छत्तीसगढ़ मौसम बुलेटिन : प्रदेश में बदला मौसमी तंत्र, मध्य क्षेत्रों में तीखी धूप और उमस तो बस्तर सहित दक्षिणी क्षेत्रों में वज्रपात व वर्षा का अलर्ट।

रायपुर : छत्तीसगढ़ में मानसून की विदाई के उपरांत मौसमी तंत्र में निरंतर उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। प्रदेश के दक्षिणी क्षेत्रों में जहां बादलों के डेरे के साथ वर्षा की गतिविधियां निरंतर दर्ज की जा रही हैं, वहीं मध्य एवं उत्तरी क्षेत्रों में सुबह के समय हल्की सिहरन और दोपहर में तीखी धूप के चलते गर्मी का दोहरा अहसास बना हुआ है। राजधानी रायपुर में लगातार तीसरे दिन अधिकतम तापमान सामान्य से काफी ऊपर दर्ज किया गया, जहां शनिवार को दिन का पारा 33.9 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, ओड़िशा तट एवं बंगाल की खाड़ी की ओर से आ रही नम हवाओं के प्रभाव से दक्षिण छत्तीसगढ़ के अधिकांश हिस्सों में अगले चार दिनों तक गरज-चमक के साथ आकाशीय बिजली गिरने (वज्रपात) और हल्की से मध्यम वर्षा होने की पूरी संभावना बनी रहेगी।

रायपुर मौसम : उमस भरी गर्मी के बीच आंशिक बादलों की आवाजाही :

राजधानी रायपुर में 18 अक्टूबर को दिनभर मौसम का मिजाज मिला-जुला रहने का अनुमान है। मौसम विज्ञान केंद्र, लालपुर के अनुसार:

  • आसमान की स्थिति: सुबह के वक्त आसमान मुख्य रूप से साफ रहेगा, जिससे तेज धूप खिलेगी। हालांकि दोपहर बाद अथवा शाम ढलते ही स्थानीय स्तर पर बादलों का जमावड़ा देखा जायेगा, जिससे उमस में तीव्र वृद्धि महसूस होगी।
  • तापमान का रुख: शहर का अधिकतम तापमान लगभग 34 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 24 डिग्री सेल्सियस के आसपास बने रहने का अनुमान है।
  • उमस का प्रभाव: बीते तीन दिनों से दिन के पारे में निरंतर हो रही बढ़ोतरी ने अक्टूबर के महीने में भी लोगों को पंखे और एयर कंडीशनर चलाने पर विवश कर दिया है। वातावरण में आर्द्रता अधिक होने के कारण दिन के समय उमस भरी गर्मी लोगों को बेचैन कर रही है।

ओड़िशा के रास्ते नम हवाओं का प्रवेश: दक्षिणी क्षेत्रों में 4 दिनों तक वज्रपात की चेतावनी

मौसम विभाग के अनुसार, वर्तमान में वायुमंडल के निचले स्तर पर पूर्वी और दक्षिण-पूर्वी नम हवाएं ओड़िशा सीमा के रास्ते दक्षिण छत्तीसगढ़ में निरंतर प्रवेश कर रही हैं। इस मौसमी प्रणाली के सक्रिय होने से बस्तर, सुकमा, बीजापुर और दंतेवाड़ा समेत सीमावर्ती क्षेत्रों में वायुमंडलीय अस्थिरता उत्पन्न हो गई है।

मौसम विभाग द्वारा जारी चेतावनी के प्रमुख बिंदु :

  • अगले चार दिनों के दौरान प्रदेश के दक्षिणी हिस्से में एक-दो स्थानों पर बादलों की तेज गर्जना और चमक के साथ वज्रपात होने तथा बहुत हल्की से हल्की वर्षा दर्ज की जायेगी।
  • आगामी तीन दिनों तक दक्षिणी क्षेत्रों के साथ-साथ मध्य छत्तीसगढ़ के भी इक्का-दुक्का स्थानों पर छिटपुट बौछारें पड़ने और आकाशीय बिजली चमकने की आशंका जताई गई है।
  • वज्रपात की आशंका को देखते हुए ग्रामीण और वनांचल क्षेत्रों में खेतों में काम करने वाले किसानों तथा खुले मैदानों में उपस्थित नागरिकों को विशेष सावधानी बरतने के निर्देश दिये गये हैं।

बीते 24 घंटों में वर्षा का लेखा-जोखा: पत्थलगांव और कुनकुरी में 3 सेमी दर्ज :

दक्षिण और उत्तर-पूर्वी छत्तीसगढ़ में लगातार नमी के प्रवेश से बीते 24 घंटों के दौरान कुछ क्षेत्रों में वर्षा दर्ज की गई है। मौसम विभाग से प्राप्त आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार:

  • पत्थलगांव और कुनकुरी: जशपुर जिले के पत्थलगांव और कुनकुरी में सर्वाधिक 3-3 सेंटीमीटर वर्षा रिकॉर्ड की गई।
  • भैरमगढ़: बस्तर संभाग के बीजापुर जिले स्थित भैरमगढ़ में 1 सेंटीमीटर वर्षा दर्ज की गई।
  • अन्य संभाग: शेष मैदानी व पठारी क्षेत्रों में मौसम पूर्णतः शुष्क रहा, जिसके परिणामस्वरूप दिन के तापमान में निरंतर वृद्धि देखी गई।

मौसम वैज्ञानिकों का अनुमान है कि 2 दिन बाद भी मौसमी परिस्थितियों में किसी बड़े बदलाव के आसार नहीं हैं और इसी प्रकार का खंडित मौसम बना रहेगा।

दोहरे मौसम का जनजीवन और स्वास्थ्य पर असर : सतर्कता बरतने की अपील

अक्टूबर माह में दिन के समय चिलचिलाती धूप और रात से भोर तक के तापमान में आ रही गिरावट के चलते दोहरे मौसम की स्थिति बन गई है। इस मौसमी बदलाव के कारण सर्दी, खांसी, जुकाम और वायरल बुखार के मरीजों की संख्या में तेजी से इजाफा हो रहा है।

चिकित्सकों ने नागरिकों को सलाह दी है कि वे दोपहर की तेज धूप और सुबह-शाम की ठंड से बचाव के लिये समुचित प्रबंध करें। वहीं, कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को सतर्क किया है कि जिन क्षेत्रों में धान की फसल पककर तैयार हो चुकी है, वहां किसान मौसम की स्थिति पर नजर रखें ताकि किसी भी संभावित वर्षा और आकाशीय बिजली से फसलों तथा मवेशियों को नुकसान न पहुंचे।