स्वास्थ्य : वर्तमान में स्वास्थ्य को लेकर जागरूक होना अति आवश्यक है, व्यक्ति के बीमार होने पर जीवन भर की जमा पूंजी ईलाज में खत्म हो जाती है, ऐसे में बीमार होने से बचें। यकृत हमारे शरीर के सबसे ज़रूरी अंगों में से एक है। यह सैकड़ों महत्वपूर्ण शारीरिक कार्य करता है। खासकर, यह शारीर से गंदगी को निकालकर उसे पूरी तरह साफ़ करता है। लेकिन, जब यकृत क्षतिग्रस्त होने लगता है तब यह आपकी शरीर की ज़रूरतों के हिसाब से काम नहीं कर पाता है। यकृत कमज़ोर होने पर भूख नहीं लगती, उल्टी होती है और हर समय कमज़ोरी महसूस होती है, जी मिचलाता है। ज़्यादा समय तक यकृत क्षतिग्रस्त होने पर यकृत सिरोसिस जैसी गंभीर बीमारी का खतरा भी बढ़ जाता है। यकृत में गड़बड़ी होने पर शुरुआत में ही कुछ ऐसे संकेत दिखाई देने लगते है जिसकी पहचानकर आप यकृत को क्षतिग्रस्त होने से बचा सकते हैं।
ये हैं लीवर डैमज होने के लक्षण :
- त्वचा या आंखों का पीला पड़ जाना
- लगातार थकान रहना
- पेट में सूजन
- दाएँ ऊपरी पेट और दाएँ कंधे में दर्द
- आंखें या त्वचा का पीला पड़ना
- बार-बार मतली आना
- ख़राब पाचन
- पेशाब का रंग गहरा होना
- भूख खत्म हो जाना
- जी मिचलाना या उल्टी होना
यकृत को ऐसे बनायें स्वस्थ :
महामृत्युंजय मन्त्र उत्पत्ति की कथा और महत्व के साथ : https://www.youtube.com/watch?v=L0RW9wbV1fA
- खानपान करें बेहतर : किसी भी गंभीर बीमारी के पीछे सबसे बड़ी वजह बिगड़ा हुआ खानपान होता है।ऐसे में अपनी डाइट अच्छी करें। यकृत को साफ़ करने के लिये चुकंदर, हल्दी, पत्तेदार साग और लहसुन जैसे खाद्य पदार्थों को शामिल करें।
- शरीर को रखें नमी से पूर्ण : आप जितना ज़्यादा पानी पिएंगे आपका शरीर उतना ही नम होगा और सफाई को बढ़ावा देने के लिए नींबू के साथ खूब सारा पानी पिएँ।
- तनाव से रहे दूर : तनाव और ज्यादा सोचने अच्छे खासे शरीर को बर्बाद कर देता है। इसलिए तनाव कम से कम लें, तनाव को कम करने के लिए योग या ध्यान का अभ्यास करें।
- शराब का सेवन न करें : अगर आपको यकृत से जुड़ी बीमारी होने का पता चला है, तो आपको शराब से दूरी बना लेनी चाहिए। यकृत के दबाव को कम करने के लिए शराब, प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थ और मीठे पेय से बचें।
सबसे प्रमुख बात है कि अपने खानपान पर नियंत्रण रखें, जो आपकी सेहत के लिये नुकसानदायक हो, उससे परहेज करें। ज्यादा दिक्कत लगने पर चिकित्सक से सलाह लें।



