रायपुर : कंपनी के मालिक और अधिकृत अधिकारियों की फर्जी वाट्सएप पहचान बनाकर दो कंपनियों से 2.80 करोड़ रुपये की साईबर ठगी करने वाले अंतर्राज्यीय गिरोह का रायपुर पुलिस ने पर्दाफाश किया है। पुलिस ने महाराष्ट्र के ठाणे जिले के उल्हासनगर से आकाश कन्हैयालाल चुथ (20), साहिल रमेश नथानी (23) और राज चंदरलाल जुमानी (23) तथा उत्तर प्रदेश के प्रयागराज से विनय श्रीवास्तव (47) और विनोद कुमार (49) को गिरफ्तार किया है।
आरोपियों ने कंपनी के एकाउंटेंट को वरिष्ठ अधिकारियों के नाम से वाट्सएप संदेश भेजकर बैंक खातों में रकम ट्रांसफर कराई थी। पुलिस ने दोनों मामलों में कुल 1.38 करोड़ रुपये विभिन्न बैंक खातों में होल्ड कराए हैं। इनमें टिकरापारा के मामले के 24 लाख और तेलीबांधा के मामले के 1.14 करोड़ रुपये शामिल हैं।
मालिक बनकर भेजा संदेश, 93 लाख ट्रांसफर :
टिकरापारा थाने में कमल विहार निवासी विजय राठी ने शिकायत दर्ज कराई थी। वह राठी बंधुस कमर्शियल प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक हैं। 19 से 21 अक्टूबर के बीच अज्ञात व्यक्ति ने उनके नाम और प्रोफाइल फोटो का इस्तेमाल कर कंपनी के एकाउंटेंट लेखराम चक्रधारी को वाट्सएप संदेश भेजा। संदेश में बैंक खाते में रकम ट्रांसफर करने के निर्देश दिए गए थे। एकाउंटेंट ने संदेश को वास्तविक समझकर कंपनी के यूनियन बैंक ऑफ इंडिया के खाते से 93 लाख रुपये बताए गए बैंक खाते में भेज दिए। बाद में फर्जीवाड़े का पता चला तो पुलिस में शिकायत की गई।
अधिकारी बनकर दो करोड़ रुपये मंगवाये :
तेलीबांधा थाने में ट्रांसफॉर्मर एंड ट्रांसमिशन लिमिटेड के मुख्य वित्त अधिकारी ओमकार वरु ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी। कंपनी का कार्यालय मैग्नेटो माल में स्थित है। अज्ञात व्यक्ति ने कंपनी के अधिकृत अधिकारी अंशुल शर्मा के नाम और पहचान का दुरुपयोग कर एकाउंटेंट बिरेश तिवारी को वाट्सएप संदेश भेजा। इसमें टीके कंस्ट्रक्शन के बैंक खाते में दो करोड़ रुपये ट्रांसफर करने के निर्देश दिए गए। एकाउंटेंट ने इसे वास्तविक निर्देश मानकर बैंक ऑफ बड़ौदा की पंडरी शाखा स्थित कंपनी के खाते से दो करोड़ रुपये ऑनलाईन ट्रांसफर कर दिए। इस तरह कंपनी के साथ दो करोड़ रुपये की धोखाधड़ी हुई।
मोबाईल नंबर और बैंक खातों के विश्लेषण से पहुंचे आरोपियों तक :
दोनों घटनाओं में एक जैसा तरीका सामने आने पर पुलिस ने मोबाईल नंबर, वाट्सएप प्रोफाइल, बैंक खातों और डिजिटल साक्ष्यों का तकनीकी विश्लेषण शुरू किया। ठगी की रकम जिन खातों में भेजी गई थी, उनके साथ उनसे जुड़े अन्य बैंक खातों की भी जांच की गई। सीसीटीवी फुटेज और बैंकिंग लेनदेन की जानकारी जुटाने के बाद आरोपियों की लोकेशन महाराष्ट्र के उल्हासनगर और उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में मिली। इसके बाद पुलिस की अलग-अलग टीमें दोनों राज्यों में भेजी गईं। टीमों ने संबंधित बैंक, एटीएम और आरोपियों की गतिविधियों से जुड़े मार्गों के सीसीटीवी फुटेज खंगाले। तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर उल्हासनगर से तीन और प्रयागराज से दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया।
टिकरापारा के आरोपी तेलीबांधा की ठगी में भी शामिल :
पुलिस जांच में एक महत्वपूर्ण तथ्य सामने आया कि टिकरापारा के 93 लाख रुपये की ठगी के मामले में गिरफ्तार तीनों आरोपी तेलीबांधा की दो करोड़ रुपये की ठगी में भी शामिल थे। उल्हासनगर से गिरफ्तार आरोपियों के कब्जे से 25 हजार रुपये नकद, छह मोबाईल फोन, तीन एटीएम कार्ड और तीन पासबुक जब्त की गई हैं। वहीं प्रयागराज से गिरफ्तार विनय श्रीवास्तव और विनोद कुमार के पास से दो मोबाईल फोन जब्त किए गए हैं। पुलिस के अनुसार, प्रयागराज में गिरफ्तार दोनों आरोपियों को न्यायालय से जमानत पर रिहा किया गया है। उन्हें आगे की जांच के लिये रायपुर लाने की प्रक्रिया की जा रही है। इसके अलावा एक अन्य आरोपी को रायपुर में उपस्थित होने के लिये नोटिस दिया गया है।
1.38 करोड़ रुपये होल्ड, बाकी रकम का पता लगा रही पुलिस :
दोनों मामलों में पुलिस ने बैंक अधिकारियों से समन्वय कर कुल 1.38 करोड़ रुपये होल्ड कराए हैं। टिकरापारा मामले में 24 लाख और तेलीबांधा मामले में 1.14 करोड़ रुपये होल्ड किए गए हैं। गिरफ्तार आरोपियों के मोबाईल फोन की तकनीकी जांच की जा रही है। पुलिस अब गिरोह के अन्य सदस्यों, ठगी की रकम के लेनदेन से जुड़े बैंक खातों और पूरे नेटवर्क का पता लगाने में जुटी है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, जांच में अन्य आरोपियों की संलिप्तता सामने आने पर उनके खिलाफ भी वैधानिक कार्यवाही की जायेगी।



