रायपुर : छत्तीसगढ़ में साल-दर-साल सड़क दुर्घटनाओं, मौतों और घायलों की संख्या में बढ़ोतरी सड़क सुरक्षा के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। प्रदेश में जनवरी से अगस्त-2022 के मुकाबले-2023 में अब तक सड़क दुर्घटनाओं के आंकड़ों पर गौर करें तो आंकड़े बढ़े हैं। हालांकि प्रदेश के कुछ जिलों में जागरूकता की वजह से बीते वर्ष के मुकाबले हादसे कम हुए हैं, लेकिन कुछ जिलों में हो रही मौतों की वजह से अभी भी सड़क सुरक्षा बड़ा सवाल बना हुआ है। लगातार मौतों से चिंता बढ़ी हुई है, प्रदेश में कई ब्लैक स्पॉट है।
प्रदेश स्तरीय सड़क सुरक्षा समिति की रिपोर्ट के मुताबिक ब्लैक स्पॉट में कमी दर्ज की जा रही है। साथ ही सड़क दुर्घटनाओं में कमी के लिए तमाम प्रयास भी किए जा रहे हैं। सड़क सुरक्षा समिति की रिपोर्ट के मुताबिक बीते वर्ष जनवरी से अगस्त के मुकाबले इस वर्ष प्रदेश के रायपुर, बेमेतरा, बालोद, मुंगेली आदि जिलों में सड़क दुर्घटनाओं में कमी दर्ज की गई है। फिर भी लगातार दुर्घटनायें हो रही है।
लगभग 90 ब्लैक स्पाट हटाए गये :
यातायात विभाग के अनुसार प्रदेशभर के अलग-अलग जिलों में 90 ब्लैक स्पॉट हटाए गए हैं। इनमें रायपुर, बिलासपुर, राजनांदगांव, रायगढ़, कोरबा,जगदलपुर आदि जिले शामिल हैं। आंकड़ों के मुताबिक ब्लैक स्पाट हटाने के लिए सामाजिक संगठनों से सुझाव लिए जा रहे हैं। सड़क सुरक्षा समिति की रिपोर्ट के मुताबिक भी जिलों मेें ब्लैक स्पाट हटाने के लिए कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं।
5000 से ज्यादा जागरूकता कार्यक्रम हो चुके है :
सड़क दुर्घटना रोकने के लिए प्रदेशभर में 5193 जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा चुके हैं। इनमें स्कूल,कालेजों में प्रशिक्षण कार्यक्रम, जन जागरूकता रैली, हेलमेट रैली, नुक्कड़ नाटक, स्वास्थ्य एवं नेत्र परीक्षण शिविर, चौक-चौराहों में वाहन चालकों को समझाइश आदि कार्यक्रम शामिल हैं। इन कार्यक्रमों में 79 लाख से अधिक व्यक्ति लाभान्वित हुए। लोगों को अब भी लगातार जागरूक करने की आवश्यकता है।
13 करोड़ का समन शुल्क :
अधिकारियों का कहना है कि सड़क सुरक्षा में लापरवाही बरतने वाले वाहन चालकों के खिलाफ कार्यवाही लगातार जारी है। जनजागरूकता के अभाव में सड़क दुर्घटनाएं बढ़ रही है। शराब पीकर वाहन चलाना भी प्रमुख वजहों में शामिल हैं। यातायात विभाग की ओर से मोटरयान अधिनियम के अंतर्गत लगातार कार्यवाही की जा रही है। यातायात और पुलिस विभाग ने प्रदेश में जनवरी से अगस्त महीने तक तीन लाख 18 हजार 169 प्रकरण दर्ज किया, जिसमें 13 करोड़ 52 लाख 78 हजार 950 रुपये का समन शुल्क भेजा गया है। लगातार चालानी कार्यवाही के बावजूद लोगों में सुधार ना के बराबर हो रहा है।
सड़कें पहले से बेहतर हुई :
ऐसा नहीं है कि सड़कों की स्थिति बेहतर नहीं हुई है, बल्कि राज्य में बीते साढ़े चार साल में राज्य में विभिन्न योजनाओं में सड़क एवं पुल के 7406 कार्यों के लिए लगभग 16 हजार 670 करोड़ रुपये की स्वीकृति मिली है। विगत चार वर्षों में राज्य मद के अंतर्गत 9884 किमी. सड़कों का उन्न्यन किया जा चुका है। इनमें चार हजार 41 किमी. सड़कों का नया डामरीकरण , तीन हजार 244 किमी. सड़कों का डामरीकृत नवीनीकरण, एक हजार 113 किमी. सड़कों का चौडीकरण, 588 किमी. सड़कों का मजबूतीकरण तथा 898 किमी. सड़कों का सीमेंट कांक्रीटीकरण किया गया है। सड़कें खाली होने के कारण लोग आवश्यकता से अधिक तेज गति से वाहन दौड़ाते है जिसमें भी दुर्घटना की शंका बढ़ जाती है।
फैक्ट फाइल
वर्ष-2022
दुर्घटना-9,088
मौतें-4,009
घायल-8,045
वर्ष-2023
दुर्घटना-9,290
मौतें-4,172
घायल-8,311
जनवरी से अगस्त-2023 तक कार्यवाही की जानकारी
विवरण- कुल प्रकरण-समन शुल्क की राशि
तेज गति से वाहन चलाना- 7377-75,03,800
रेड सिग्नल जंपिंग-5739-17,75,800
बिना हेलमेट-33551-1,67,33,200
बिना सीट बेल्ट-20356-1,16,62,300
बिना लाइसेंस-1798-14,85,700
नाबालिक वाहन चालक-239-38,300
प्रमुख जिलों में सड़क दुर्घटनाओं की स्थिति
जिला-दुर्घटना-मौतें-घायल
रायपुर-1353-360-1009
बिलासपुर-770-241-776
राजनांदगांव-290-130-210
दुर्ग-783-221-712
रायगढ़-419-224-363
कोरबा-439-220-410
जगदलपुर-310-162-213
धमतरी-267-115-273
कांकेर-256-153-209
जांजगीर-चांपा-314-123-288
जशपुर-251-180-144
(नोट-आंकड़े सड़क सुरक्षा समिति के मुताबिक जनवरी से अगस्त 2023 तक)
दुर्घटना के मुख्य कारण :
अँधेरे में डिवाईडर का ना दिखना , सामने से आते वाहन की तेज और सफ़ेद रोशनी, जगह – जगह गड्ढे होना, शराब पीकर वाहन चलाना , व्यस्त सड़क पर भी तेज गति से वाहन चलाना, बेतरतीब वाहन चालन, हड़बड़ी में गाड़ी चलाना।