भाठागांव सब्जी बाजार आवंटन में भारी अनियमितता का आरोप, व्यापारियों ने किया निगम मुख्यालय का घेराव; निष्पक्ष जांच व कड़ी कार्यवाही की मांग।

रायपुर : छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के भाठागांव स्थित नवनिर्मित सब्जी बाजार में दुकानों के आवंटन को लेकर गंभीर विवाद खड़ा हो गया है। आवंटन प्रक्रिया में व्यापक स्तर पर धांधली और पक्षपात का आरोप लगाते हुए आक्रोशित स्थानीय सब्जी व्यापारियों ने नगर निगम मुख्यालय ‘व्हाइट हाउस’ का घेराव कर जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारी विक्रेताओं ने नगर निगम आयुक्त को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा, जिसमें पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराने, वर्तमान आवंटन सूची को अविलंब निरस्त करने, जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध कठोर प्रशासनिक कार्यवाही करने तथा पूरी तरह पारदर्शी प्रक्रिया अपनाकर दोबारा दुकानें आवंटित करने की मांग की गई है।

व्यापारियों ने बताया कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी वार्ड क्रमांक-61 के अंतर्गत भाठागांव में बनाए गए नए सब्जी बाजार को लेकर स्थानीय सब्जी विक्रेताओं और वार्डवासियों में गहरा असंतोष व्याप्त है। आरोप है कि आवंटन प्रक्रिया में नियमों को ताक पर रखकर अपेक्षित पारदर्शिता की अनदेखी की गई। दशकों से सड़क किनारे या पारंपरिक बाजार में व्यापार कर आजीविका चलाने वाले वास्तविक स्थानीय व्यापारियों को दरकिनार कर दिया गया, जिससे उनके सामने रोजी-रोटी का गंभीर संकट उत्पन्न हो गया है।

शिकायत पत्र में व्यापारियों ने सीधे तौर पर भाई-भतीजावाद का आरोप लगाते हुए कहा कि प्रभाव का इस्तेमाल कर एक ही परिवार के तीन से चार सदस्यों को दुकानें आवंटित कर दी गई हैं। इसके अतिरिक्त, वार्ड के वास्तविक पात्र निवासियों के हकों को छीनकर वार्ड से बाहर के बाहरी लोगों को दुकानें आवंटित की गई हैं। व्यापारियों ने इस मनमानी पर रोष प्रकट करते हुए अपात्र लोगों का आवंटन रद्द कर उनके खिलाफ विधिसम्मत कार्यवाही करने की मांग की है।

दुकानों के आकार को लेकर भी गंभीर विसंगतियां सामने आई हैं। नियमों के विपरीत आवंटन में समानता नहीं बरती गई; किसी को 8 फीट, किसी को 6 फीट तो किसी को केवल 4 फीट की जगह दी गई है। विक्रेताओं ने सभी पात्र दुकानदारों को समान व निर्धारित माप का स्थान उपलब्ध कराने की मांग रखी है।

इसके साथ ही, आवंटन से जुड़े महत्वपूर्ण सरकारी दस्तावेजों में कई स्थानों पर व्हाइटनर लगाकर नामों और आकारों में हेरफेर किए जाने का सनसनीखेज आरोप भी लगाया गया है। व्यापारियों का कहना है कि मूल अभिलेखों की सूक्ष्म जांच कराई जाए, ताकि दस्तावेजों में की गई छेड़छाड़ की वास्तविकता सामने आ सके और फर्जीवाड़े में लिप्त कर्मचारियों व दलालों पर दंडात्मक कार्यवाही सुनिश्चित हो सके। व्यापारियों ने स्पष्ट किया है कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र उचित कार्यवाही नहीं हुई, तो वे उग्र आंदोलन करने को बाध्य होंगे।