राजनांदगांव : राज्य के हर शहर से सिटी बसें गायब हो चुकी है, वहीँ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चंद रोज पहले खाड़ी युद्ध को ध्यान में रखते हुए पेट्रोल-डीजल की किफायत के इस्तेमाल करते हुए जहां तक हो सके सार्वजनिक परिवहन सुविधा का इस्तेमाल करने की अपील की थी, लेकिन इसके अमलीजामा पहनाने में व्यवहारिक दिक्कत आ रही है, जिसमें राजनांदगांव जैसे शहर में सार्वजनिक परिवहन सेवा का अभाव है। पुरानी बसे कंडम हो चुकी है और सड़कों से गायब हो चुकी है, जिससे जनता के टैक्स के पैसे का बड़ा नुकसान हुआ है।
दस साल पहले शहर के लोगों को सुविधाजनक और सस्ती आवागमन सुविधा मुहैया कराने के लिए करीब पांच करोड़ रुपए की लागत से बीस बसें खरीदी गई थी, जिसके बाद कुछ बसें शुरुआती दौर में चल भी रही थी। लेकिन संचालकों की मनमानी जिला प्रशासन पर भारी पड़ गई, और कोरोना संक्रमण के बाद चल रही कुछ बसें भी सड़क से गायब हो गई, उन बसों का कोई पता नहीं है।
कोरोना संक्रमण के बाद बंद पड़ी बसें अब तक नहीं चल पाई है। वर्तमान में कई बसें गायब हो गई हैं। पड़ताल करने पर पता चला कि आधा दर्जन बसें नया बस स्टैंड में खड़ी हैं, वही दो बसें पाताल भैरवी मंदिर हाइवे के सामने देखी गई। जबकि, अन्य बसों का कोई पता ही नहीं है। कीमती बसों का संचालन जिला अर्बन कमेटी के देखरेख में किया जाना था. लेकिन वर्तमान में कमेटी को भी बसों की जानकारी नहीं है। बड़ी बात यह है कि इस लापरवाही पर कार्यवाही तो दूर, इसके लिए जिम्मेदारी भी तय नहीं की गई हैं. इस बीच ई बसों के संचालन की तैयारी शुरू हो गई है.



