स्वास्थ्य : माहवारी (पीरियड्स) के दौरान होने वाले हार्मोनल बदलावों की वजह से अधिकांश महिलाओं को असहनीय पेट दर्द, कमजोरी, अत्यधिक थकान और मूड स्विंग्स जैसी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि इन लक्षणों को नजरअंदाज करने के बजाय खानपान में आवश्यक सुधार की दिशा में ठोस कार्यवाही करना बेहद जरूरी है। सही डाइट न केवल शरीर को पर्याप्त ऊर्जा देती है, बल्कि ऐंठन और पाचन संबंधी समस्याओं को भी कम करती है। हेल्थ एक्सपर्ट किरण ने पीरियड्स के दौरान शरीर को एक्टिव और दर्दमुक्त रखने के लिए अपना पूरा डाइट प्लान साझा किया है:
सोने से पहले हिबिस्कस टी : रात में 1 कप उबलते पानी में 1 छोटा चम्मच सूखे गुड़हल के फूल डालकर 7-10 मिनट ढककर रखें। इस हर्बल चाय को छानकर गर्म-गर्म पीने से गर्भाशय की ऐंठन शांत होती है और तनावमुक्त नींद आती है।
दिन की शुरुआत (केसर-किशमिश पानी) : सुबह उठकर 8-10 काली किशमिश को 3-4 केसर के धागों वाले पानी में रातभर भिगोकर रखें। सुबह इस पानी को छानकर पिएं और साथ में भीगे हुए बादाम व अखरोट खाएं। यह ड्रिंक शरीर में आयरन का स्तर बढ़ाने और ऊर्जा बनाए रखने में मददगार है।
नाश्ते में एप्पल फाइबर बाउल : पीरियड्स में अक्सर महिलाओं को कब्ज की शिकायत रहती है। इससे बचने के लिए नाश्ते में स्ट्यूड एप्पल फाइबर बाउल शामिल करें। 2 छिले हुए सेबों को चुटकी भर दालचीनी के साथ 6-7 मिनट तक पकाएं। फिर इसमें भीगे चिया सीड्स, एक चम्मच अलसी पाउडर, भुने कद्दू के बीज, सूखे आलूबुखारे, काली किशमिश और अनार के दाने मिलाकर सेवन करें।
पौष्टिक वेजिटेबल जूस : दिन के समय चुकंदर, गाजर, अनार, ताजी धनिया पत्ती और पुदीने को पीसकर जूस तैयार करें। छानने के बाद इसमें आधा नींबू निचोड़कर पिएं। यह जूस शरीर को डिटॉक्स करता है और जरूरी विटामिन्स प्रदान करता है।
लंच में ग्लूटेन-फ्री ज्वार रोटी : दोपहर के खाने में प्याज, हरी मिर्च, धनिया पत्ती और काली मिर्च मिलाकर गुनगुने पानी से गूंथी गई ज्वार की रोटी खाएं। इसे हरी बीन्स की सब्जी और ताजी दही के साथ लें, जो गट हेल्थ को बेहतर बनाए रखता है।
संतुलित डिनर (पनीर-मखाना टिक्की) : रात में दाल और चावल के साथ भीगे मखाने, पनीर, उबले आलू, गाजर और हरी मटर से तैयार कुरकुरी टिक्की खाएं। यह हल्का भोजन प्रोटीन से भरपूर होता है और कमजोरी को दूर करता है।



