30 अक्टूबर को सेवा पथ का नौ स्वरूपों में कन्यादान का भव्य आयोजन, समाजसेवी पहलाज खेमानी की बिटिया भी लेंगी फेरे।

राकेश डेंगवानी/रायपुर : राजधानी के जाने माने समाजसेवी पहलाज खेमानी प्रति वर्ष नवरात्री के पश्चात् सेवा पथ द्वारा माता की आराधना स्वरुप नौ कन्याओं के विवाह का आयोजन सामाजिक स्तर पर लगातार करते आये है, इसमें देवी माता के नौ रूपों को ध्यान में रखकर इस भव्य विवाह का आयोजन किया जाता है। माता के नौ रूपों की पूजा नवरात्री में की जाती है, एक कथा के अनुसार, माता भगवती देवी दुर्गा ने महिषासुर नामक असुर के साथ नौ दिन तक युद्ध किया था, उसके बाद नवमी की रात्रि को उसका वध किया था। उस समय से देवी माता को ‘महिषासुरमर्दिनी’ के नाम से भी जाना जाता है। तभी से मां दुर्गा की शक्ति को समर्पित नवरात्रि का व्रत करते हुए इनके 9 स्वरूपों की पूजा की जाती है। इसी से प्रेरणा लेकर रायपुर की सामाजिक संस्था “सेवा पथ” ने प्रतिवर्ष नौ कन्याओं को देवी स्वरूप मानकर उनके विवाह का जिम्मा विगत 6 वर्षों से उठाया है, जिसका प्रतिवर्ष भव्य आयोजन संस्था द्वारा किया जाता है।

सादगी और कम खर्च में पिता अपनी बेटियों को करते है विदा :

जहाँ एक बेटी का पिता होना समाज में गर्व करने वाली बात है, वहीं वर्तमान कुरीतियों के कारण एक पिता पर कर्ज लेकर बेटियों का विवाह करना एक अभिशाप भी बनता जा रहा है। बेटी के विवाह में भव्य आयोजन करने के आडंबर और एक दूसरे से अधिक दहेज देने की होड़ का अनुसरण करते – करते मध्यम वर्गीय पिता अपनी बेटी की शादी तो धूमधाम से कर लेता है, उसके बाद वो पूरी जिन्दगी मेहनत करके उस शादी का कर्ज चुकाते-चुकाते बुढ़ा हो जाता है। लगातार बढ़ती महंगाई और विवाह की व्यवस्था ने एक मध्यमवर्गीय परिवार के मुश्किलें खड़ी कर दी है, यानी कि एक बेटी के पिता का फर्ज निभा पाना बहुत ही कष्टदायक है। वहीँ एक विवाह को करने के लिये मध्यमवर्ग लगभग 10 – 15 लाख का खर्चा भी उठाता है, जो प्रतिवर्ष लगातार बढ़ता ही जा रहा है। वहीँ जब नौ कन्याओं का विवाह एक स्थान पर होता है और उसका खर्च समाज के वरिष्ठों द्वारा वहन किया जाता है, तो माता-पिता को बड़ी राहत मिलती है। ऐसे में प्रतिवर्ष सेवा पथ का यह कार्य बेहद ही प्रशंसनीय है।

विवाह में होने वाली सभी रस्में निभाई जायेंगी :

नौकन्या विवाह का प्रमुख कार्यक्रम 30 अक्टूबर 2025 गुरुवार को रखा गया है, जिसमें दिनांक 29 अक्टूबर बुधवार
को बहराणा साहेब की पूजा की जायेगी, तथा अगले दिन 30 नवम्बर को सुबह से ही वैवाहिक कार्यक्रम शुरु हो जायेंगे, जिसमें रामसत, मुकुट बंधन, दूल्हों की बारात, कन्याओं की बारात, जानी वासा, लेडिस संगीत (लाडे), माता स्वरूपी कन्याओं की आरती, वेदी – फेरे (नौ पंडितों द्वारा विधि विधान से विवाह संपन्न करायेंगे) उसके बाद रात को विशाल मंच पर 9 वर-वधुओं का संगीतमय रिसेप्शन रहेगा। रात्री 9 बजे से आशीर्वाद समारोह का आयोजन किया जायेगा। यह सम्पूर्ण कार्यक्रम राजधानी रायपुर के अग्रसेन धाम में आयोजित किया जा रहा है, जो कि बड़े ही भव्य स्वरूप में होगा, इसमें राज्यभर के सैकड़ों अथितियों सहित कई वरिष्ठ जन और समाजसेवी भी शामिल होंगे। इस आयोजन को संपन्न करने के लिये समाज के लोगों ने दिल खोलकर सहयोग दिया है। वहीँ आपको खास बात बता दें कि समाजसेवी पहलाज खेमानी प्रतिवर्ष यह आयोजन करते है, जिसमें इस बार खुद उनकी बिटिया भी फेरे लेगी, जो समाज के अन्य वर्ग के लिये एक महत्वपूर्ण उदाहरण बनेगा।

वैवाहिक कार्यक्रम इस प्रकार रहेगा :

दिनांक 30 अक्टूबर 2025 गुरुवार
सुबह 9 बजे :- रामसत
सुबह 11 बजे :- वर-वधुओ की बारात
दोपहर 1.15 बजे :- जानीवासा
दोपहर 2 बजे :- लेडिस संगीत
शाम 5 बजे :- वेदी-फेरे
रात्रि 9 बजे :- आशीर्वाद समारोह
स्थान :- अग्रसेन धाम
सिटी माल 36 के आगे, जोरा, रायपुर