलन हुआ, जिसे देखकर वहां सभागार में उपस्थित सभी लोग भावुक हो गये।
उपन्यासकार शिव ग्वालानी दंपति ने धरमशाला में प्रेम प्रकाश स्वर्ग आश्रम जा कर जयपुर के प्रसिद्ध संत सांई भगत प्रकाश जी से तिब्बत की राजधानी ल्हासा जाने के विषय पर चर्चा की और जानकारी ली। प्रेम प्रकाश आश्रम के संत श्री पांच वर्ष पूर्व तिब्बत की राजधानी ल्हासा जा चुके हैं और हिन्दू संस्कृति पर वहां व्याख्यान भी दिये हैं।



