नई दिल्ली : रूस-यूक्रेन संघर्ष एवं खाडी देशों में बढते तनाव की पृष्ठभूमि में अमेरिका, ब्रिटेन, जापान तथा यूरोपीय देशों ने आपातकालीन परिस्थितियों का सामना करने के लिये व्यापक स्तर पर पूर्वसिद्धता आरंभ कर दी है । युद्ध की बढती संभावना, संभावित साईबर आक्रमण एवं वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला बाधित होने के संकट को देखते हुए इन देशों ने सेना के साथ सामान्य नागरिकों को भी सतर्क रहने की सूचना दी है ।
अमेरिकी सैन्य अड्डों के लिये 90 दिनों की विशेष योजना :
अमेरिका के रक्षा मंत्रालय (पेंटागन) ने अपने सभी प्रमुख सैन्य अड्डों के लिये ‘फोर्ट्रेस’ नामक विशेष आपातकालीन योजना लागू की है । इस योजना के अनुसार शत्रु राष्ट्रों द्वारा किये जानेवाले साईबर आक्रमण अथवा विद्युत संयंत्रों पर आक्रमण के कारण बिजली एवं जलापूर्ति बाधित होने की स्थिति में सैन्य अड्डों को न्यूनतम 90 दिनों तक किसी भी बाहरी सहायता के बिना आत्मनिर्भर रहना होगा । इसके लिये सैन्य अड्डों पर ईंधन, औषधियां एवं खाद्य पदार्थों का पर्याप्त भंडार रखने का आदेश दिया गया है ।
ब्रिटेन में नागरिकों से 72 घंटों के लिये आवश्यक सामग्री का भंडार रखने का आवाहन :
ब्रिटेन सरकार ने नागरिकों के लिये ‘बी रेडी’ नामक जनजागृति अभियान आरंभ किया है । युद्ध की संभावना अथवा किसी बडी डिजिटल आपदा के समय न्यूनतम 3 दिनों (72 घंटों) तक घर में ही रहना संभव हो, इसके लिये प्रशासन ने नागरिकों से पीने का पानी, शीघ्र खराब न होनेवाले खाद्य पदार्थ, टॉर्च, प्राथमिक उपचार सामग्री, पावर बैंक, नकद धनराशि एवं रेडियो तैयार रखने का आवाहन किया है ।
जापान में प्राकृतिक आपदाओं एवं युद्ध का सामना करने के लिये दोहरी पूर्वसिद्धता :
जापान सरकार ने नागरिकों को न्यूनतम 3 से 7 दिनों के लिये आवश्यक आपातकालीन सामग्री का भंडार रखने का निर्देश दिया है । प्रत्येक व्यक्ति के लिये प्रतिदिन 3 लीटर पानी, सूखे खाद्य पदार्थ एवं पोर्टेबल टॉयलेट बैग रखने की सूचना दी गई है । क्षेत्रीय तनाव के अतिरिक्त भूकंप एवं माउंट फुजी ज्वालामुखी के संभावित विस्फोट का सामना करने के लिये भी यह पूर्वसिद्धता की जा रही है ।
वैश्विक चिंता का कारण :
अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों के अनुसार वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में केवल प्रत्यक्ष युद्ध ही नहीं, अपितु समुद्र के नीचे बिछी इंटरनेट केबलों, विद्युत संयंत्रों एवं डिजिटल वित्तीय प्रणालियों पर होनेवाले साईबर आक्रमण भी बडी चुनौतियां बन गए हैं । इसके अतिरिक्त जलवायु परिवर्तन के कारण आनेवाली प्राकृतिक आपदाओं को देखते हुए विश्वभर की सरकारें अपने-अपने देशों में आपातकालीन व्यवस्थाओं को सुसज्जित कर रही हैं ।
आपातकालीन तैयारियों पर भारत का रुख :
विश्व के देश आपातकालीन स्थिति का सामना करने के लिये पूर्वसिद्धता कर रहे हैं, जबकि भारत इससे अनभिज्ञ ही दिखाई दे रहा है । ऐसे में भविष्य में कोई संकट आने पर देश की जनता एवं सभी राजनीतिक दलों की सरकारों की क्या स्थिति होगी?, इसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती ।
सामान्यतः पाश्चात्य देशों का अंधानुकरण करनेवाले भारतीय इस विषय में सोये हुए हैं । हाल के दिनों में अमेरिका, ब्रिटेन, जापान, जर्मनी, नॉर्वे और स्वीडन सहित कई देशों की सरकारों ने नागरिकों को संभावित आपातकालीन स्थितियों के लिये सतर्क रहने की सलाह दी है ।
मुख्य जानकारी :
- अतिरिक्त तैयारी की सलाह : विभिन्न देशों में प्रशासन द्वारा लोगों से 72 घंटे से लेकर 90 दिन तक का आपातकालीन राशन, पानी, दवाइयां और जरूरी सामान तैयार रखने की अपील की गई है ।
- भू-राजनीतिक तनाव: दुनिया भर में क्षेत्रीय संघर्षों और सुरक्षा चिंताओं के कारण कई देश अपनी आपातकालीन तैयारियों की समीक्षा कर रहे हैं।



