सुकमा : छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले का पोलमपल्ली गांव एक बार फिर से धर्मांतरण से जुड़े हुये विवाद को लेकर सुर्खियों में आ गया है। इस बार यह मामला केवल धार्मिक मतभेद तक सीमित नहीं है, बल्कि आदिवासी परंपराओं, सामाजिक रीति-रिवाजों और ग्राम व्यवस्था से भी जुड़ गया है। इसको लेकर ग्रामीणों का आरोप है कि गांव की पारंपरिक पूजा और धार्मिक अनुष्ठान पूरे होने से पहले ही कुछ परिवारों ने खेतों में जुताई और धान की बुआई शुरू कर दी, जिससे गांव में विवाद की स्थिति बन गई। मामले के अनुसार पटेलपारा में देवताओं की अनदेखी कर मतांतरित ईसाइयों की तरफ से खेती बाड़ी की प्रक्रिया शुरू करने पर जनजातीय समुदाय में गुस्सा पनप गया है। धान बुआई पर दोनों पक्ष आमने-सामने आ गये। विवाद बढ़ने के बाद तीन ईसाई परिवारों के घरों में तोड़फोड़ किये जाने का भी आरोप है। पुलिस और प्रशासन ने गांव पहुंचकर हालात को नियंत्रित करते हुए दोनों पक्षों से शांति बनाए रखने की अपील की है।
स्थानीय सूत्रों के अनुसार गांव में धान बुआई के दौरान जनजातीय समाज की ओर से देवताओं की पूजा की जाती है। लेकिन मतांतरित ईसाइयों ने ऐसा नहीं किया, इससे ग्रामीण भड़क गये और काफी आक्रोशित हो गये। ग्रामीणों का कहना है कि गांव में वर्षों से खेती शुरू करने से पहले सामूहिक पूजा की परंपरा निभाई जाती है। उनका आरोप है कि कुछ परिवारों ने इस परंपरा का पालन नहीं किया, जिससे सामाजिक असहमति बढ़ गई। इसी मुद्दे को लेकर ग्रामीणों ने विरोध जताया और संबंधित परिवारों से जवाब मांगा। देखते ही देखते विवाद ने गंभीर रूप ले लिया और कुछ लोगों ने तीन ईसाई परिवारों के घरों में तोड़फोड़ कर दी। इस घटना के बाद गांव में कुछ समय के लिए तनाव का माहौल बन गया। स्थिति को देखते हुए एहतियात के तौर पर गांव में पुलिस बल तैनात किया गया। घटना के बाद पुलिस और प्रशासन की मौजूदगी में दोनों पक्षों के बीच बातचीत कराई गई। विवाद बढ़ने पर आक्रोशित ग्रामीणों ने तीन परिवारों के घरों की छतें हटाकर उनसे गांव छोड़ने की मांग की।
विशेष ग्रामसभा बुलाने की मांग :
ग्रामीणों ने धर्मांतरण और गांव की परंपराओं से जुड़े विवाद के समाधान के लिए कलेक्टर के नाम ज्ञापन सौंपा है। ज्ञापन में विशेष ग्रामसभा बुलाकर पूरे मामले पर चर्चा करने और सामूहिक निर्णय लेने की मांग की गई है। ग्रामीणों का कहना है कि गांव से जुड़े ऐसे संवेदनशील मामलों का समाधान ग्रामसभा के माध्यम से ही होना चाहिए। फिलहाल पोलमपल्ली गांव में स्थिति नियंत्रण में बताई जा रही है। प्रशासन लगातार हालात पर नजर बनाए हुए है और लोगों से शांति बनाए रखने की अपील कर रहा है।
दस साल पहले बने थे ईसाई :
तहसीलदार योगेंद्र रात्रे ने बताया है कि दोनों पक्षों को समझाईश देने के बाद आपसी सहमति बन गई है और विवाद समाप्त हो गया है। उन्होंने कहा कि फिलहाल गांव का माहौल पूरी तरह शांतिपूर्ण है, जबकि पूरे मामले की जांच जारी है। ग्रामीणों के अनुसार, करीब दस वर्ष पहले गांव के तीन परिवारों ने ईसाई धर्म अपना लिया था। इसके बाद गांव में धार्मिक परंपराओं को लेकर विवाद की स्थिति बनी थी। लगभग छह वर्ष पहले ग्रामीणों की बैठक में आपसी सहमति से समझौता कराया गया था। उस समय सार्वजनिक रूप से पूजा-पाठ करने को लेकर सहमति बनी थी। बताया जा रहा है कि इसी मुद्दे को लेकर एक बार फिर विवाद उत्पन्न हुआ है ।



