तेहरान (ईरान) : वर्तमान में आधी दुनियां युद्ध से जूझ रही है, जिसमें रूस-युक्रेन युद्ध लम्बे समय से चल रहा है, जिसमें अब सूडान, फिलिस्तीन (गाजा), म्यांमार और मिडिल ईस्ट (इज़राइल, लेबनान, ईरान और अमेरिका) के बीच युद्ध जारी है, भारत-पाकिस्तान का युद्ध कम समय तक चला, वहीँ अन्य देश भी युद्ध में कब कूद जायेंगे कह पाना मुश्किल है, जिससे वैश्विक आर्थिक हालात लगातार बिगड़ते चले जायेंगे, नाटो देशों की चुप्पी भी अचानक युद्ध में कूद सकते है। वहीँ इधर सीज फायर लेकर अमेरिका ने फिर से युद्ध की तैयारी करके ईरान पर हमला कर दिया है, जिसके कारण मिडिल ईस्ट में एक बार फिर तनाव बढ़ गया है। रविवार तड़के अमेरिका ने ईरान पर हमले का नया दौर शुरू किया है। अमेरिका ने ईरान में 140 सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है। अमेरिकी हमलों के जवाब में ईरान ने बहरीन, कुवैत, कतर और संयुक्त अरब अमीरात पर मिसाइल हमले किए। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने बताया कि यह हमला होर्मुज में साइप्रस के झंडे वाले कंटेनर जहाज पर हुए हमले के जवाब में किया गया है।
वहीँ अब आपको बता दें कि पश्चिम एशिया में चल रहा तनाव अब एक बेहद खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है, ईरान भी अब इस युद्ध को रोकने के मूड में नहीं है, खामनेई कि मौत के बाद से वह भी लगातार आक्रामक बना हुआ है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने रविवार को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के निर्देश पर ईरान के खिलाफ एक और बड़ा और आक्रामक सैन्य अभियान शुरू कर दिया है। अमेरिकी सेना ने जमीन, समुद्र और हवा से एक साथ कार्यवाही करते हुए ईरान के भीतर करीब 140 सैन्य ठिकानों पर बेहद सटीक हमले किये हैं।
सेंटकॉम के अनुसार, इस बड़े हमले का मुख्य उद्देश्य होर्मुज जलडमरूमध्य में वाणिज्यिक जहाजों और नागरिक नाविकों को निशाना बनाने की ईरानी क्षमता को पूरी तरह से कमजोर और ध्वस्त करना है। इस भारी बमबारी के बाद ईरान के कई प्रांतों में जोरदार धमाकों की आवाजें सुनी गई हैं, जिससे पूरे क्षेत्र में युद्ध की आशंका और गहरी हो गई है।
लड़ाकू विमानों और नौसैनिक जहाजों से बरसीं मिसाइलें, दक्षिणी ईरान के तीन प्रमुख शहरों में गूंजे धमाके
हमले को लेकर अमेरिकी सैन्य अधिकारियों से मिली जानकारी के मुताबिक, इस ताजा और तीसरे दौर के हमले में अमेरिकी सेना ने अपने आधुनिक लड़ाकू विमानों, ड्रोन्स और नौसैनिक युद्धपोतों का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया। अमेरिकी मिसाइलों ने ईरान के मिसाइल और ड्रोन लॉन्च साइट्स, नौसैनिक ठिकानों, गुप्त हथियार भंडारों, संचार नेटवर्क और तटीय निगरानी केंद्रों को पूरी तरह नेस्तनाबूद कर दिया। ईरान के सरकारी चैनल प्रेस टीवी ने भी इस हमले की पुष्टि की है। सामने आई खबरों के अनुसार, अमेरिकी हमलों के बाद दक्षिणी ईरान के रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण शहरों जास्क, बंदर अब्बास और सीरिक में तीन भीषण विस्फोटों की आवाजें सुनी गईं, जिससे तटीय क्षेत्रों में रहने वाले नागरिकों के बीच भारी दहशत फैल गई।
ईरान ने अमेरिकी हमलों को बताया यूएन चार्टर का उल्लंघन, जवाबी कार्रवाई की दी सीधी चेतावनी :
इस भीषण अमेरिकी सैन्य कार्यवाही पर ईरान के विदेश मंत्रालय ने बेहद तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। ईरान ने पिछले 24 घंटों में हुए इन हमलों की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए इन्हें संयुक्त राष्ट्र (UN) चार्टर का घोर और खुला उल्लंघन करार दिया है। तेहरान ने आरोप लगाया है कि अमेरिका के इन हमलों ने पश्चिम एशिया में शांति स्थापित करने और तनाव कम करने के हालिया राजनयिक प्रयासों को भारी नुकसान पहुंचाया है। इसके साथ ही ईरान ने मस्कट में हुई द्विपक्षीय वार्ता के नतीजों को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति के कथित बयानों को “पूरी तरह झूठ” बताते हुए खारिज कर दिया है। इसको लेकर ईरान ने अमेरिका पर धोखे का आरोप लगाया है, ईरान ने अब चेतावनी दी है कि वह इन हमलों के खिलाफ चुप नहीं बैठेगा और अंतर्राष्ट्रीय नियमों के तहत अपनी संप्रभुता की रक्षा के लिए कड़ी जवाबी कार्यवाही करेगा, अब किसी भी रूप ,में वह नहीं रुकेगा।
संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने जताई पूर्ण युद्ध की चिंता; डोनाल्ड ट्रंप ने ईरानी दावों को किया खारिज
ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते इस भीषण सैन्य टकराव पर संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने गहरी चिंता व्यक्त की है। यूएन प्रमुख ने चेतावनी दी है कि अगर दोनों देशों के बीच हालात इसी तरह बिगड़ते रहे और यह विवाद एक पूर्ण युद्ध में तब्दील हुआ, तो वैश्विक अर्थव्यवस्था, अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा और क्षेत्र के आम लोगों के लिए इसके “विनाशकारी परिणाम” होंगे। गुटेरेस ने दोनों पक्षों से तत्काल युद्ध रोकने और कूटनीति के जरिए लंबित मुद्दों को सुलझाने की अपील की है।
दूसरी तरफ, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक कार्यक्रम में गरजते हुए कहा कि अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के बावजूद होर्मुज जलडमरूमध्य वाणिज्यिक जहाजों की आवाजाही के लिए पूरी तरह खुला है और अमेरिका इस समुद्री मार्ग पर ईरान के किसी भी प्रकार के अवैध एकाधिकार या नियंत्रण के दावों को कभी स्वीकार नहीं करेगा। वहीँ अब धीरे – धीरे मुस्लिम देश ईरान के समर्थन में आने लगे है, जिससे दुनियां पर अब तृतीय विश्वयुद्ध का खतरा मंडरा रहा है, जो धीरे – धीरे बड़ा रूप लेता जायेगा।



