राजधानी के मेडिकल कॉलेज में आया चौंकाने वाला मामला, रैगिंग की घटना में बड़ा बवाल।

रायपुर : राजधानी के मेडिकल कॉलेज से रैगिंग का चौंकाने वाला मामला सामने आया है, यहाँ एमबीबीएस के नवप्रवेशी छात्रों के साथ रायपुर के शासकीय मेडिकल कॉलेज में रैगिंग हो गई। 50 छात्रों के सिर मुंडवाए गए और उन्हें थप्पड़ भी मारे गए। छात्राओं को सिर पर तेल लगाकर आने को कहा गया और उनकी फोटो भी मांगी गई। मामले की शिकायत एनएमसी से हुई और सोशल मीडिया पर कई जिम्मेदारों को इसे टैग किया गया, जिसके बाद कॉलेज प्रबंधन सक्रिय हुआ। एंटी रैगिंग कमेटी ने द्वितीय वर्ष के दो छात्रों को निलंबित कर दिया गया है। कॉलेजों में एंटी रैगिंग कमेटी बनी हुई है, हुई है, मगर उन्हें इस बात की जानकारी तब हुई, जब इस मामले ने सोशल मीडिया में तूल पकड़ा। रैगिंग को एक आपराधिक कृत्य माना गया है। प्रिवेंशन ऑफ़ रैगिंग एक्ट, 1997 और इसके संशोधनों के तहत आता है। इसके अलावा, रैगिंग को दंड संहिता और कर्नाटक शिक्षा अधिनियम, 1983 की धारा 116 के तहत भी अपराध माना गया है।

छात्रों के अपने परिजनों की मदद से सोशल मीडिया पर एनएमसी के अधिकारियों सहित राज्य के जिम्मेदारों के सामने अपनी पीड़ा व्यक्त की है। इस मामले में उन्होंने बताया, जिक्र किया था कि उनसे हानि-रहित मजाक करने के बजाय मानसिक और शारीरिक रूप से थका देने वाला रैगिंग किया जा रहा है। मामला वायरल होने और एनएमसी द्वारा भेजे गए पत्र के बाद मेडिकल कॉलेज की एंटी रैगिंग कमेटी सक्रिय हुई। एंटी रैगिंग हेल्पलाइन से मिली शिकायत के आधार पर 4 अक्टूबर को कॉलेज प्रबंधन की बैठक हुई थी और रैगिंग के मामले में एमबीबीएस के दो छात्र को निलंबित किया गया है। इस मामले में कॉलेज के प्रवक्ता का कहना है कि मामले को काफी गंभीरता से लिया जा रहा है, सभी कक्षाओं में जाकर इस बात की समझाईश दी जा रही है कि इस तरह की कोई भी घटना होने पर कॉलेज के शिक्षकों को जानकारी दी जाए। आने वाले दिनों में रैगिंग रोकने के लिये सख्त कदम उठाए जाएंगे। कॉलेज प्रशासन ने गंभीरता से लिया है।

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इस मामले में एंटी रैगिंग कमेटी ने एमबीबीएस द्वितीय वर्ष, यानी 2023 बैच के दो छात्रों को दोषी पाया है। उनके द्वारा अंशु जोशी तथा दीपराज वर्मा को दस-दस दिन के लिए विगत 4 अक्टूबर को हुई बैठक में निलंबित किया गया था। उनके निलंबन की अवधि के दौरान पांच दिन अवकाश के हैं, जिसे लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। अपनी शिकायत में छात्रों ने बताया कि, सभी नवप्रवेशी छात्रों को स्कूल ड्रेस जैसे कपड़े पहनने के लिए मजबूर किया जाता है, काफी प्रताड़ना भी दी जाती है। एक मोनोक्रोम शर्ट, एक ही रंग की पैंट, स्कूल के जूते और औपचारिक साइड बैग उनका ड्रेस कोड होता है। कॉलेज के अलावा हॉस्टल में भी सीनियर्स द्वारा मारपीट की जाती है और उन्हें मानसिक रूप से टार्चर किया जाता है। यह प्रक्रिया एक या दो बार नहीं, बल्कि व्यापक पैमाने पर लगातार हो रही है।

रैगिंग नहीं, दोनों छात्रों का हरकतें आपत्तिजनक :

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इस मामले में जूनियर डॉक्टर एसोसिशन के पदाधिकारियों ने कहा कि, उन्होंने नवप्रवेशी छात्रों से इसकी जानकारी ली, मगर किसी ने भी रैगिंग की पुष्टि नहीं की है। मामले में जिन दो छात्रों को निलंबित किया गया है, उनकी हरकतें आपत्तिजनक थीं, जिसे अभद्रता और अनुशासनहीनता माना गया है। किसी भी छात्र के बाल सीनियरों ने नहीं काटे और न ही मारपीट की गई है, जिसे सिरे से नाकारा गया है। कांग्रेस चिकित्सा प्रकोष्ठ के अध्यक्ष डॉ. राकेश गुप्ता ने बताया कि, यह घटना कॉलेज प्रबंधन की अकर्मण्यता को दर्शाती है। प्रताड़ित छात्रों ने जब इसकी शिकायत की तो कॉलेज प्रबंधन ने इस पर ध्यान नहीं दिया था। सोशल मीडिया में मामला आने के बाद अब सीनियरों द्वारा जूनियरों को विभिन्न तरीकों से धमकाया जा रहा है, जिस पर शासन स्तर पर हस्तक्षेप की आवश्यकता है।