मंदिर की प्रसिद्धी और आय को लेकर किशोर कुकरेजा ने किया चौंकाने वाला काण्ड, कड़ी जांच के बाद दो लोग हुये गिरफ्तार।

जूनागढ़ (गुजरात) : बीते दिनों जिले में गिरनार पर्वत पर स्थित ऐतिहासिक श्री गुरु गोरक्षनाथ मंदिर में हुई तोड़फोड़ की घटना ने पूरे प्रदेश को हिला दिया था, लेकिन अब इस मामले में पुलिस जांच की जांच में चौंकाने वाला बड़ा खुलासा हुआ है। दरअसल, मंदिर में मूर्ति तोड़ने और उसे जंगल में फेंकने का आरोप किसी बाहरी व्यक्ति पर नहीं लगा है, बल्कि मंदिर के ही कर्मचारी और एक स्थानीय फोटोग्राफर पर लगा है। जिसके बाद इस मामले में दोनों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है।

ऐसे हुआ खुलासा?

सामने आई रिपोर्ट के अनुसार, जूनागढ़ क्राइम ब्रांच ने जब इस संवेदनशील मामले की जांच शुरू की, तो उन्होंने 156 जगहों पर लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली। जिसमें मंदिर की सीढ़ियों, रोपवे पॉइंट्स, आसपास के क्षेत्रों और धर्मशालाओं तक की बारीकी से जांच की गई। जिसमें पुलिस ने 500 से ज्यादा श्रद्धालुओं की आवाजाही को ट्रैक किया गया और करीब 200 स्थानीय लोगों से पूछताछ की गई। इस मामले में संदेही दीक्षित (किशोर) कुकरेजा (42) जो मंदिर में पिछले दो सालों से वैतनिक कर्मचारी के रूप में काम कर रहा था। दूसरी तरफ रमेश भट्ट (50) स्थानीय फोटोग्राफर, जो पहले मंदिर में काम कर चुका था। इन दोनों को हिरासत में लेकर जब सख्ती से पूछताछ की गई तो उन्होंने अपना अपराध कबूल कर लिया। जिसके बाद मामला खत्म हुआ।

पुलिस का बयान :

जूनागढ़ के एसपी सौरभ ओदेदारा ने बताया कि कुकरेजा महाराष्ट्र के उल्हासनगर का रहने वाला है और वह पिछले दो साल से मंदिर में कार्यरत था। लेकिन मंदिर की आय और प्रसिद्धि को लेकर वह असंतुष्ट था। एसपी ओदेदारा ने कहा “वह चाहता था कि मंदिर में भीड़ बढ़े, अधिक दान आए और इसे लेकर चर्चा हो। इसीलिए उसने यह साजिश रची ताकि मंदिर अचानक सुर्खियों में आ जाए।” वो चाहता तो मंदिर का भला था, लेकिन उसके इस तरीके ने गलत कृत्य को अंजाम दे दिया।

कैसे हुई घटना?

दरअसल, यह घटना 4 अक्टूबर की रात को हुई। यहाँ जांच में सामने आया कि कुकरेजा और भट्ट ने उस वक्त घटना को अंजाम दिया जब मंदिर के पुजारी योगी सोमनाथ जी (60) अपने कमरे में सो रहे थे। तब दोनों ने पहले पुजारी के कमरे का दरवाजा बाहर से बंद किया ताकि कोई उन्हें रोक न सके। इसके बाद उन्होंने मंदिर के भीतर रखी श्री गुरु गोरखनाथ जी की मूर्ति और उसके चारों ओर लगे कांच के ढांचे को तोड़ डाला।

इस घटना के अगले दिन, 5 अक्टूबर की सुबह, पुजारी योगी सोमनाथ जी ने देखा कि मंदिर के अंदर तोड़फोड़ हुई है और मूर्ति गायब है। उन्होंने तुरंत पुलिस को सूचना दी। उस समय कुकरेजा ने खुद ही पुजारी को भ्रमित करते हुए कहा कि “चार अज्ञात लोग मंदिर में घुसे और सब तोड़ दिया।” इसके बाद, पुजारी के कहने पर भावनगर पुलिस स्टेशन में अज्ञात लोगों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई गई। जिसकी शिकायत पर पुलिस ने जांच शुरू की।

फूटा श्रद्धालुओं का गुस्सा :

इस घटना के बाद जैन समुदाय और स्थानीय श्रद्धालु भारी आक्रोश में आ गए। उन्होंने प्रशासन से मांग की कि दोषियों को जल्द गिरफ्तार किया जाए और मंदिर की सुरक्षा बढ़ाई जाए। लोगों के विरोध और धार्मिक तनाव को देखते हुए पुलिस ने अपनी जांच तेज कर दी। वहीँ इस मामले में पुलिस ने मंदिर और उसके आसपास के होटल व धर्मशालाओं के रिकॉर्ड खंगाले। कई जगहों से सबूत जुटाए गए। एक फुटेज में कुकरेजा और भट्ट को आरती के बाद मंदिर में रुकते हुए और कुछ सामान ले जाते हुए देखा गया।

इसी से पुलिस को पुख्ता सबूत मिले कि घटना में वही दोनों शामिल हैं। बाद में उन्होंने स्वीकार किया कि उन्होंने 4 अक्टूबर की शाम आरती के बाद मंदिर के कांच तोड़े, दरवाजा खोला और 50 किलो वजनी मूर्ति उठाकर जंगल में फेंक दी। पुलिस ने फिलहाल दोनों आरोपियों को इस घटना में गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस ने उन पर धार्मिक स्थल को नुकसान पहुंचाने और आपराधिक साजिश रचने के तहत मामला दर्ज किया है। हालांकि, जांच जारी है कि क्या इस घटना में और लोग शामिल थे या इसे किसी बड़े उद्देश्य से किया गया था।

इस मामले की शुरुआत सप्ताह भर पहले हुई थी जूनागढ़ के पुलिस अधीक्षक (एसपी) सुबोध ओडेदरा ने बताया था कि, “गिरनार पहाड़ी पर स्थित एक मंदिर में गुरु गोरखनाथ की मूर्ति को शनिवार देर रात क्षतिग्रस्त कर दिया गया। स्थानीय अपराध शाखा, विशेष अभियान समूह और भवनाथ पुलिस थाने के अधिकारियों ने शिकायत मिलने के बाद जांच शुरू कर दी।.” इस पहाड़ी को रेवतक पर्वत भी कहा जाता है और इस पर जैन और हिंदू मंदिर स्थित हैं और तीर्थयात्रियों को शिखर तक पहुंचने के लिए 10,000 पत्थर की सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं। गोरखनाथ एक श्रद्धेय हिंदू योगी और नाथ संप्रदाय के संस्थापक हैं। 1,117 मीटर की ऊंची चोटी पर स्थित है।