रायपुर : सरकारी अस्पतालों कि व्यवस्था को लेकर आम आदमी भरोसा नहीं कर पाता, लेकिन अधिकांश जनसँख्या गरीब लोगों की है, जिनके ईलाज इन्हीं अस्पतालों में होते है और अधिकांश को ईलाज मिल भी जाता है, वहीँ अब आपको बता दें कि राजधानी की भीमराव अम्बेडकर अस्पताल आये दिन वैश्विक स्तर के कीर्तिमान रचती है, इसी को लेकर 9 साल की एक बच्ची को बहरा होने से बचाने के लिए चिकित्सकों की टीम को नया पर्दा और हड्डी बनानी पड़ी। मामला डॉ. भीमराव आंबेडकर अस्पताल का है। यह जटिल प्रक्रिया कई माह तक जारी रही। चिकित्सकों की टीम ने विगत लगभग एक वर्ष से बच्ची के बाएं कान में फंसे लोहे के छर्रे को सुरक्षित बाहर निकालने के साथ-साथ क्षतिग्रस्त हो चुके कान के पर्दे और सुनने वाली हड्डियों का सफल पुनर्निर्माण (टिम्पैनोप्लास्टी एवं ऑसिक्युलोप्लास्टी) भी किया गया।
ईएनटी विभाग ने माइक्रोस्कोपिक सर्जरी के माध्यम से यह जटिल ऑपरेशन किया। ईएनटी विभागाध्यक्ष डॉ. हंसा बंजारा के अनुसार, यदि समय रहते सर्जरी नहीं की जाती, तो बच्ची की सुनने की क्षमता स्थायी रूप से प्रभावित हो सकती थी। संक्रमण के आंतरिक कान या मस्तिष्क तक फैलने का भी खतरा भी था, यह काफी जटिल कार्य था। अब इस सफल ऑपरेशन के बाद बच्ची स्वस्थ है और चिकित्सकों की निगरानी में उसका उपचार जारी है। उम्मीद है कि उसकी सुनने की क्षमता लगभग सामान्य हो जाएगी और वह सामान्य जीवन जी सकेगी। डॉ. दुर्गेश गजेंद्र, पीजी छात्रा डॉ. ज्योति किरण सहित निश्चेतना विभाग की डॉ. अमृता टीम का हिस्सा रहीं।
अंदर तक पहुंच चुका था छर्रा :
डॉ. दुर्गेश गजेंद्र के अनुसार, बच्ची ने लगभग एक वर्ष पूर्व खेल-खेल में लोहे का छर्रा अपने कान में डाल लिया था। लंबे समय तक कान में फंसे रहने के कारण छर्रा मध्य कान (मिडिल ईयर) तक पहुंच गया था और उसके दबाव से कान का पर्दा तथा सुनने वाली सूक्ष्म हड्डियां गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो गई थीं। जिसके बाद माइक्रोस्कोपिक तकनीक की सहायता से अत्यंत सावधानीपूर्वक सर्जरी कर छरें को बाहर निकाला गया है। इसके बाद बच्ची के स्वयं के ऊतकों का उपयोग कर कान का नया पर्दा और सुनने वाली हड्डी का निर्माण किया गया है।
तुरंत अस्पताल पहुंचे अभिभावक :
अस्पताल के अधीक्षक डॉ. संतोष सोनकर ने कहा, एक वर्ष से कान में फंसे लोहे के छरे को निकालने के साथ ही क्षतिग्रस्त कान के पर्दे और सुनने वाली हड्डियों का पुनर्निर्माण करना अत्यंत चुनौतीपूर्ण कार्य था। हमारी ईएनटी टीम ने न केवल बच्ची की सुनने की क्षमता को सुरक्षित रखा, बल्कि उसे भविष्य में सामान्य जीवन जीने का अवसर भी दिया। यह सफलता इस बात का प्रमाण है कि अम्बेडकर अस्पताल में जटिल से जटिल ईएनटी सर्जरी उच्च गुणवत्ता के साथ उपलब्ध है। ऐसे ही भीमराव अम्बेडकर अस्पताल में पहले भी कई बड़े ऑपरेशन किये जा चुके है।



