रायपुर : नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के आदेशानुसार 15 जून से 15 अक्टूबर तक छत्तीसगढ़ के सभी रेत घाट बंद रखने का प्रावधान है, लेकिन यह रोक केवल कागजों तक ही सीमित रही। हकीकत इसके बिल्कुल उलट है—राजधानी रायपुर में इन चार महीनों के दौरान रेत घाट बेरोकटोक संचालित होते रहे। वहीं दूसरी ओर, घाट बंद होने का हौव्वा खड़ा कर खनन माफियाओं और बिल्डिंग मटेरियल कारोबारियों ने रेत के दाम आसमान पर पहुंचा दिए।
शासन की सख्ती पर खनिज विभाग की ‘दिखावे की कार्यवाही’ :
अवैध उत्खनन को लेकर शासन स्तर पर गंभीरता बरती जा रही है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के निर्देश पर मुख्यमंत्री सचिवालय के अधिकारी पूरी स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। इसके बावजूद खनन माफियाओं और जिले में पदस्थ खनिज विभाग के अधिकारियों ने इसका तोड़ निकाल लिया है। महज दिखावे की कार्यवाही और नाममात्र का अर्थदंड वसूल कर जिम्मेदार सीधे तौर पर शासन के खजाने को चूना लगा रहे हैं।
ये हैं प्रमुख रेत घाट :
राजधानी रायपुर के आरंग क्षेत्र में संचालित प्रमुख रेत घाटों में कुरूद, हरदीडीह, चिखली ‘अ’, चिखली ‘ब’, लखना, कुम्हारी, कागदेही और पारागांव शामिल हैं, जिनकी नीलामी खनिज विभाग द्वारा की जा रही है। इनके अलावा कई अन्य रेत घाट पूरी तरह अवैध रूप से संचालित किए जा रहे हैं।
अनुमति सिर्फ 17 को, पर आरंग क्षेत्र में रेत के सैकड़ों डंप :
खनिज विभाग के रिकॉर्ड के अनुसार राजधानी रायपुर में केवल 17 लोगों को ही रेत भंडारण की वैध अनुमति मिली है। इसके विपरीत, आरंग क्षेत्र में तमाम रेत घाटों के इर्द-गिर्द रेत के सैकड़ों अवैध भंडारण खुलेआम देखे जा सकते हैं, जबकि 15 अक्टूबर की समय-सीमा अभी समाप्त भी नहीं हुई है। अवैध भंडारण करने वाले माफिया आपस में ही एक-दूसरे की शिकायतें अधिकारियों से करते रहे हैं। जून महीने में विभागीय अमले ने करीब चार अवैध भंडारण पकड़े भी थे, लेकिन ठोस कदम नहीं उठाए गए।
दिन-रात दौड़ रहे हाईवा-ट्रैक्टर, महानदी का स्वरूप बिगड़ा :
जून से लेकर अब तक रेत घाटों से अंधाधुंध निकासी जारी है। ठेकेदारों के ट्रक, हाईवा और ट्रैक्टर दिन-रात रेत ढो रहे हैं। आरंग के कुरूद, हरदीडीह, चिखली, पारागांव, समोदा, करमंदी और आसपास के गांवों में रेत के ऊंचे-ऊंचे अवैध ढेर लगे हुए हैं। नदी से कितनी रेत निकाली जा चुकी है, इसका कोई आधिकारिक हिसाब-किताब नहीं है। सितंबर में आई बाढ़ का पानी उतरते ही खनन माफिया फिर सक्रिय हो गए और महानदी की सूरत बिगाड़ कर रख दी। इस पूरे मामले में जिले का खनिज विभाग अब भी चुप्पी साधे बैठा है।



