रायपुर में जर्जर मकान ढहने से हड़कंप: 50 से अधिक घरों की बत्ती गुल, मलबे से रास्ते बंद, नगर निगम की कार्यवाही पर उठे सवाल, डॉ. कुकरेजा का था मकान।

रायपुर : राजधानी रायपुर में जर्जर मकानों को लेकर नगर निगम की कार्यवाही पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। बूढ़ापारा क्षेत्र में सोमवार को एक पुराने मकान को तोड़ने के दौरान उसका एक हिस्सा भरभराकर ढह गया। मलबे के सड़क पर गिरने से आसपास के कई रास्ते पूरी तरह बंद हो गए, वहीं 50 से ज्यादा घरों की बिजली गुल हो गई। इस हादसे के बाद स्थानीय रहवासियों में भारी आक्रोश है। प्रत्यक्षदर्शियों का आरोप है कि मकान ढहते ही वहां काम कर रहे मजदूर और ठेकेदार मौके से फरार हो गए। यह पूरा मामला कोतवाली थाना क्षेत्र का है।

पुराने मकान को तोड़ने के दौरान हुआ हादसा :

जानकारी के अनुसार, बूढ़ापारा में डॉ. कुकरेजा के पुराने मकान को राजधानी ज्वेलर्स ने खरीदा था। इस भवन को डिस् dismantle करने (तोड़ने) का काम चल रहा था, तभी अचानक उसका एक बड़ा हिस्सा भरभराकर गिर पड़ा। भारी मात्रा में मलबा सड़क पर फैलने के कारण आवागमन बुरी तरह प्रभावित हुआ। इसके साथ ही विद्युत आपूर्ति बाधित होने से क्षेत्रवासियों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। हादसे के बाद स्थानीय नागरिकों ने सुरक्षा मानकों की अनदेखी और मौके पर जिम्मेदार अधिकारियों की अनुपस्थिति को लेकर कड़ा विरोध जताया।

150 से अधिक जर्जर भवन चिह्नित, 35 बेहद खतरनाक श्रेणी में :

राजधानी में जर्जर भवनों से मंडराता खतरा कोई नया नहीं है। नगर निगम के रिकॉर्ड के अनुसार, शहर में 150 से अधिक जर्जर भवन चिह्नित किये गये थे, जिनमें से 35 से ज्यादा अति जर्जर हैं और जिन्हें तत्काल हटाया जाना बेहद जरूरी है। इन इमारतों में सदर बाजार, मालवीय रोड-गोलबाजार, फूल चौक, सद्दानी चौक-बूढ़ापारा, सत्ती बाजार और बैजनाथपारा जैसे घनी आबादी वाले व्यस्त क्षेत्र शामिल हैं। इसके बावजूद नगर निगम की कार्यवाही अब तक केवल नोटिस थमाने, मामूली जुर्माना लगाने और मालिकों को स्वयं के खर्च पर भवन ढहाने का निर्देश देने तक ही सीमित बनी हुई है।

बजट का हवाला देकर पल्ला झाड़ रहा निगम :

निगम अधिकारियों ने पूर्व में यह तर्क दिया था कि जर्जर भवनों को गिराने के लिये प्रशासन के पास अलग से कोई बजट उपलब्ध नहीं है। ऐसे में बूढ़ापारा की घटना ने एक बार फिर यह प्रश्न खड़ा कर दिया है कि आम जनता के सिर पर मंडराते इस खतरे को हटाने की जिम्मेदारी आखिर कौन निभाएगा। नोटिस जारी होने के बावजूद यदि भवन मालिक कदम नहीं उठाते, तो निगम की निगरानी व्यवस्था और समय पर कार्यवाही का तंत्र कितना ढुलमुल है, यह गहन जांच का विषय बन गया है।

ध्वस्तीकरण और सुरक्षा मानकों की जांच जरूरी :

बूढ़ापारा में ध्वस्तीकरण के दौरान सुरक्षा प्रोटोकॉल की धज्जियां उड़ने, रास्ते बंद होने और बड़े पैमाने पर बिजली गुल होने की घटना ने सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी है। अब यह जांच का विषय है कि क्या काम शुरू करने से पहले एहतियाती उपाय किये गये थे या नहीं। नगर निगम को अब केवल नोटिस भेजने के बजाय जर्जर भवनों की सूची की पुनर्समीक्षा कर, उन्हें सुरक्षित ढंग से हटाने की ठोस नीति और कड़े सुरक्षा मानकों के तहत स्पष्ट कार्यवाही सुनिश्चित करनी होगी।