रायपुर : राजधानी में नशे के सौदागर अपना काम बढ़ाने के लिये लगातार युवाओं को नशे की गर्त में ढकेल रहे हो, वहीँ अब युवाओं को नशे की गर्त में ढकेलने वाले लोगों के खिलाफ पुलिस ने सख्ती बरतनी शुरू कर दी है। मादक पदार्थों की अवैध खरीद-बिक्री पर अंकुश लगाने एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स के आईजी अजय यादव के नेतृत्व में एंटी नारकोटिक्स टॉस्क फोर्स का गठन किया गया है। एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स ने मुंबई स्थित नारकोटिक्स सेल में सफेमा के तहत पांच करोड़ 56 लाख की पांच संपत्ति अटैच करने पांच प्रकरण तैयार कर भेजा है, जिस पर नारकोटिक्स ने कार्यवाही करने अपनी सहमति प्रदान की है। इस तरह नशे के सौदागरों पर शिकंजा अब कसा जायेगा।
इस मामले में एंटी नारकोटिक्स टॉस्क फोर्स के आईजी ने बुधवार को सभी जिलों के एंटी नारकोटिक्स टॉस्क फोर्स के नोडल अफसरों की वर्चुअल बैठक आयोजित की। बैठक में आईजी ने बैठक में बताया कि वर्ष 2024 में राज्य के अलग-अलग जिलों में कुल एक हजार 329 प्रकरण दर्ज कर दो हजार 149 लोगों के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत कार्यवाही की गई है। कार्रवाई में 24 हजार 631 किलो गांजा जब्ती करने के साथ ही 335 ग्राम ब्राउन शुगर, एक किलो 360 ग्राम अफीम तथा 49 करोड़ 37 लाख रुपए नशीली दवाइयां जब्त की गई है। ऐसे ही नशे के सामान जब्त किये गये है।
पहली बार सफेमा के साथ पीट एनडीपीएस :
खास ख़बरों के लिये सब्सक्राईब करें हमारा यूट्यूब चैनल : https://www.youtube.com/@MachisMediaNews/
आईजी अजय यादव के अनुसार, राज्य बनने के बाद पहली बार नशे के सौदागरों की संपत्ति अटैच करने के साथ पीट एनडीपीएस की कार्यवाही की है। पीट एनडीपीएस की कार्यवाही रासुका की तरह है। पीट एनडीपीएस के तहत एंटी नारकोटिक्स सेल ने 196 प्रकरण तैयार कर कोर्ट में पेश किया गया है, जिनमें से अब तक 83 तस्करों के खिलाफ पीट एनडीपीएस की कार्यवाही कर जेल दाखिल किया गया है। चालू वर्ष में एंटी नारकोटिक्स सेल ने फरवरी माह तक एनडीपीएस के 192 प्रकरण में 340 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। बैठक में एआईजी सीआईडी पूजा अग्रवाल एवं सभी जिलों के एएनटीएफ के नोडल अधिकारी उपस्थित रहे। पिट एनडीपीएस कार्यवाही के बारे में पुलिस ने बताया कि पिट (पीआईटी) एनडीपीएस एक्ट 1988 की कार्यवाही उन नशे का कारोबार करने वाले नशे सौदागरों और अपराधियों पर किया जाता है, जो लगातार उस अपराध में शामिल पाए जाते हैं। यह कार्यवाही शासन की ओर से की जाती है। यह उन अपराधियों के खिलाफ लगाया जाता है, जिनका जेल में बंद किया जाना बेहद जरूरी हो जाता है।



