आस्था, विश्वास या भ्रम, मां अंगार मोती की नाराजगी से बार-बार गिर रही सीलिंग, नहीं बन पा रहा शेड, सामने आई ये जानकारी….।

धमतरी : कई बार आस्था के ऐसे मामले सामन आ जाते है, जिसे दिमाग नहीं मानता, लेकिन आस्था उसे जरुर मानती है, आखिर कोई तो ऐसी ताकत है जो सृष्टि को चला रही है, वहीँ अब आपको बता दें कि छत्तीसगढ़ के धमतरी में गंगरेल बांध के तट पर विराजीं मां आदिशक्ति अंगार मोती आस्था का वह केंद्र हैं, जहां देश-विदेश से श्रद्धालु अपनी मन्नतें लेकर पहुंचते हैं। लेकिन पिछले डेढ़ महीने से इस पावन शक्तिपीठ में कुछ ऐसा रहस्यमयी घट रहा है, जिसने भक्तों और पुजारियों को हैरत में डाल दिया है। क्या देवी को आधुनिक निर्माण रास नहीं आ रहा? क्या मां को बंद छत की जगह खुला आसमान ही प्रिय है? आखिर ऐसी क्या वजह है कि पुजारियों को मंदिर का नवनिर्मित शेड हटाने पर मजबूर होना पड़ा है, यह सवाल आज हर कोई कर रहा है, आखिर ये क्या मामला है?

दरअसल, गंगरेल के घने जंगलों के बीच सदियों से खुले आसमान के नीचे मां अंगार मोती का दरबार सजता हुआ आया है। चैत्र नवरात्रि के दौरान भक्तों की सुविधा के लिए मंदिर परिसर में एक नया सीलिंग शेड लगाया गया था। यह शेड अब मंदिर समिति की यह सुविधा मां को रास नहीं आई है, ऐसा कहा जा रहा है, यहाँ शेड लगने के बाद से अब तक तीन बार सीलिंग के हिस्से अचानक नीचे गिर चुके हैं। इसको लेकर पुजारियों का दावा है कि मां अंगार मोती ने हमेशा खुले वन में रहना पसंद किया है।बिना देवी की अनुमति के यह निर्माण किया गया है, जिसके कारण लगातार अनहोनी हो रही है।

पुजारियों ने किया बड़ा दावा :

मंदिर के पुजारियों ने बताया है कि एक काले रंग का सांड अचानक प्रकट होता था और जलते हुए दीपकों को बुझाकर चला जाता था, वह कहाँ से आता था और कहाँ जाता था किसी को पता नहीं है, प्रार्थना के बाद ही यह सिलसिला थमा। मां ने सपने में दर्शन देकर स्पष्ट कह कि उन्हें खुले स्थान में रहना है। पहले भी जब मंदिर बनाने या छत डालने की कोशिश हुई, तब भी मां ने सपने में आकर मना किया था, वहीँ अब जब बिना पूछे शेड लगा दिया गया है, तो मां का क्रोध सीलिंग गिरने के रूप में सामने आ रहा है।

आस्था और विश्वास के इस केंद्र में अब पुजारियों ने शेड हटाने का फैसला ले लिया है। इस देवी की इच्छा का सम्मान करते हुए अब उस भारी भरकम शेड को हटाने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है। इसको लेकर पुजारी मानते हैं कि आधुनिकता से कहीं ऊपर देवी की अपनी मर्यादा और उनकी इच्छा है। मां अंगार मोती आदिकाल से घने जंगल में बिना छत के खुले आसमान में रहना पसंद करती हैं। इसके साथ ही बताया गया है कि मंदिर के पुजारियों के अनुसार, मंदिर की मूल मूर्ति 1937 में चोरी हो गई थी, लेकिन देवी माँ के पैर नहीं लिए जा सके। उस समय से भक्तों ने पैरों की पूजा जारी रखी और बाद में उनके पास एक नई मूर्ति स्थापित की गई। कई लोगों का मानना है कि जो जोड़े बच्चे पैदा करने में असमर्थ हैं, उन्हें मां अंगर मोती की पूजा करने के बाद आशीर्वाद मिलता है, यही वजह है कि नवरात्रि के दौरान हर साल हजारों दीपक जलाए जाते हैं।

मां अंगार मोती मंदिर न केवल पूजा स्थल के रूप में बल्कि सामूहिक आस्था, विश्वास और चमत्कारों की कहानियों के प्रतीक के रूप में भी खड़ा है। नवरात्रि को भक्तों की बढ़ती भीड़ द्वारा चिह्नित किया जाता है, जो मंदिर की मान्यताओं और परंपराओं से आकर्षित होते हैं।