बिलासपुर : वैवाहिक विवाद से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले की सुनवाई करते हुए छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि केवल शारीरिक हिंसा ही नहीं, बल्कि लगातार गाली-गलौज, अपमान और फोन पर दी जाने वाली मानसिक प्रताड़ना भी वैवाहिक जीवन में गंभीर क्रूरता की श्रेणी में आती है। अदालत ने सख्त रुख अपनाते हुए टिप्पणी की कि किसी भी महिला को इस प्रकार का मानसिक और शारीरिक कष्ट सहने के लिए कतई विवश नहीं किया जा सकता। इसके साथ ही उच्च न्यायालय की डिवीजन बेंच ने फैमिली कोर्ट के पूर्व आदेश को पलटते हुए पीड़िता के पक्ष में फैसला सुनाया और विवाह विच्छेद को मंजूरी दे दी।
यह अहम फैसला छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट के जस्टिस पार्थ प्रतीम साहू और जस्टिस सुषमा सावंत की खंडपीठ ने दिया। प्रकरण के अनुसार, उत्तर प्रदेश के बलिया जिले की रहने वाली युवती का विवाह 5 दिसंबर 2021 को बिहार के भोजपुर निवासी आनंद कुमार गुप्ता के साथ हुआ था। महिला का आरोप था कि शादी के कुछ समय बाद ही पति ने उसके साथ मारपीट शुरू कर दी और अभद्र व्यवहार करने लगा। इसके अतिरिक्त पति की ओर से दहेज में एयर कंडीशनर (एसी) की अनुचित मांग भी रखी गई। जब महिला के परिजनों ने इस मांग को मानने से इंकार कर दिया, तब प्रताड़ना का दौर और अधिक बढ़ गया।
लगातार हो रहे उत्पीड़न और विवाद से त्रस्त होकर महिला अपने मायके अंबिकापुर लौट आई। मायके आने के बाद भी पति का दुर्व्यवहार थमा नहीं; उसने फोन पर पत्नी और उसकी बहनों को लगातार भद्दी गालियां देकर मानसिक रूप से परेशान करना जारी रखा। इस असहनीय व्यवहार के विरुद्ध पीड़िता ने अंबिकापुर स्थित फैमिली कोर्ट में क्रूरता के आधार पर तलाक के लिए सिविल सूट दायर कर कानूनी कार्यवाही शुरू की थी। हालांकि फैमिली कोर्ट से राहत पाने से इंकार होने के बाद मामला अपील के जरिए छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट पहुंचा।
हाई कोर्ट की खंडपीठ ने न्यायिक कार्यवाही के दौरान पूरे घटनाक्रम और साक्ष्यों का परीक्षण किया। अदालत ने पाया कि पत्नी को निरंतर अपमानित करना तथा उसकी बहनों को फोन पर अपशब्द कहकर प्रताड़ित करना स्पष्ट रूप से मानसिक क्रूरता है। अदालत ने फैमिली कोर्ट के आदेश को निरस्त कर दिया और दिसंबर 2021 में हुए इस वैवाहिक संबंध को समाप्त करने का अंतिम आदेश पारित किया।



