ओड़िशा की नदियों में मगरमच्छों का बढ़ता आतंक: जाजपुर में बुजुर्ग को खींच ले गया खूंखार मगरमच्छ, 24 घंटे बाद बरामद हुआ शव; बौद्ध में भाइयों ने 90 मिनट के संघर्ष के बाद जबड़े से बचाई जान
जाजपुर/बौद्ध (ओड़िशा) : ओड़िशा के तटीय और नदीय मैदानी क्षेत्रों में मगरमच्छों के हिंसक हमलों की बढ़ती घटनाओं से नदी किनारे बसे ग्रामीणों का जीवन संशय और भय के साये में आ गया है। जाजपुर जनपद अंतर्गत खरस्रोता नदी में जहां नित्यकर्म के लिये गए एक बुजुर्ग को मगरमच्छ ने गहरे जल में खींचकर अपना शिकार बना लिया, वहीं बौद्ध जनपद में महानदी के घाट पर दो भाइयों ने अदम्य साहस का परिचय देते हुए करीब डेढ़ घंटे तक मगरमच्छ से भीषण संघर्ष कर अपने भाई को मौत के जबड़ों से सुरक्षित निकाल लिया। इन लगातार सामने आ रही हृदयविदारक घटनाओं के बाद समूचे तटीय ग्रामीण क्षेत्र में हड़कंप मच गया है तथा स्थानीय जलस्रोतों पर आश्रित दैनिक गतिविधियां पूरी तरह से प्रभावित हो गई हैं।
खरस्रोता नदी के कछार में बुजुर्ग का शिकार :
पानिकोइली थाना क्षेत्र अंतर्गत बरेई गांव में उस समय मातम और दहशत फैल गई, जब गांव के वयोवृद्ध नागरिक गजेंद्र माझी शनिवार को नदी में मगरमच्छ के हमले का शिकार हो गए। मिली विस्तृत जानकारी के अनुसार, गजेंद्र माझी रोजमर्रा के आवश्यक कार्यों के लिये खरस्रोता नदी के तट पर गए हुए थे। इसी दौरान जलस्तर के भीतर छिपे एक विशालकाय मगरमच्छ ने अचानक उन पर प्राणघातक हमला बोल दिया और उन्हें अपने शक्तिशाली जबड़ों में जकड़कर गहरे जलप्रवाह की ओर खींच ले गया।
घटना की प्रत्यक्ष जानकारी मिलते ही पूरे क्षेत्र में भारी अफरा-तफरी मच गई। ग्रामीणों के शोर मचाने पर आनन-फानन में रसूलपुर अग्निशमन सेवा दल को सूचित किया गया। दमकल विभाग और आपदा प्रबंधन की टीमों ने मोटर बोट्स तथा स्थानीय गोताखोरों की सहायता से नदी के तेज बहाव में बुजुर्ग की तलाश के लिये व्यापक रेस्क्यू अभियान प्रारंभ किया। पहले दिन देर शाम तक चले सघन तलाशी अभियान के बावजूद गजेंद्र माझी का कोई सुराग नहीं मिल सका, जिसके चलते अंधेरा घिरने पर खोज अभियान को अस्थायी रूप से स्थगित करना पड़ा।
अगले दिन सुबह होते ही राहत एवं बचाव दल ने नए सिरे से नदी के बहाव क्षेत्र में तलाशी अभियान शुरू किया। अंततः घटनास्थल से कुछ दूरी पर स्थित साहापुर पुल के पास नदी के किनारे गजेंद्र माझी का क्षत-विक्षत शव बरामद किया गया। स्थानीय ग्रामीणों द्वारा शव देखे जाने के तत्काल बाद पानिकोइली थाना पुलिस को सूचना दी गई। पुलिस दल ने मौके पर पहुंचकर शव को अपने अधिकार में लिया और पंचनामा भरकर अंत्यपरीक्षण (पोस्टमार्टम) के लिये जिला मुख्यालय अस्पताल भेज दिया। पुलिस प्रशासन द्वारा मामले में विधिक कार्यवाही की जा रही है।
गौरतलब है कि खरस्रोता नदी के इस तटीय क्षेत्र में बीते एक महीने के भीतर मगरमच्छ के जानलेवा हमले की यह दूसरी गंभीर वारदात है। लगातार घटित हो रही इन घटनाओं से नदी के समीपस्थ गांवों के निवासियों में भारी रोष और भय व्याप्त है। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि कृषि कार्य, घरेलू उपयोग, स्नान तथा पशुओं को पानी पिलाने के लिये नदी ही एकमात्र प्रमुख साधन है। ऐसे में जल में मगरमच्छों की अनियंत्रित आमद ने ग्रामीणों की बुनियादी दिनचर्या को ठप्प प्राय स्थिति में पहुंचा दिया है।
