टीटीडी ने गैर हिन्दू कर्मचारियों पर की कार्यवाही, तिरुपति मंदिर बोर्ड से गैर हिंदू कर्मचारियों को हटाने के लिये भाजपा ने की मांग, ओवैसी भड़के।

तिरुपति (आंध्रप्रदेश) : बीते दिनों तिरुपति मंदिर में चर्बी के तेल से बने लड्डुओं का मामला काफी गर्माया था, साथ ही अयोध्या में भगवान राम के प्राण – प्रतिष्ठा समारोह में भी एक लाख लड्डू भेजे जाने की बात सामने आई थी, जिसके बाद बड़ा हड़कम्प मच गया था। अब भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की आंध्र प्रदेश इकाई ने बृहस्पतिवार को तिरुमाला को ‘हिंदुओं का आध्यात्मिक केंद्र’ करार देते हुए तिरुमाला तिरूपति देवस्थानम (टीटीडी) के लगभग उन 1,000 कर्मचारियों को मंदिर बोर्ड की सेवाओं से हटाने की मांग की है, जिनके गैर-हिंदू धर्म के अनुसरण का संदेह है। भाजपा की प्रदेश इकाई के प्रवक्ता और टीटीडी के सदस्य भानु प्रकाश रेड्डी ने कहा कि बोर्ड के प्रतिनिधि जल्द ही मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू से मिलेंगे और अनुरोध करेंगे कि गैर-हिंदुओं की सेवाओं की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने कहा, “टीटीडी में 6,500 से ज्यादा स्थायी कर्मचारी और 17,000 से ज्यादा अनुबंधित कर्मचारी हैं, जिससे कुल कर्मचारियों की संख्या लगभग 24,000 हो जाती है।” ऐसे में गैर हिन्दुओं को सेवा से मुक्त किया जाये, यह भाजपा आंध्रप्रदेश की इकाई ने यह मांग की है।

भाजपा नेता ने की ये मांग :

उन्होंने कहा, “मुझे जानकारी मिली है कि एक हजार से ज्यादा कर्मचारी गैर-हिंदू धर्म का अनुसरण करते हैं और यही वजह है कि हम इस मामले पर कड़ा रुख अपना रहे हैं। 14 फरवरी को हम मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू से मिलेंगे और अनुरोध करेंगे कि गैर-हिंदू कर्मचारियों को टीटीडी का हिस्सा न बनाया जाए।” रेड्डी ने 18 गैर-हिंदू कर्मचारियों के खिलाफ टीटीडी की अनुशासनात्मक कार्यवाही पर कहा कि माना जाता है कि उनमें से दो ‘वास्तव में’ हिंदू हैं इसलिए अधिकारियों से अनुरोध है कि वे उनके प्रमाण-पत्रों की फिर से जांच करें। रेड्डी ने दावा किया कि गैर-हिंदू कर्मचारियों को टीटीडी से वेतन मिलता है लेकिन वे श्री वेंकटेश्वर स्वामी का प्रसाद (पवित्र प्रसाद) स्वीकार नहीं करते है। उन्होंने कहा कि टीटीडी अधिनियम के अनुसार मंदिर के अनुष्ठान केवल हिंदुओं द्वारा ही किए जा सकते हैं और सभी कर्मचारी हिंदू होने चाहिए। ऐसे में इन सभी कर्मचारियों को मंदिर की सेवा से बाहर किया जाये।

18 गैर हिंदू कर्मचारियों पर कार्यवाही के बाद की गई मांग :

