कंप्यूटर ग्राफिक्स से बनाई फर्जी फायर NOC, क्यूआर कोड स्कैन होते ही खुली पोल, मामला दर्ज होते ही संचालक राजू साहू फरार।

रायपुर : छत्तीसगढ़ के आरंग क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं और मरीजों की सुरक्षा को ताक पर रखकर गंभीर फर्जीवाड़ा करने का मामला सामने आया है। यहां स्थित राव हॉस्पिटल के संचालक राजू साहू ने अग्निशमन विभाग के सुरक्षा नियमों की अनदेखी करते हुए कंप्यूटर ग्राफिक्स की मदद से फर्जी फायर एनओसी (NOC) तैयार करवा ली। सुरक्षा ऑडिट के दौरान जब अधिकारियों ने एनओसी पर दर्ज क्यूआर कोड को ऑनलाईन सिस्टम से स्कैन किया, तब इस जालसाजी का भंडाफोड़ हुआ। मामले में आरंग थाना पुलिस ने अस्पताल संचालक के विरुद्ध मुकद्दमा दर्ज कर लिया है, जबकि आरोपी गिरफ्तारी के डर से फरार है।

रूटीन ऑडिट में क्यूआर कोड ने खोली पोल :

अग्निशमन विभाग और एसडीआरएफ (SDRF) की संयुक्त टीम नियमित सुरक्षा ऑडिट के लिये जब राव हॉस्पिटल पहुंची, तो अस्पताल प्रबंधन ने अधिकारियों को फायर एनओसी की प्रति सौंपी। दस्तावेजों की सूक्ष्म जांच के दौरान अधिकारियों को गड़बड़ी की आशंका हुई। प्रमाण पत्र पर एनओसी जारी होने की तारीख 16 अप्रैल 2026 दर्ज थी। संदेह गहराने पर जब अधिकारियों ने दस्तावेज पर छपे क्यूआर कोड को स्कैन किया, तो ऑनलाईन पोर्टल पर वास्तविक तारीख 16 अप्रैल 2025 प्रदर्शित हुई। इससे स्पष्ट हो गया कि एनओसी का नवीनीकरण कराने के बजाय पुरानी एनओसी में कूटनीतिक हेराफेरी की गई थी।

काल्पनिक अधिकारी के नाम और हस्ताक्षर का सहारा :

जांच में यह भी खुलासा हुआ कि एनओसी में जांच अधिकारी के रूप में ‘पुरुषोत्तम सिंह’ का नाम दर्ज किया गया था, जबकि इस नाम का कोई भी अधिकारी अग्निशमन विभाग में कभी पदस्थ ही नहीं रहा। यही नहीं, जिस तिथि पर हस्ताक्षर अंकित थे, उस दौरान संबंधित पद रिक्त था। अस्पताल संचालक ने अपने निजी फायदे और वैधानिक औपचारिकताओं से बचने के लिये कंप्यूटर ग्राफिक्स के जरिये यह कूटरचित प्रमाण पत्र तैयार किया था।

बीएनएस की धारा 318(4) के तहत मुकद्दमा, ग्राफिक्स डिजाइनर पर भी होगी कार्यवाही :

न्यू रायपुर फायर ब्रिगेड के निरीक्षक पुष्पराज विनायक की शिकायत पर आरंग थाना पुलिस ने मुख्य आरोपी राजू साहू के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318(4) के तहत धोखाधड़ी का मुकद्दमा दर्ज कर लिया है। पुलिस अब उस कंप्यूटर सेंटर व ग्राफिक्स डिजाइनर की भी पड़ताल कर रही है, जिसकी मदद से यह फर्जी प्रमाण पत्र तैयार किया गया था। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि फर्जी दस्तावेज बनाने और उसका उपयोग करने वाले, दोनों पक्षों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्यवाही की जायेगी।

मरीजों की जिंदगी से खिलवाड़, जिले का पहला मामला :

जिला सेनानी एवं फायर ऑफिसर पुष्पराज सिंह ने बताया कि व्यावसायिक और चिकित्सकीय संस्थानों में आग से बचाव के लिये प्रतिवर्ष फायर एनओसी लेना अनिवार्य है। इससे पूर्व बिलासपुर और अंबिकापुर में इस तरह के मामलों में गिरफ्तारियां हुई थीं, लेकिन रायपुर जिले में फर्जी एनओसी का यह पहला प्रकरण सामने आया है। अस्पताल प्रबंधन द्वारा आगजनी से निपटने के वास्तविक पुख्ता इंतजाम किए बिना ही मरीजों और परिजनों की जान जोखिम में डाली जा रही थी। पुलिस टीमें फरार आरोपी की तलाश में क्षेत्र में दबिश दे रही हैं और उसे जल्द ही गिरफ्तार कर लिया जायेगा।