महानदी के घाट पर डेढ़ घंटे तक चला जीवन-मौत का संग्राम :
वहीं दूसरी ओर, ओड़िशा के बौद्ध जनपद स्थित हरभंगा ब्लॉक से रोंगटे खड़े कर देने वाला एक ऐसा मामला प्रकाश में आया, जहां मृत्यु के मुंह में समा चुके एक युवक को उसके परिजनों ने साहस के बल पर वापस खींच लिया। मराड़ा महानदी घाट पर मराड़ा गांव निवासी सुधीर बेहरा नदी के किनारे आवश्यक नित्यकर्म के लिये गए थे। जैसे ही वह जल के समीप पहुंचे, पानी के भीतर घात लगाकर बैठे मगरमच्छ ने अप्रत्याशित हमला करते हुए सुधीर के पैर को अपने जबड़ों में जकड़ लिया और उन्हें नदी की अगाध गहराइयों में खींचने का प्रयास करने लगा।
सुधीर की चीख-पुकार और प्राण रक्षा की गुहार सुनकर तट के समीप मौजूद उनके सगे भाई छबिंद्र बेहरा और रिश्तेदार भाई प्रमोद प्रधान बिना एक क्षण गंवाए अपनी जान जोखिम में डालकर उफनती नदी में कूद पड़े। दोनों भाइयों ने सुधीर को बचाने के लिये भारी पत्थरों, लकड़ी के लट्ठों और नंगे हाथों से मगरमच्छ की संवेदनशील आंखों और थूथन पर प्रहार करना शुरू किया। जल के भीतर यह असमान और रोंगटे खड़े करने वाला संघर्ष लगभग 90 मिनट (डेढ़ घंटे) तक निरंतर चलता रहा।
छबिंद्र और प्रमोद के निरंतर प्रतिरोध और तीखे प्रहारों के आगे अंततः मगरमच्छ को अपनी पकड़ ढीली करनी पड़ी और वह गहरे पानी की ओर लौट गया। दोनों जांबाज भाइयों ने गंभीर रूप से लहूलुहान सुधीर को नदी से बाहर निकाला। सुधीर के शरीर पर मगरमच्छ के नुकीले दांतों के गहरे घाव आए हैं। ग्रामीणों की सहायता से तत्काल उन्हें निकटवर्ती प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया गया, जहां से प्राथमिक उपचार के उपरांत उन्हें बेहतर चिकित्सकीय देखभाल के लिये जिला चिकित्सालय स्थानांतरित किया गया। इस असाधारण शौर्य और सूझबूझ की पूरे जनपद में सराहना की जा रही है।
जलस्रोतों पर सुरक्षा बाड़े का अभाव :
ओड़िशा की प्रमुख नदियों—विशेषकर खरस्रोता, ब्राह्मणी और महानदी बेसिन—में मगरमच्छों के हमलों की बढ़ती आवृत्ति ने वन विभाग और स्थानीय प्रशासन की तैयारियों की पोल खोल दी है। विशेषज्ञों के अनुसार, नदी तंत्र में प्राकृतिक शिकार की कमी, जलस्तर में उतार-चढ़ाव और जलीय परिक्षेत्रों में मानवीय दखल के कारण यह मानव-वन्यजीव संघर्ष भयावह रूप धारण करता जा रहा है।
तटीय ग्रामीण क्षेत्रों के निवासियों ने वन विभाग से मांग की है कि :
- सर्वाधिक संवेदनशील स्नान घाटों पर लोहे की मजबूत जालियों (रिफ्यूज एनक्लोजर) का निर्माण अविलंब कराया जाये, जिससे ग्रामीण सुरक्षित रूप से जल का उपयोग कर सकें।
- नदी तटों पर दृश्य चेतावनी संकेत बोर्ड स्थापित किये जायें और लाउडस्पीकर के माध्यम से निरंतर मुनादी कराई जाये।
- मगरमच्छों के आतंक से प्रभावित नदीय क्षेत्रों में वन रक्षकों की नियमित गश्त सुनिश्चित की जाये तथा आक्रामक मगरमच्छों को रेस्क्यू कर सुरक्षित प्राकृतिक अभयारण्यों में स्थानांतरित किया जाये।
- पीड़ित परिवारों को बिना किसी हीला-हवाली के वन विभाग के आपदा राहत कोष से त्वरित आर्थिक सहायता और मुआवजा राशि प्रदान की जाये।
जब तक शासन-प्रशासन द्वारा इस दिशा में कोई ठोस और स्थायी कार्यवाही सुनिश्चित नहीं की जाती, तब तक नदी किनारे बसे हजारों ग्रामीणों के लिये अपनी ही जीवनदायिनी नदियों के तट पर जाना जान को दांव पर लगाने के समान बना रहेगा।



