कोरबा : किंग कोबरा यदि काट ले तो शिकार बेहोश होने लगता है, आँखो की रोशनी धुंधली पड़ने लगती है, और शरीर पर लकवा मारने जैसा प्रभाव होता है।कोरबा जिले के बेला गांव में काफी दिनों से कुएं में गिरे 11 फीट लंबे किंग कोबरा को रेस्क्यू कर लिया गया है, जिसका वीडियो जमकर वायरल हो रहा है। बेला गांव में कई दिनों पहले किंग कोबरा कुएं में गिर गया था। कुएं में इस जहरीले सांप को देख लोगों ने भी इसके पानी का इस्तेमाल करना छोड़ दिया था। यहां से अक्सर तेज फुफकारने की आवाज आती थी, जिसके बाद लोगों ने स्नेक रेस्क्यू टीम को खबर दी।
मंगलवार को स्नेक रेस्क्यू टीम के प्रमुख जितेंद्र सारथी और आरसीआरएस अध्यक्ष अविनाश यादव पहुंचे। लंबे समय से कुएं में रहने के कारण किंग कोबरा सुस्त पड़ गया था। उसे लंबे बांस की मदद से निकाला गया। किंग कोबरा बहुत जहरीला और आक्रामक होता है, इसलिए वहां जमा भीड़ को मौके से हटाया गया। इसके बाद सांप को सुरक्षित जंगल में ले जाकर छोड़ दिया गया। हालांकि कई लोगों ने दूर से ही किंग कोबरा का वीडियो बना लिया। 11 फीट लंबे किंग कोबरा को देख लोगों के भी रोंगटे खड़े हो गए। किंग कोबरा के मिलने की खबर वन मंडल अधिकारी और उप वनमंडलाधिकारी उत्तर को भी दी गई थी। बचाव के समय इन दोनों की मौजूदगी में बचाव कार्य शुरू किया गया। किंग कोबरा को कुएं से निकालने के बाद कुछ समय के लिए धूप में रखा गया। इसके बाद उसे एक बैग में डालकर वहां से लगे जंगल में ले जाकर छोड़ा गया।
दो टीमों ने मिलकर किया किंग कोबरा का रेस्क्यू :
बड़ी ही मेहनत से दोनों टीमों ने मिलकर किंग कोबरा को बचा लिया। लंबे समय से कोरबा जिले में आरसीआरएस और स्नेक रेस्क्यू टीम दोनों मिलकर वन्यजीवों के संरक्षण के लिए काम कर रही हैं। दोनों ने अपने मतभेदों को भुलाकर लंबे समय के बाद किसी रेस्क्यू को अंजाम दिया। स्नेक रेस्क्यू टीम के अध्यक्ष और वन विभाग सदस्य जितेन्द्र सारथी एवं आरसीआरएस टीम अध्यक्ष अविनाश पहली बार किसी बड़े रेस्क्यू ऑपरेशन में एक साथ दिखे। इन दोनों ने कहा कि आगे भी जहां जरूरत होगी, वे वहां मिलकर काम करेंगे। इससे वन्य जीवों के संरक्षण में तेजी आएगी। स्नेक कैचर जितेन्द्र सारथी ने बताया कि छत्तीसगढ़ में कोरबा एक मात्र जिला है, जहां किंग कोबरा बड़ी संख्या में पाया जाता है। इसके संरक्षण के लिए कुछ महीने पहले ही नोवा नेचर वेलफेयर सोसायटी के सर्वे के बाद डीपीआर तैयार कर वन विभाग को सौंपा गया है। अब इस पर जल्द ही कार्ययोजना बनाए जाने की जरूरत है।