सीएमडी कॉलेज के पास गुपचुप खाने से एक ही परिवार के सात सदस्य फूड पॉइजनिंग के शिकार, 6 वर्षीय मासूम आईसीयू में भर्ती।

बिलासपुर : छत्तीसगढ़ की न्यायधानी बिलासपुर में त्यौहारी माहौल के दौरान दूषित खानपान के चलते एक गंभीर स्वास्थ्य संकट खड़ा हो गया है। सकरी थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ग्राम परसदा से दुर्गाष्टमी का पर्व मनाने शहर पहुंचे एक ही परिवार के सात सदस्य विषाक्त गुपचुप (पानीपूरी) खाने के कारण गंभीर रूप से बीमार हो गये। पीड़ितों में महेश साहू, उनकी धर्मपत्नी संतोषी साहू और मासूम बच्चों सहित कुल सात लोग शामिल हैं। घटना के उपरांत सभी को तत्काल उपचार के लिये छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान (सिम्स) अस्पताल के आपातकालीन वार्ड में दाखिल कराया गया है। इनमें तीन बच्चों की शारीरिक स्थिति अत्यधिक चिंताजनक बनी हुई है, जबकि छह वर्ष के एक मासूम बालक की हालत नाजुक होने के कारण उसे विशेष निगरानी में एनआईसीयू (आईसीयू) में स्थानांतरित किया गया है। चिकित्सकों की एक विशेष मेडिकल टीम लगातार बच्चों के स्वास्थ्य पर नजर बनाये हुए है।

सीएमडी कॉलेज के समीप स्थित फास्ट-फूड ठेले पर खाया था गुपचुप :

विस्तृत विवरण के अनुसार, सकरी क्षेत्र के परसदा निवासी महेश साहू अपने पूरे परिवार और बच्चों के साथ अष्टमी के पावन अवसर पर त्यौहारी चहल-पहल देखने और मनोरंजन के लिये बिलासपुर शहर आये थे। भ्रमण के दौरान रात्रि में परिवार ने सीएमडी कॉलेज परिसर के पास संचालित एक ठेले पर रुककर गुपचुप का स्वाद लिया था। ठेले पर तीखा पानी और खाद्य सामग्री ग्रहण करने के पश्चात पूरा परिवार देर रात अपने गृह ग्राम परसदा लौट गया। परिजनों ने बताया कि अगली सुबह सोकर उठते ही परिवार के सदस्यों को पेट में असहनीय मरोड़, तेज दर्द, जी मिचलाने और लगातार उल्टी की गंभीर शिकायत शुरू हो गई। देखते ही देखते घर के सभी सात सदस्यों की शारीरिक दशा तेजी से बिगड़ने लगी और वे भीषण डिहाइड्रेशन की चपेट में आ गये।

सिम्स अस्पताल में मची अफरा-तफरी, चिकित्सकों ने स्थिति संभाली :

गांव में एक साथ इतने लोगों की तबीयत बिगड़ने से अफरा-तफरी का माहौल निर्मित हो गया। पड़ोसियों और परिजनों की सहायता से सभी पीड़ितों को बिना विलंब किये तत्काल सिम्स अस्पताल पहुंचाया गया। अस्पताल पहुंचते ही मेडिकल स्टाफ ने त्वरित उपचार शुरू किया। अस्पताल के वरिष्ठ शिशु रोग विशेषज्ञों ने परीक्षण के उपरांत बताया कि वयस्कों की तुलना में बच्चों पर दूषित पानी और अस्वच्छ खाद्य पदार्थों का प्रभाव अत्यंत तीव्र हुआ है। भर्ती कराये गये सात मरीजों में तीन बच्चों की हालत ज्यादा नाजुक बनी हुई है। हालांकि चिकित्सकों ने किसी बड़े अनहोनी खतरे से इंकार करते हुए स्पष्ट किया है कि छह वर्षीय बच्चे की स्थिति उपचार के बाद फिलहाल स्थिर है और उसे खतरे से बाहर निकालने के लिये निरंतर सघन चिकित्सा प्रदान की जा रही है।

खाद्य सुरक्षा विभाग और नगर निगम की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल :

त्यौहारी सीजन में शहर के प्रमुख चौराहों और शैक्षणिक संस्थानों के आसपास बिना किसी स्वच्छता मानक के धड़ल्ले से संचालित हो रहे खानपान के ठेलों पर अब स्थानीय नागरिकों ने कड़ा आक्रोश व्यक्त किया है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि सीएमडी कॉलेज जैसे व्यस्त शैक्षणिक क्षेत्र में प्रतिदिन सैकड़ों छात्र-छात्राएं और आम राहगीर खानपान के लिये आते हैं, किंतु यहां खाद्य सुरक्षा नियमों का खुला उल्लंघन होता है। नागरिकों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि जनस्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ करने वाले ऐसे लापरवाह ठेला संचालकों और खाद्य सुरक्षा नियमों की अनदेखी करने वाले आरोपियों के विरुद्ध सख्त मुकद्दमा दर्ज कर कड़ी प्रशासनिक कार्यवाही सुनिश्चित की जाये। खाद्य एवं औषधि प्रशासन की टीम द्वारा संबंधित ठेले से पानी और मसालों के नमूने एकत्र किये जायेंगे, जिन्हें गहन सूक्ष्मजीव परीक्षण के लिये राज्य खाद्य प्रयोगशाला भेजा जायेगा।

जनस्वास्थ्य सुरक्षा के लिये सावधानी बरतने की विशेष अपील :

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग ने नागरिकों से अपील की है कि वे त्यौहारी मौसम में खुले में बिकने वाले अस्वास्थ्यकर खाद्य पदार्थों, कटे हुए फलों और दूषित पानी से बनी सामग्रियों के सेवन से पूरी तरह परहेज करें। अधिकारियों ने कहा कि संक्रमण से बचाव के लिये प्रत्येक नागरिक अपनी सजगता और जिम्मेदारी निभायें। साथ ही प्रशासन ने आश्वस्त किया है कि शहर के सभी प्रमुख खानपान केंद्रों और ठेलों पर स्वास्थ्य मानकों की जांच के लिये सघन निरीक्षण अभियान चलाया जायेगा, जिससे भविष्य में इस प्रकार की अवांछित घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।