मुंबई (महाराष्ट्र) : बॉलीवुड अभिनेता टाइगर श्रॉफ पर हुए हमले के कुछ ही देर बाद लॉरेंस बिश्नोई गैंग के सहयोगी अनिल पंडित ने इसकी ज़िम्मेदारी ली और एक ऑडियो संदेश भी जारी किया। ऐसे में यह बड़ा सवाल उठना लाज़िम है कि जब गैंग का सरगना लॉरेंस बिश्नोई गुजरात की साबरमती जेल के हाई-रिस्क सिक्योरिटी वार्ड में बंद है, तो इस नेटवर्क को आखिर कौन संचालित कर रहा है? यह सवाल इसलिये भी अहम हो जाता है क्योंकि लॉरेंस के बाद कमान संभालने वाले उसके भाई अनमोल बिश्नोई को भी इसी वर्ष कैलिफ़ोर्निया से गिरफ्तार कर देश की सुरक्षा एजेंसियां एक बड़े ऑपरेशन के तहत भारत ला चुकी हैं।
शीर्ष सूत्रों के अनुसार, लॉरेंस गैंग के खास सहयोगियों की एक ‘सीक्रेट कैबिनेट’ है, जो विदेशों में सुरक्षित स्थानों पर बैठकर पूरे आपराधिक ऑपरेशन्स को अंजाम दे रही है।
लॉरेंस गैंग की ‘सीक्रेट कैबिनेट’ के मुख्य चेहरे :
- रणदीप मलिक
- टाइसन बिश्नोई
- अनिल पंडित
- हैरी बॉक्सर
- हरमन संधू
- गोल्डी ढिल्लों
- आरज़ू बिश्नोई
- शुभम लोंकर
- हिमांशु सोनीपत
कैसे काम करती है यह ‘सीक्रेट कैबिनेट’?
- लॉजिस्टिक्स और नई भर्तियां: इस सीक्रेट कैबिनेट का मुख्य काम गैंग को लॉजिस्टिक्स सपोर्ट मुहैया कराना और गैंग में नये लड़कों को शामिल करना है। ये सभी सदस्य डिजिटल माध्यमों से आपस में स्क्रीनशॉट और सूचनाएं साझा करते हैं।
- रणनीति और फंडिंग: आरज़ू बिश्नोई, शुभम लोंकर और रणदीप मलिक का एक अलग गुट है, जो सिंडिकेट की रणनीति तैयार करने, फंडिंग जुटाने और टारगेट चुनने का काम संभालता है।
- विदेशों में नेटवर्क विस्तार: अनमोल बिश्नोई की गिरफ्तारी के बाद अपराध का दायरा कमजोर न पड़े, इसके लिये रणदीप मलिक, हैरी बॉक्सर, आरज़ू बिश्नोई, अनिल पंडित, हरमन संधू और शुभम लोंकर ने भारत से लेकर विदेशों तक नेटवर्क की पूरी बागडोर संभाल ली है।
रणदीप मलिक और अनिल पंडित का बढ़ता वर्चस्व :
हरियाणा के पानीपत का निवासी अनिल पंडित, पंजाबी गायक सिद्धू मूसेवाला हत्याकांड के एक वर्ष बाद कनाडा के रास्ते अमेरिका फरार हो गया था। सूत्रों की मानें तो अनिल पंडित को भारत से विदेश भगाने में लॉरेंस गैंग के सहयोगी रणदीप मलिक ने ही मदद की थी।
वर्ष 2025 के नवंबर से रणदीप मलिक का गैंग में प्रभाव लगातार बढ़ता चला गया। वहीं, विदेश में छिपे अनिल पंडित का नाम भी नवंबर 2025 से गैंग की हर बड़ी गतिविधियों में सामने आने लगा। जनवरी 2026 से अनिल पंडित ने रणदीप मलिक के साथ मिलकर ट्रेनिंग ली। दिल्ली, हरियाणा और चंडीगढ़ में हत्याओं से लेकर क्लबों पर ग्रेनेड हमलों तक की वारदातों में रणदीप मलिक का हाथ रहा है।
ग्लोबल स्तर पर फैला सिंडिकेट :
लॉरेंस गैंग पिछले कई वर्षों से अपने नेटवर्क का अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर विस्तार कर रहा है। यह सिंडिकेट अब यूएसए, कैलिफ़ोर्निया, पुर्तगाल, यूरोप, यूके, अज़रबैजान और कनाडा से लेकर भारत के हरियाणा, दिल्ली, पंजाब और राजस्थान क्षेत्र तक फैल चुका है, जिसे मुख्य रूप से अनिल पंडित और रणदीप मलिक ऑपरेट कर रहे हैं।
गैंग की विचारधारा, प्रतिद्वंद्विता और हमले का कारण :
टाइगर श्रॉफ पर हमला क्यों?: यह सिंडिकेट बॉलीवुड अभिनेता सलमान खान के साथ काम करने वालों को लगातार चेतावनियां देता रहा है। सूत्रों के मुताबिक, सलमान खान के साथ काम करने के विरोध के चलते ही टाइगर श्रॉफ पर यह हमला करवाया गया है।
भगत सिंह के नाम का सहारा: लॉरेंस बिश्नोई और उसके गिरोह के सदस्य खुद को शहीद भगत सिंह का सच्चा अनुयायी बताते हैं। जेल से तस्वीरों या बयानों में भगत सिंह का नाम भुनाया जाता रहा है, हालांकि जेल प्रशासन ने ऐसे प्रतीकों वाले कपड़ों पर रोक लगा रखी है। कानूनी विशेषज्ञों और आलोचकों का स्पष्ट कहना है कि किसी अपराधी की तुलना स्वतंत्रता सेनानी से कतई नहीं की जा सकती।
दाऊद सिंडिकेट से विरोध: लॉरेंस गैंग अपने बयानों और संदेशों में अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम और उसकी अवैध गतिविधियों (जैसे ड्रग्स तस्करी व देशविरोधी फंडिंग) का विरोध करने का दावा करता है। गिरोह खुद को राष्ट्रहित और तथाकथित ‘गद्दारों’ के खिलाफ लड़ने वाला प्रस्तुत करता है, जबकि सुरक्षा एजेंसियां इसे केवल जबरन वसूली (एक्सटॉर्शन) और हत्याओं का आपराधिक गिरोह मानती हैं।
अन्य गिरोहों से अदावत: दाऊद गिरोह के अलावा दिल्ली का नीरज बवाना गैंग और पंजाब का बंबीहा गैंग भी लॉरेंस बिश्नोई के कट्टर विरोधियों में शामिल हैं।



