सूखी नदी में अपमाजनक तरीके से छोड़नी पड़ी थीं गणेश जी की प्रतिमायें, 24 घंटे में हुई मूसलाधार बारिश से जलमग्न हुए बप्पा, भक्तों ने बताया चमत्कार।

अमरावती/अनंतपुर (आंध्रप्रदेश) : आस्था और विज्ञान के बीच हमेशा से ही विवाद चलता आया ऐसे में कई बार ऐसी घटनायें सामने आती रहती है, जिसमें आस्था प्रबल होती है और विज्ञान उसका प्रतिकार करता है, वहीँ अब जब देश भर में इस समय गणेश उत्सव की धूम मची हुई है। घरों और पूजा पंडालों में विधि-विधान से बप्पा की पूजा-अर्चना के बाद प्रतिमाओं के विसर्जन का सिलसिला जारी है। इस बीच आंध्र प्रदेश के अनंतपुर जिले से गणेश विसर्जन की एक हैरान करने वाली तस्वीर सामने आई है। यहां सूखे के गंभीर संकट के कारण श्रद्धालुओं को गणेश प्रतिमाएं सूखी नदियों और नहरों में छोड़ने पर विवश होना पड़ा।

इस मामले को लेकर वाईएसआर कांग्रेस पार्टी (YSRCP) के अध्यक्ष वाईएस जगन मोहन रेड्डी और उनकी पार्टी ने मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू के नेतृत्व वाली गठबंधन सरकार पर तीखा हमला बोला है। दरअसल, यह मामला सितंबर 2026 में गणेश विसर्जन उत्सव के दौरान सामने आया, जब रायलसीमा क्षेत्र से विचलित करने वाले वीडियो सामने आए। पुतलुरु और सिंगनमाला जैसे क्षेत्रों में पानी की भारी कमी के कारण चित्रावती नदी और स्थानीय नहरें पूरी तरह सूख चुकी थीं। इससे श्रद्धालुओं को पूजा-पाठ के बाद अपनी गणपति प्रतिमाएं सूखी पड़ी नदी की तलहटी में ही छोड़ने पर मजबूर होना पड़ा।

गणेश प्रतिमा विसर्जन बना चुनौती

पानी की भीषण कमी ने रायलसीमा के कई हिस्सों में गणेश प्रतिमा विसर्जन के सामने एक बड़ी चुनौती खड़ी कर दी। विसर्जन के लिए पानी उपलब्ध न होने के कारण भक्त बड़ी मूर्तियों को सिंचाई के लिए बनी सूखी टंकियों, नहरों और नदी के तल में ही छोड़ने को मजबूर हो गए।

यह स्थिति क्षेत्र के कई हिस्सों में देखी गई, जिनमें पुतलूर और येल्लानूर मंडल प्रमुख रूप से शामिल हैं, जहां बड़ी मूर्तियों को सूखे जलाशयों में छोड़ दिया गया। सूखी टंकियों और नदी के तल में पड़ी इन मूर्तियों ने सूखे से प्रभावित इस क्षेत्र में पानी की गंभीर किल्लत की ओर सबका ध्यान खींचा है।

मूर्तियों की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, श्रद्धालु मूर्तियों को विसर्जन के लिए तय जलाशयों तक तो ले गए, लेकिन पानी की अनुपलब्धता के कारण आगे नहीं बढ़ सके। पानी की इस कमी का असर क्षेत्र में पेयजल की उपलब्धता पर भी पड़ा है। सूखे जलाशयों में छोड़ी गई बड़ी मूर्तियों की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं, जो विसर्जन प्रक्रिया के दौरान भक्तों को उठानी पड़ी परेशानियों को उजागर करते हैं।

इस बीच, प्रशासनिक अधिकारियों ने अनंतपुर शहर की मूर्तियों के विसर्जन के लिए आसपास के मंडलों और अन्य स्थानों पर मौजूद जलाशयों में व्यवस्था की, जो मूर्तियों के आकार पर निर्भर करती थी।

सूखी नदी में विसर्जन की मजबूरी

अनंतपुर का यह रायलसीमा क्षेत्र लंबे समय से सूखे और पानी की भारी किल्लत से जूझ रहा था। जब स्थानीय ग्रामीण और श्रद्धालु गणेशोत्सव के अंतिम दिनों में चित्रावती नदी (Chitravathi River) पर विसर्जन के लिए पहुंचे, तो नदी पूरी तरह सूखी पड़ी थी और वहां केवल सूखी रेत ही दिखाई दे रही थी।

रेत पर स्थापित की गईं मूर्तियां

पानी न होने के कारण निराश और भावुक श्रद्धालुओं के पास कोई दूसरा विकल्प नहीं था। उन्होंने भारी मन से भगवान गणेश की मूर्तियों को सूखी नदी के तल (रेत) पर ही स्थापित कर दिया और विघ्नहर्ता से मंगल की प्रार्थना की।