चार बार एम्बुलेंस बदलकर ले गये मरीज को, मुसीबत में फंसी रही जान, रेड एम्बुलेंस के सुपरवाईजर ने परिजन पर लगाया ये आरोप….।

बिलासपुर : मरीजों से हर तरीके से पैसा निकालने वाले बड़े अस्पतालों में भी अव्यवस्था का आलम कुछ ऐसा है कि मरीज सोचता है, जब सभी जगह यही हाल है तो निजी अस्पताल में इलाज करवाऊं या सरकारी में? ऐसे ही एक मामला सामने आया है, जहाँ अपोलो अस्पताल के पास स्वयं की एम्बुलेंस ही नहीं है, इमरजेंसी सर्विस के लिए ठेके पर वाहन उपलब्ध है, लेकिन कंडम हो चुकी गाड़ियों के चलते मरीजों की जान जोखिम में पड़ रही है। गुरुवार को ब्रेन हेमरेज के मरीज को बिना लाइफ सपोर्ट के रायपुर के लिए भेज दिया गया, इस दौरान 4 बार एम्बुलेंस बदलकर मरीज को रायपुर पहुंचाया गया, जिसके चलते मरीजों को खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ा, और जान जोखिम में पड़ी वो अलग, फिलहाल मरीज का इलाज रायपुर के रामकृष्ण अस्पताल में किया जा रहा है।  

मामला है संजय नगर चिंगराजपारा निवासी राधिका अड़पेवार की तबीयत गुरूवार को बिगड़ गई, उन्हें ब्रेन हेमरेज के बाद अपोलो अस्पताल में भर्ती कराया गया है। गुरुवार को डाक्टरों ने परिवार की काउंसलिंग कर मरीज को रायपुर स्थित रामकृष्ण अस्पताल ले जाने की सलाह दी। परिवार ने अपोलो हास्पिटल प्रबंधन को इसके लिए लाइफ सपोर्ट सिस्टम के साथ एम्बुलेंस की व्यवस्था करने कहा, जिसमें प्रबंधन ने 12 हजार रुपए चार्ज जोड़कर एम्बुलेंस की व्यवस्था कर दी, लेकिन इस एम्बुलेंस में वेंटीलेटर और लाइफ सपोर्ट सिस्टम नहीं था, जिसके बाद परिजनों ने इसमें मरीज को ले जाना उचित नहीं समझा, टेक्नीशियन ने भी इसकी सहमति नहीं दी। इमरजेंसी से मरीज को बाहर निकालकर घंटे भर धूप में रखा गया। इसके बाद दोबारा एम्बुलेंस की व्यवस्था की गई और बिना सायरन के एम्बुलेंस में मरीज और परिजनों को बैठा दिया गया। यह एम्बुलेंस भी सीपत चौक पर बंद हो गई। इस तरह से मरीज और परिजनों की साँसे अटकी रही।

मरीज की सांस अटकती रही :

ऐसे में मरीज के परिजनों ने अन्य एम्बुलेंस को बुलाया और गाड़ी आगे बढी, लेकिन इंजन में लगा फेन बेल्ट टूटने से यह एम्बुलेंस भी रोक दी गई, जिससे मरीज की स्थिति के कारण परिजन मुश्किल में फंस गये। मरीज के परिजनों द्वारा नाराजगी जताए जाने के बाद अपोलो हास्पिटल प्रबंधन ने फिर एक एंबुलेंस की व्यवस्था की, जिसके सहारे करीब 4 घंटे की मशक्कत के बाद मरीज को रायपुर स्थित रामकृष्ण अस्पताल पहुंचाया गया। खास बात यह है कि बेन हेमरेज के मरीज को बिलासपुर से रायपुर तक पहुंचाने में 4 एम्बुलेंस बदलना पड़ा है, इस दौरान मरीज की सांस अटकती रही और परिजनों का हाल बेहाल हो गया, इस दौरान परिजन काफी तनाव से गुजरते रहे।

मरीज के परिजन ने मारपीट की :

खास ख़बरों के लिये सब्सक्राईब करें हमारा यूट्यूब चैनल :  https://www.youtube.com/@MachisMediaNews/

रेड एम्बुलेंस सर्विस के सुपरवाइजर विक्की कुमार ने बताया कि, मरीज के परिजन असमंजस की स्थिति में रहे हैं, जिसकी वजह से देरी होती रही है। हमारी सर्विस बिल्कुल सही है। मरीज को लेकर अपोलो अस्पताल में भी हंगामा किया गया है, जिसके बाद उपलब्ध एम्बुलेंस से मरीज को भेजा गया, इस दौरान कुछ दूर जाकर फेन बेल्ट टूट गया, जिसके बाद एम्बुलेंस बदलकर हमारी सर्विस द्वारा ही मरीज को रायपुर भेजा गया है। मरीज को शाम 4 बजे रायपुर पहुंचाया गया है। परिजनों ने पायलेट के साथ मारपीट की है, एम्बुलेंस की फीस नहीं दी है और हमें धमकाया भी है। 

दो साल से चल रही है सर्विस :

अपोलो के पीआरओ देवेश गोपाल ने बताया कि,  एम्बुलेंस सेवा का टेंडर प्रबंधन द्वारा किया गया है, जो चैनल सिस्टम में काम करता है। दर असल 2 साल पहले अपोलो प्रबंधन ने व्यय देखते हुए एम्बुलेंस सेवा बंद कर दी थी और ठेके पर रेड हेल्थ इमरजेंसी सर्विस को एम्बुलेंस का ठेका दे दिया गया है। वहीँ रेड एम्बुलेंस के नाम पर रायपुर में भी बीते छः माह पूर्व भारती खेमानी नाम की मरीज को लेकर बवाल हो चुका है, पीड़िता की लापरवाही से मौत हो गई थी।