रायपुर : छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य की स्कूली शिक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव करने का फैसला लिया है। आगामी शैक्षणिक सत्र 2027-28 से प्रदेश के सभी सरकारी स्कूलों में नया शैक्षणिक सत्र अब हर वर्ष 1 अप्रैल से शुरू होकर अगले वर्ष 31 मार्च तक संचालित होगा। इस संबंध में स्कूल शिक्षा सचिव डॉ. कमलप्रीत सिंह ने संचालक, लोक शिक्षण संचालनालय को पत्र जारी कर आवश्यक दिशा-निर्देश दिये गये हैं। राज्य सरकार का यह निर्णय देश के अन्य प्रमुख शिक्षा बोर्डों और शिक्षा मंडलों की व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। इसके साथ ही वर्तमान में लागू 16 जून से 30 अप्रैल तक संचालित होने वाले शिक्षा सत्र की व्यवस्था समाप्त कर दी जाएगी।
वहीँ राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020, निःशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम-2009 और भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय के दिशा-निर्देशों के अनुरूप छत्तीसगढ़ सरकार ने बड़ा निर्णय लिया है। आगामी शैक्षणिक सत्र से प्रदेश के सभी विद्यालयों में कक्षा पहली में प्रवेश के लिए न्यूनतम आयु 6 वर्ष निर्धारित कर दी गई है। इस संबंध में स्कूल शिक्षा सचिव डॉ. कमलप्रीत सिंह ने संबंधित विभागों और सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को आवश्यक निर्देश जारी कर दिये हैं।
विभिन्न कक्षाओं के लिए निर्धारित आयु सीमा इस प्रकार होगी :
नर्सरी (बालवाटिका-1): 3 वर्ष से अधिक एवं 4 वर्ष से कम।
केजी-1 (बालवाटिका-2): 4 वर्ष से अधिक एवं 5 वर्ष से कम।
केजी-2 (बालवाटिका-3): 5 वर्ष से अधिक एवं 6 वर्ष से कम।
कक्षा पहली: 6 वर्ष से अधिक एवं 7 वर्ष से कम।
प्रवेश के लिये आयु सीमा में 3 महीने की विशेष छूट :
अभिभावकों और बच्चों की सुविधा के लिए शासन ने नियमों में थोड़ी शिथिलता भी दी है। इसके तहत यदि कोई बच्चा 01 अप्रैल को निर्धारित आयु पूरी नहीं कर पा रहा है, लेकिन 01 जुलाई तक उसकी आवश्यक आयु पूर्ण हो जाती है, तो उसे अधिकतम तीन माह की छूट प्रदान करते हुए संबंधित कक्षा में प्रवेश दिया जा सकेगा। बताया गया है कि यह नई व्यवस्था राज्य के सभी शासकीय, अशासकीय (निजी) और अनुदान प्राप्त विद्यालयों पर समान रूप से लागू होगी। साथ ही, शिक्षा का अधिकार (RTE) के अंतर्गत निजी विद्यालयों की 25 प्रतिशत आरक्षित सीटों पर होने वाले प्रवेशों पर भी यह नियम पूरी तरह प्रभावी रहेगा।
इन छात्रों को मिलेगी छूट :
