रायपुर : गणेश चतुर्थी हिन्दुओं का एक प्रमुख त्यौहार है। यह त्यौहार भारत के विभिन्न भागों में मनाया जाता है किन्तु महाराष्ट्र व कर्नाटका में बडी़ धूमधाम से मनाया जाता है। पुराणों के अनुसार इसी दिन भगवान श्री गणेश का जन्म हुआ था। गणेश चतुर्थी पर हिन्दू भगवान गणेशजी की पूजा की जाती है। गणेश पर्व को मात्र एक दिन शेष रहने से विविध पंडालों में स्थल झांकी की तैयारी जोरशोर से की जा रही है। इस वर्ष पंडालों में जहां हनुमानजी के बालपन से लेकर लंका दहन के तक प्रसंग को प्रस्तुत किया जा रहा है।
वहीं विश्वभर में भारत का मान-सम्मान बढ़ाने वाले चंद्रयान अभियान की झांकी भी श्रद्धालुओं को लुभाएगी। इसके अलावा अयोध्या में निर्माणाधीन श्रीराम मंदिर, तिरुपति के प्रसिद्ध भगवान बालाजी मंदिर, कृष्ण लीला की झांकियां आकर्षण का केंद्र रहेंगी। इसके अलावा भी अलग – अलग पंडालों में विभिन्न झांकियों का निर्माण किया गया है, झांकियां ही भगवान श्री गणेश की शोभा बढ़ाने में सहायक होती है, इन्हीं झांकियों को देखने के लिये लोग सपरिवार निकलते है।
चंद्रयान 3 की सफलता का मोहक दृश्य :
कालीबाड़ी में भोलेनाथ गणेश उत्सव समिति के चंद्रयान की झांकी लगभग बनकर तैयार हो चुकी है। आंध्रप्रदेश के श्रीहरिकोटा सेंटर से जिस तरह चंद्रयान की लांचिंग की गई थी, उसी तर्ज पर चंद्रयान आकार का पंडाल बनाया गया है। चंद्रयान पंडाल के भीतर भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित की जायेगी। लगभग 120 फीट ऊंचे चंद्रयान रूपी पंडाल का निर्माण कोलकाता के कारीगरों ने किया है।
तिरुपति बालाजी मंदिर :
राठौर चौक से रेलवे स्टेशन जाने वाले मार्ग पर गंजपारा में तिरुमाला की पहाड़ी पर स्थित तिरुपति बालाजी मंदिर की तर्ज पर पंडाल बनाया गया है। श्री विनायक गणेश उत्सव समिति के अध्यक्ष राहुल राय ने बताया कि बालाजी मंदिर पंडाल में भगवान गणेश की प्रतिमा भी बालाजी के स्वरूप में विराजित की जायेगी। 30 फीट ऊंचे पंडाल में पहाड़ी का नजारा और दीवारों पर चित्रों के माध्यम से चंद्रयान अभियान को प्रस्तुत किया गया है। यह झांकी भी काफी मनोरम बनाई गई है।
श्री हनुमान लीला
राजधानी के सबसे पुरानी और प्रसिद्ध गुढ़ियारी पड़ाव इलाके में हनुमानजी की विविध लीलाओं को प्रस्तुत किया गया है। गुढ़ियारी गणेश उत्सव समिति के द्वारा हनुमानजी के जन्म के पश्चात सूर्य को निगलने, माता सीता की खोज के लिए जाते समय समुद्र के ऊपर उड़ने और सुरसा के मुख से निकलने, सीना चीरकर श्रीराम-सीता की छवि को प्रस्तुत करती झांकी का निर्माण किया गया है। पंडाल में चंद्रयान 3 की सफलता को भी दिखाया गया है। 10 हजार फीट में झांकी का निर्माण दुर्ग के कलाकारों ने किया है। विशाल झांकी को देखने के लिए 20 मिनट का समय लगेगा।
अयोध्या में निर्माणाधीन श्रीराम मंदिर :
गंजपारा में अयोध्या में निर्माणाधीन श्रीराम मंदिर की झांकी श्रद्धालुओं को लुभायेगी। श्री विनायक गणेश उत्सव समिति कि झांकी में श्रीराम द्वारा रावण वध के पश्चात अयोध्या लौटने के दृश्य को प्रदर्शित किया गया है। पंडाल में श्रीराम धुन की गूंज भी सुनाई देगी। आने वाले वर्ष में अयोध्या में श्रीराम मंदिर निर्माण होने की पूरी संभावना है, इसे देखते हुए श्रीराम मंदिर की थीम को महत्व दिया गया है।
पर्यावरण के अनुकूल प्रतिमायें की जायेंगी विराजित :
राठौर चौक, गोलबाजार, सुंदर नगर, कुशालपुर, डंगनिया में किसानों के महत्व को दर्शाती झांकियां, श्रीकृष्ण लीला, समुद्र मंथन की झांकी तथा पर्यावरण को बचाने का संदेश देने के लिए पर्यावरण के अनुकूल गणेश प्रतिमायें विराजित की जायेंगी। बाज़ार में भी घरों में विराजित करने के लिये भगवान की पर्यावरण के अनुकूल प्रतिमायें बिक रही है।