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टीटीडी ने हाल ही में एक आधिकारिक ज्ञापन जारी कर 18 कर्मचारियों को गैर-हिंदू गतिविधियों में कथित रूप से शामिल होने के लिए अनुशासनात्मक कार्यवाही के तहत मंदिर निकाय की सभी धार्मिक और आध्यात्मिक गतिविधियों में भाग लेने से रोक दिया है। उधर, युवजन श्रमिक रायथू कांग्रेस पार्टी (वाईएसआरसीपी) प्रमुख जगन मोहन रेड्डी ने टीटीडी के 18 कर्मचारियों के खिलाफ गैर-हिंदू गतिविधियों में कथित रूप से शामिल होने के लिए अनुशासनात्मक कार्यवाही शुरू करने के फैसले पर टिप्पणी करने से इंकार कर दिया है। साथ ही इस मुद्दे पर जगन ने कहा कि उन्हें इस मुद्दे की जानकारी नहीं है। जगन ने संवाददाताओं को संबोधित करते हुए एक सवाल के जवाब में कहा कि वह इस तरह के सवालों का तुरंत जवाब नहीं दे सकते। उन्होंने संवाददाताओं से कहा, “मुझे इन विषयों का विवरण नहीं पता है। मुझे नहीं पता कि वे किस विभाग में काम करते थे या वे कहां कार्यरत हैं। मुझे नहीं पता कि ये संख्याएं कहां से आ रही हैं।” वहीँ अब इस मामले ने बड़ा सांप्रदायिक रंग भी ले लिया है, इस मामले में हिन्दुओं की आस्था के साथ खिलवाड़ का आरोप लगा है।

असदुद्दीन ओवैसी भड़के और कहा फिर स्टेट वक्फ बोर्ड में हिंदू क्यों :

तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम (टीटीडी) ने 18 गैर हिंदू कर्मचारियों के खिलाफ एक्शन लिया है। टीटीडी ने गैर हिंदू कर्मचारियों को ट्रांसफर या वीआरएस का विकल्प दिया है। इस मामले पर एआईएमआईएम के मुखिया असदुद्दीन ओवैसी ने सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा, यही तेलगू देशम पार्टी के नेता नारा चंद्रबाबू नायडू को सोचने की जरूरत है। जब उनकी पार्टी ज्वाइंट वर्किंग कमेटी में भाजपा के लाए गए बिल को सपोर्ट करती है, जिसमें राज्य वक्फ बोर्ड में कम से कम 2 गैर मुस्लिम, केंद्रीय वक्फ बोर्ड में नॉन मुस्लिम को रखना है। जब आप आंध्र प्रदेश बोर्ड में और टीटीडी में नॉन हिंदू कोई सदस्य नहीं बन सकता है और ना ही ट्रस्टी बन सकता है। कर्मचारियों को भी नहीं रख रहे हैं। तो वहीं वक्फ में भी सपोर्ट करिए। क्यों भाजपा का सपोर्ट कर रहे हैं नारा चंद्रबाबू नायडू। जब टीटीडी के लिए नॉन हिंदू का रहना बहुत गलत बात है तो नॉन मुस्लिम का स्टेट वक्फ बोर्ड में रखने की बात तो दोहरी पॉलिसी है। 

टीटीडी ने 18 गैर हिंदुओं पर की कार्यवाही :

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टीटीडी ने 18 गैर हिंदुओं पर कार्यवाही करते हुए अपने बयान में कहा, “टीटीडी के अध्यक्ष बीआर नायडू के निर्देशों का पालन करते हुए, तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम (टीटीडी) ने संस्थान में काम करते समय गैर-हिंदू धार्मिक प्रथाओं का पालन करने वाले कर्मचारियों के खिलाफ कार्यवाही शुरू की है।” बयान में कहा गया है, “अधिकारियों ने 18 कर्मचारियों की पहचान की है, जो टीटीडी द्वारा नियोजित होने के बावजूद गैर-हिंदू धार्मिक परंपराओं का पालन कर रहे हैं। 18 पहचाने गए कर्मचारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्यवाही के आदेश जारी किए गए हैं, जो टीटीडी त्योहारों और अनुष्ठानों में भाग लेने के साथ-साथ गैर-हिंदू धार्मिक गतिविधियों में भाग ले रहे हैं।”