सरकारी जमीन के आबंटन पर भूपेश बघेल सरकार के नियमों को साय कैबिनेट ने किया निरस्त, प्रदेश में सियासत गर्म।

रायपुर : शुक्रवार को साय कैबिनेट में एक महत्वपूर्ण फैसला लेते हुए भूपेश बघेल सरकार के समय जारी उन सर्कुलर को रद्द कर दिया गया। जिसके जरिए पूरे प्रदेश के नगरीय निकायों में बड़े पैमाने पर सरकारी जमीनों पर लोगों को मालिकाना हक दिया गया। सरकार ने यह भी घोषणा की है कि पिछले पांच सालों में इस आदेश के तहत जिन जिन लोगों को जमीने आवंटित की गई हैं, उन सबकी जांच होगी। गड़बड़ी मिली तो आवंटन रद्द भी होगा। इस फैसले पर अब राजनीति भी शुरू हो गई है।साय सरकार के मंत्री इस फैसले को जमीनों की बंदरबांट को रोकने वाला कदम बता रहे हैं, तो कांग्रेस नेता रमन सरकार के समय के भूमि आवंटन की याद दिला रहे हैं। तो क्या सच में जमीनों की बंदरबांट हुई? कांग्रेस ने अपने चहेतों को कौड़ी के मोल सरकारी जमीनें दे दी हैं? या फिर मामला कुछ और था।

सरकार में राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा का सीधा आरोप है कि इन परिपत्रों की आड़ में कांग्रेस सरकार ने प्रदेश की बेशकीमती सरकारी जमीनों की बंदरबांट की। उसे अपने लोगों में बांटा, इन सबकी जांच होगी। साय सरकार ने ना सिर्फ पूर्व के सर्कुलरों को रद्द किया है, बल्कि राजस्व विभाग की वेबसाइट पर उन तमाम आवंटनों की लिस्ट भी जारी करने का ऐलान किया है, जो इन नियमों के तहत किए गए। अगर कोई शिकायत करता है तो संभाग आयुक्त उसकी जांच करेंगे, और आवंटन नियम विरुद्ध पाया गया तो आवंटन रद्द भी होगा।

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इसके अलावा, शहरों की अतिक्रमित सरकारी जमीनों को भी बेचा गया। शासन ने करीब 7 एकड़, और कलेक्टर के माध्यम से 2639 एकड़ जमीनें बेच दी गईं। ये पूरी जमीनें करीब 300 करोड़ में बेची गई। ये आंकड़ा भी काफी चौकाने वाला है, लेकिन प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज कह रहे हैं कि जमीनें तो रमन सरकार के समय भी बांटी गई थी। क्या उन जमीनों का आवंटन भी रद्द होगा?

बहरहाल, साय सरकार के फैसले के बाद प्रदेश भर से उन नामों की लिस्ट मंगवाई जा रही है, जिन्होंने इन नियमों के तहत सरकारी जमीने लीं। जाहिर है, जब एक एक नाम का खुलासा होगा तो कई सफेदपोश और राजनीतिक शख्सियत की कलई भी खुलेगी। ऐसे में जमीनों की बंदरबांट का मुद्दा भी आगे और गरमाने वाला है।

साय सरकार ने भूमि आवंटन नियम को निरस्त किया : 

दरअसल, साल 2019, 2020 और साल 2024 में तत्कालीन भूपेश बघेल सरकार ने कई परिपत्र जारी कर शहरी क्षेत्रों में नजूल और सरकारी जमीनों का मालिकाना हक लोगों को देना शुरू किया था। इस परिपत्र के आधार पर पूरे प्रदेश के नगरीय निकायों में सैकड़ों सरकारी जमीनों का स्वामित्व आम लोगों को दे दिया गया। वहीं अब उस कदम पर बवाल खड़ा हो गया है। शुक्रवार को साय कैबिनेट में पूर्व में जारी तमाम परिपत्रों को रद्द करते हुए, भूपेश बघेल सरकार के दौरान सरकारी जमीनों के आवंटन की जांच कराने का ऐलान कर दिया है।

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कृषक कल्याण निधि में 10 प्रतिशत जमा करेगा मंडी बोर्ड :

संशोधन प्रस्ताव के अनुसार मंडी फीस के स्थान पर अब ‘‘मंडी फीस और कृषक कल्याण शुल्क शब्द जोड़ा जाना प्रस्तावित है। कृषक कल्याणकारी गतिविधियों के लिए मंडी बोर्ड अपनी सकल वार्षिक आय की 10 प्रतिशत राशि राज्य कृषक कल्याण निधि में जमा करेगा। इस निधि का उपयोग नियमों में शामिल प्रयोजनों के लिए किया जा सकेगा।

जमीन आवंटन में शिकायत पर होगी जांच :

उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने कहा है कि जमीन आवंटन को लेकर किसी तरह की शिकायत आने पर उसकी जांच भी कराई जाएगी। आदेशों के तहत आवंटित भूमि की जानकारी राजस्व विभाग की वेबसाइट में प्रदर्शित की जाएगी और इस विषय में कोई भी आपत्ति और शिकायत प्राप्त होने पर संभागीय आयुक्त द्वारा इसकी सुनवाई की जाएगी। मंत्रिपरिषद की बैठक में छत्तीसगढ़ माल और सेवा कर (संशोधन) विधेयक-2024 के प्रारूप का अनुमोदन किया गया।