राजधानी के घरों की 3D मैपिंग करवायेगा निगम, मिलेगी नई जीआईएस आईडी, आम आदमी पर बढ़ेगा बोझ, निगम को मिलेगा राजस्व।

रायपुर : प्रशासनिक व्यवस्था चलाने के लिये राजस्व एक महत्वपूर्ण हिस्सा होता है, जिसे नकारा नहीं जा सकता, वहीँ प्रशासन इतना निर्दयी हो सकता है कि आम आदमी सोच भी नहीं सकता, लगातार बीते 20 वर्षों से नगर निगम कभी यूजर चार्ज के नाम पर तो कभी व्यवस्था के नाम पर, तो कभी फंड की कमी का रोना रोते हुये आये दिन कोई ना कोई रूप से आम जनता पर टैक्स का बोझ बढ़ाता ही जा रहा है, जिससे जनता चौतरफा मार रही है, उसके जेब पर भार बढ़ता ही जा रहा है, जबकि दूसरी तरफ निगम से राजधानी की व्यवस्था संभल ही नहीं रही है, वहीँ अब रायपुर नगर निगम शहर भर की प्रापर्टी का री-असेसमेंट कराने लिडार सर्वे करवायेगा। इसके लिए हाल ही में किए गए ऑनलाईन टेंडर में 4 एजेंसियों ने निविदा भरते हुए दिलचस्पी दिखाई है। इनमें दिल्ली से 2 एजेंसी, अमरावती और हैदराबाद से 1-1 एजेंसी ने निविदा में भाग लिया। निगम मुख्यालय में निविदा भरने की अंतिम तिथि के बाद टेक्नीकल बीड में इन चारों एजेंसियों से प्राप्त दस्तावेजों का 12 बिंदुओं पर तकनीकि परीक्षण कराया है। 

इसके बाद अब जल्द ही फाइनेंसियल बीड खोली जाएगी जिसमें सबसे कम रेट कोड करने वाली एजेंसी को शहर भर में लिडार सर्वे करने वर्कआर्डर दिया जाएगा। रायपुर शहर में नगर निगम द्वारा जीआईएस सर्वे के 10 साल बाद प्रापर्टी रीअसेसमेंट कराने लिडार सर्वे कराया जाएगा। जिसमें थ्रीडी डिजिटल मैंपिंग कर भवनों व भूखंडों की सटीक एरिया रीडिंग अनुबंधित एजेंसी के माध्यम से होगा। लिडार सर्वे की रिपोर्ट के आधार पर आने वाले दिनों में नगर निगम की टीमें ग्राउंड पर जाकर स्पॉट का भौतिक सत्यापन करेगी।

दर्ज करा सकेंगे आपत्ति :

स्पॉट वैरिफिकेशन के दौरान यदि भवन का निर्मित क्षेत्र अधिक पाया जाएगा या आवासीय संपत्ति का उपयोग व्यवसायिक मिला तो संबंधित मकान मालिक को संशोधित टैक्स दर के साथ डिमांड नोट भेजा जायेगा। नोटिस जारी होने के बाद संपत्तिधारक को अपनी बात रखने 15 से लेकर 30 दिन तक का समय दिया जाएगा। यदि किसी को इस दौरान बढ़ाए गए क्षेत्र या कर दर पर आपत्ति हो तो अपने दस्तावेज जैसे स्वीकृत नक्शा, रजिस्ट्री की कॉपी प्रस्तुत कर संबंधित जोन कार्यालय में सुधार के लिए दिए जा सकेंगे। नगर निगम के राजस्व अधिकारी प्राप्त आपत्तियों की समीक्षा करेंगे, और इसका निराकरण भी किया जायेगा। इस कार्य में भी निगम को फंड खर्च करना पड़ेगा, जबकि इससे खर्च के अनुपात में आमदनी की उम्मीद कम है।

12 माह, 6 करोड़ का बजट :

वहीँ कंपनी को नगर निगम से अनुबंध कर एक वर्ष की समय अवधि में पूरे रायपुर शहर का थ्रीडी मैंपिग आधारित लिडार सर्वे करके निगम प्रशासन को अपनी रिपोर्ट देनी होगी। इस कार्य के लिए 6 करोड़ का बजट अनुमानित है। मेट्रो सिटी की तर्ज पर होने वाले लिडार सर्वे ड्रोन अधारित आधुनिक तकनीक से आवासीय, व्यवसायिक क्षेत्रों के अलावा शहर के रिक्त भूखंडों को भी इसमें शामिल किया जायेगा। इस सर्वे में हर मकान, भवन का कुल निर्मित क्षेत्रफल, फ्लोर की संख्या, और उपयोग आवासीय या व्यवसायिक का सटीक थ्रीडी डाटा तैयार होगा। इस थ्रीडी डाटा का निगम रिकार्ड से मिलान किया जायेगा। नगर निगम में मौजूद टैक्स रिकार्ड से स्वचालित सिस्टम द्वारा यह कार्य करने की योजना है। इसके साथ ही इस प्रोजेक्ट में स्पॉट वैरिफिकेशन को भी प्रमुखता से रखा गया है। ऐसे में आम आदमी को कोई लाभ नहीं मिलने वाला है, जबकि निगम को राजस्व की वृद्धि होगी।