डीजे पर शिकंजा कसने SP ने 100 डीजे संचालकों के साथ की बैठक, सामने आई ये जानकारी….।

दुर्ग/भिलाई : डीजे से ध्वनी प्रदूषण बढ़ता है और वाइब्रेटर लगे होने से नुकसान होने कि संभावना भी होती है। इससे बुजुर्गों और बीमारों को खासी परेशानी उठानी पड़ती है। ऐसे में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक विजय अग्रवाल ने आगामी त्यौहारों से पहले डीजे संचालकों के साथ सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट की गाइडलाइन को लेकर अहम बैठक ली है। डीजे संचालकों को हाइकोर्ट के नियमानुसार प्रतिबंध लगाने के निर्देश दिये गये हैं। बैठक में जिले के लगभग 100 डीजे संचालक शामिल हुए थे, सभी को नियमो का पालन करने की जानकारी दी गई है। इसके साथ ही नियम पालन नहीं करने वालों पर सख्त कार्यवाही किए जाने की बात भी कही गई है। ऐसे में कितने नियमों का पालन होगा वह समय पर ही सामने आयेगा। हालाँकि कई बार यह मुद्दा उठ चुका है।

वहीँ इस मामले में दुर्ग ग्रामीण के एएसपी अभिषेक झा और सीएसपी भिलाई नगर सत्यप्रकाश तिवारी ने पुलिस नियंत्रण कक्ष भिलाई में दुर्ग जिले को डी.जे. संचालकों की बैठक लेकर आगामी त्यौहारों और धार्मिक कार्यक्रमों में डीजे, ध्वनि विस्तारक यंत्रों के लिए जारी निर्देशो की जानकारी संचालको को दी है। जिसके तहत शासकीय संपत्ति या अन्य प्रकार की किसी वस्तुओं/ सुविधाओं का उपयोग जाने के लिए उसकी पूर्वानुमति लेना अनिवार्य है। ऐसा ना किये जाने पर कार्यवाही की चेतावनी दी गई है।

75 डेसीबल से जायदा नहीं होनी चाहिए ध्वनि :

इस बैठक में स्पष्ट किया गया है कि लाउड स्पीकर या ध्वनि विस्तारक यंत्र का उपयोग सार्वजनिक स्थलों पर उस क्षेत्र के परिवेश ध्वनि पैमाने से 10 डी. बी. (ए) से अधिक नहीं होना चाहिये या 75 डी. बी. (ए) से अधिक नही होना चाहिए है। इसके अलावा रात 10 बजे से सुबह 6 बजे के बीच ध्वनि विस्तारक यंत्र, वाद्य यंत्रों का उपयोग प्रतिबंधित रहेगा। इस तरह ध्वनि विस्तारक यंत्र का उपयोग के दौरान एन.जी.टी. और शासन द्वारा ध्वनि प्रदूषण नियंत्रण के लिये निर्धारित मानकों, कोलाहल अधिनियम और सर्वोच्च न्यायालय, उच्च न्यायालय के दिशा निर्देशों का अनिवार्य रूप से पालन करना होगा। वहीँ डीजे संचालकों को जानकारी दी गई है कि वाहनों पर साउंड सिस्टम का प्रयोग प्रतिबंधित रहेगा। मार्ग अवरुद्ध करने पर भी पुलिस कार्यवाही करेगी। जिसका भुगतान डीजे संचालक को करना होगा।

इसके अलावा शासकीय, अशासकीय अस्पताल, समस्त शासकीय, अशासकीय शैक्षणिक संस्थान, जिला एवं सत्र न्यायालय, अन्य न्यायालय, शासकीय कार्यालय की 100 मीटर की सीमा को कोलाहल प्रतिबंधित क्षेत्र (जोन्स आफ साइलेंस ) घोषित किया गया है।  इसका पालन किया जाना अनिवार्य होगा। इस तरह सभी डीजे संचालकों को उपरोक्त निर्देश दिये गये है।