डोंगरगढ़ : प्रशासनिक व्यवस्था जी स आम आदमी के लिये है, उसी आम आदमी की जान से उसे कोई लेना देना नहीं है, पहले तो भ्रष्टाचार से निर्माण कार्य होता है और दिर उस पर लीपापोती होती है, लेकिन उसका क्या जिसकी जान जोखिम में आ जाती है, सामने आये मामले के अनुसार मानसून की पहली ही बारिश ने करोड़ों रुपये की लागत से बने बोरतलाव ब्रिज की निर्माण गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिये हैं। यहाँ कुछ वर्ष पहले रेलवे विभाग द्वारा निर्मित इस ब्रिज में दो पिलरों के बीच का हिस्सा क्षतिग्रस्त होकर बाहर निकल गया है, जिससे पुल के बीचों-बीच एक लंबा और खतरनाक गैप बन गया है, जो दुर्घटना का कारण बन रहा है। इस घटना के बाद क्षेत्र में हड़कंप मच गया और लोगों ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर सवाल उठाने शुरू कर दिये हैं।
पिलरों के बीच बना गैप :
इस मामले में मिली जानकारी के अनुसार, बीती रात हुई बारिश के बाद बोरतलाव ब्रिज के दो पिलरों के बीच बना जॉइंट हिस्सा उखड़कर बाहर निकल गया था। इसके चलते सड़क के बीच एक लंबा गैप दिखाई देने लगा, जिससे रात के समय आवागमन कर रहे लोगों की जान जोखिम में पड़ गई और लोगों को अँधेरे में वह नहीं दिखा। स्थानीय लोगों का दावा है कि इसी गैप की चपेट में आकर दो बाइक सवार घायल हो गये। वहीं रात करीब 9 बजे इस मार्ग से गुजर रहे दो बड़े वाहन भी हादसे का शिकार होने से बाल-बाल बच गये, रात के समय वैसे भी तेज रौशनी में कुछ दिखाई नहीं देता है। वहीँ प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया यदि वाहन चालकों ने समय रहते नियंत्रण नहीं संभाला होता तो बड़ा हादसा हो सकता था।
सूचना के बाद भी मौके पर नहीं पहुंचे जिम्मेदार अधिकारी :
इस घटना की सूचना मिलते ही आसपास के ग्रामीण मौके पर पहुंचे। लोगों का आरोप है कि रेलवे विभाग और संबंधित ठेकेदार के कर्मचारियों को सूचना देने के बावजूद काफी देर तक कोई जिम्मेदार अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा, जिससे प्रत्यक्षदर्शी काफी आक्रोशित हो गये।
डेढ़ साल पहले हुआ था निर्माण :
इसके बाद स्थानीय पुलिस जवानों और ग्रामीणों ने मिलकर बाहर निकले क्षतिग्रस्त हिस्से को हटाया और अस्थायी रूप से मार्ग को सुरक्षित किया। इस घटना के बाद ब्रिज निर्माण और उसके रखरखाव को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। रेलवे कंस्ट्रक्शन विभाग के सब इंजीनियर संजीत ने बताया है कि ब्रिज का निर्माण कार्य लगभग डेढ़ वर्ष पहले पूरा हो चुका है। वर्तमान में इसके रखरखाव और मेंटेनेंस की जिम्मेदारी डोंगरगढ़ आईओडब्ल्यू (इंस्पेक्टर ऑफ वर्क्स) के माध्यम से की जानी है, जो नहीं की गई है।
हालांकि, जब उनसे ब्रिज निर्माण की कुल लागत के बारे में पूछा गया तो उन्होंने स्पष्ट जानकारी नहीं दी। वहीँ स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि करोड़ों रुपये खर्च कर बनाये गये पुल में इतनी कम अवधि के भीतर इस प्रकार की तकनीकी खामी सामने आती है, तो यह बेहद गंभीर मामला है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि निर्माण कार्य की गुणवत्ता और विभागीय निगरानी की निष्पक्ष जांच होनी चाहिये। उनका कहना है कि समय रहते सुधारात्मक कार्यवाही नहीं की गई तो भविष्य में यह पुल किसी बड़े हादसे की वजह बन सकता है। इस मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या करोड़ों रुपये की लागत से बना बोरतलाव ब्रिज पहली ही बड़ी बारिश का दबाव नहीं झेल पाया, या फिर निर्माण कार्य में गुणवत्ता से समझौता किया गया? अब इस सवाल का जवाब विभागीय जांच और तकनीकी रिपोर्ट के बाद ही सामने आ सकेगा, लेकिन फिलहाल पुल में बना यह खतरनाक गैप लोगों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता का विषय बन गया है। वहीँ इस निर्माण कार्य में घोटाले की बू आने लगी है, जो आम राहगीरों के लिये मौत का कारण भी बन सकती है।



