राजधानी से कुछ ही दूरी पर है आस्था का अद्भुत धाम और घूमने के लिये बेहतर जगह, दर्शन के लिये आते है सैंकड़ों श्रद्धालु।

राजिम : लोगों को रोज घूमने के लिये नई जगह चाहिये, इसके साथ ही श्रद्धा का संगम हो तो क्या कहने? छत्तीसगढ़ में ऐसी कई जगहें विकसित की गई है, जो दोनों बातों की पूर्ति करती है, ऐसे ही एक जगह है जो राजधानी रायपुर से लगभग 50 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है, नवापारा क्षेत्र का छटेरा गांव, जो अपने प्राचीन धार्मिक स्थलों और आस्था की परंपरा के लिए जाना जाता है। इसी गांव में कोई डेढ़ दशक पहले तालाब के बीचों-बीच पूरे ग्रामवासियों के सहयोग से बना श्री रामेश्वर शिव मंदिर इन दिनों श्रद्धालुओं के आकर्षण का प्रमुख केंद्र बना हुआ है, जहाँ लगातार श्रद्धालु आ रहे है।

तालाब के ठीक बीच में स्थित है मंदिर :

यह भव्य मंदिर विशाल तालाब के बीच भगवान भोलेनाथ की भक्ति और ग्रामीणों की सामूहिक आस्था का सुंदर उदाहरण प्रस्तुत करता है। श्री रामेश्वर शिव मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि मंदिर तालाब के ठीक बीच में स्थित है। इन दिनों तालाब लबालब पानी से भरा हुआ है और चारों ओर हरियाली का मनोहारी वातावरण दिखाई देता है। तालाब के बीच स्थित मंदिर तक पहुंचने के लिए आकर्षक एवं शानदार पुल का निर्माण किया गया है। पुल से होकर मंदिर तक पहुंचते समय एक ओर पानी से भरा तालाब और दूसरी ओर हरियाली का दृश्य श्रद्धालुओं को सहज ही अपनी ओर आकर्षित करता है, रोजाना की संख्या में यहाँ सैंकड़ों श्रद्धालु आ रहे है।

मनोकामनायें लेकर यहां पहुंचते हैं श्रद्धालु :

श्रद्धालु अपनी अलग-अलग मनोकामनाएं लेकर यहां पहुंचते हैं। संतान प्राप्ति, विवाह में आ रही बाधा अथवा गंभीर बीमारी जैसी परेशानियों से जूझ रहे लोग भगवान भोलेनाथ के समक्ष श्रद्धा और विश्वास के साथ मन्नत मांगते हैं। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि सच्चे मन से की गई प्रार्थना और मन्नत भगवान भोलेनाथ पूरी करते हैं। मंदिर में सुबह और शाम भव्य आरती होती है। आरती के समय बड़ी संख्या में ग्रामीण और श्रद्धालु शामिल होते हैं। घंटियों की गूंज, भगवान शिव के जयकारों और आरती के वातावरण से पूरा परिसर भक्तिमय हो उठता है। सामान्य दिनों में मंदिर के विश्राम का समय दोपहर 1 बजे से शाम 4 बजे तक निर्धारित है। हालांकि सावन के सोमवार को श्रद्धालुओं की आस्था और भीड़ को देखते हुए मंदिर पूरे दिन खुला रहता है। सुबह से देर शाम तक यहां भक्तों के पहुंचने का सिलसिला जारी रहता है। श्री रामेश्वर महादेव मंदिर का पूरा परिसर प्राकृतिक सौंदर्य से भी भरपूर है। मंदिर के चारों ओर लबालब भरा तालाब और चारों तरफ फैली हरियाली यहां पहुंचने वाले लोगों को सुकून का अहसास कराती है। 

बना है विशाल विश्राम कक्ष :

मंदिर के समीप विशाल टीन शेड का विश्राम कक्ष भी बनाया गया है, जहां श्रद्धालु कुछ समय आराम कर सकते हैं। तालाब के आसपास का शांत वातावरण इस धार्मिक स्थल को विशेष बना देता है। शहर की भीड़भाड़ से दूर यहां आने वाले लोगों को धार्मिक आस्था के साथ प्रकृति के बीच कुछ समय बिताने का अवसर भी मिलता है, लोगों को यहाँ बेहतर अनुभूति मिलती है। यहां तालाब का पानी साफ और निर्मल दिखाई देता है। बड़ी संख्या में लोग यहां स्नान के लिए भी पहुंचते हैं। वहीं मंदिर परिसर की पवित्रता और स्वच्छता को ध्यान में रखते हुए मंदिर वाले तालाब में किसी प्रकार का शौच अथवा वॉशरूम के रूप में उपयोग नहीं किया जाता। इसके बाजू में एक अन्य तालाब भी है, जिसका उपयोग ग्रामीण अपनी निस्तारी आवश्यकताओं के लिए करते हैं।

शेषशय्या पर विराजमान हैं भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की प्रतिमा :

श्री रामेश्वर शिव मंदिर की एक और खासियत यहां भगवान विष्णु और माता महालक्ष्मी की प्रतिमा शेषशय्या पर विराजमान हैं। इस तरह मंदिर परिसर में शिव आराधना के साथ भगवान विष्णु और माता महालक्ष्मी के दर्शन का भी सौभाग्य श्रद्धालुओं को मिलता है। छटेरा का श्री रामेश्वर शिव मंदिर केवल पूजा-अर्चना का केंद्र नहीं, बल्कि ग्रामीणों की आस्था, सामूहिक सहयोग और प्राकृतिक सौंदर्य का अद्भुत संगम है। तालाब के बीच विराजे भोलेनाथ, मंदिर तक पहुंचने वाला आकर्षक पुल, चारों ओर फैली हरियाली, निर्मल जल और शांत वातावरण इस स्थान को खास बनाता है। सावन में जब चारों ओर हर-हर महादेव और बम-बम भोले के जयकारे गूंजते हैं, तब छटेरा का यह शिवधाम श्रद्धा और भक्ति से सराबोर नजर आता है। इस स्थान पर सड़क परिवहन के जरिये आसानी से पहुंचा जा सकता है।