विभागीय निर्देशों के अनुसार, यदि कोई छात्र किसी मान्यता प्राप्त विद्यालय की पूर्व-प्राथमिक (Pre-Primary) कक्षा से पास होकर (प्रोन्नत होकर) सीधे कक्षा पहली में प्रवेश ले रहा है, तो उस पर यह नई आयु सीमा लागू नहीं होगी। ऐसे छात्रों को उनके स्थानांतरण प्रमाण-पत्र(TC), अंकसूची या स्कोर कार्ड में दर्ज जन्मतिथि के आधार पर ही प्रवेश दे दिया जायेगा। इन सभी व्यवस्थाओं को लेकर स्कूल शिक्षा विभाग ने सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देशित किया है कि वे अपने अधीनस्थ विकासखंड शिक्षा अधिकारियों, संकुल समन्वयकों और सभी शाला प्रमुखों के माध्यम से इन नियमों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित कराएं। इसके साथ ही, अभिभावकों की जानकारी और सुविधा के लिए इन नए प्रावधानों का व्यापक प्रचार-प्रसार करने के भी निर्देश दिये गये हैं।
16 जून से शुरू होने वाला सत्र होगा समाप्त :
स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार, अब तक प्रदेश में स्कूलों का शैक्षणिक सत्र 16 जून से प्रारंभ होकर 30 अप्रैल तक चलता था। नई व्यवस्था लागू होने के बाद यह प्रणाली पूरी तरह बदल जाएगी और प्रत्येक वर्ष 1 अप्रैल से 31 मार्च तक नियमित शैक्षणिक सत्र संचालित किया जाएगा। हालांकि, छात्रों के ग्रीष्मकालीन अवकाश में कोई बदलाव नहीं किया गया है। 1 मई से 15 जून तक का ग्रीष्मकालीन अवकाश पहले की तरह ही जारी रहेगा।
सत्र के पहले दिन से ही शुरू होंगी सभी छात्रहितैषी योजनायें :
नई व्यवस्था के तहत अब प्रत्येक वर्ष 1 अप्रैल को शैक्षणिक सत्र शुरू होने के साथ ही शाला प्रवेश उत्सव का आयोजन किया जाएगा। इसी दिन से विद्यार्थियों को निःशुल्क पाठ्यपुस्तकों का वितरण, सरस्वती सायकल योजना के तहत सायकलों का वितरण, स्कूली गणवेश (यूनिफॉर्म) उपलब्ध कराने सहित सभी छात्रहितैषी योजनाओं और शैक्षणिक गतिविधियों की शुरुआत अनिवार्य रूप से की जाएगी। विभाग ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि सत्र के आरंभ से ही सभी आवश्यक सुविधाएं विद्यार्थियों तक पहुंचाई जाएं, ताकि पढ़ाई किसी भी स्तर पर प्रभावित न हो। ऐसे में नये नियमों को लागू किया जायेगा।
शिक्षण व्यवस्था को मिलेगा नया स्वरूप :
स्कूल शिक्षा विभाग का मानना है कि नए शैक्षणिक कैलेंडर से विद्यार्थियों को सत्र के पहले दिन से ही पढ़ाई के लिए आवश्यक संसाधन उपलब्ध हो जाएंगे। इससे किताबें, यूनिफॉर्म और अन्य योजनाओं के वितरण में होने वाली देरी समाप्त होगी और शिक्षण कार्य समय पर शुरू हो सकेगा।सरकार का मानना है कि इस बदलाव से विद्यालयों की शैक्षणिक गतिविधियां अधिक सुव्यवस्थित होंगी, विद्यार्थियों का शैक्षणिक समय बेहतर ढंग से उपयोग होगा और शिक्षा की गुणवत्ता में भी सुधार देखने को मिलेगा।
क्या बदलेगा?
- शैक्षणिक सत्र अब 1 अप्रैल से 31 मार्च तक चलेगा।
- वर्तमान 16 जून से 30 अप्रैल वाला सत्र समाप्त होगा।
- 1 मई से 15 जून तक ग्रीष्मकालीन अवकाश पहले की तरह जारी रहेगा।
- 1 अप्रैल को ही शाला प्रवेश उत्सव आयोजित होगा।
- सत्र के पहले दिन से निःशुल्क पाठ्यपुस्तकें, सरस्वती सायकल योजना, स्कूली गणवेश और अन्य छात्रहितैषी योजनाओं का वितरण शुरू होगा।
- नई व्यवस्था शैक्षणिक सत्र 2027-28 से पूरे राज्य में लागू की जायेगी।



